Corona in mp

मध्यप्रदेश में बीते 2 दिन में कोरोना से 4 मौतें रिपोर्ट हुई हैं। वहीं इस महीने अबतक प्रदेश में कुल 14 मौतें दर्ज हुई हैं। जो कि जून मुकाबले 5 ज्यादा है। संक्रमण की स्पीड भी जून के मुकाबले डबल हो चुकी है। जून में 1878 संक्रमित मिले थे। जुलाई में अबतक 5380 मरीज मिल चुके हैं। इनमें आधे तो इंदौर से हैं, भोपाल की स्थिति भी चिंताजनक है।थर्ड वेव गुजरने के बाद मार्च से मई तक तीन महीनों में एक-एक मरीज की मौत हुई, लेकिन जून में मौत के मामले बढ़ने लगे। सिर्फ तीन शहरों जबलपुर, इंदौर और भोपाल में जून के महीने में 9 मरीजों की मौत हो गई। जून से संक्रमण ने रफ्तार पकड़ी और कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या भी बढ़ गई। इस महीने में ही प्रदेश में अबतक 10 मरीज दम तोड़ चुके हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग मरीजों की मौत को एक से दो हफ्ते बाद दर्ज कर रहा है।

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Corona returning in madhya pradesh

28.06.2022
मध्यप्रदेश में कोरोना लौट रहा है। पिछले 24 घंटे में कोरोना के 74 नए मरीज मिले हैं। जून के 27 दिन में आंकड़ा बढ़कर 1463 हो गया। जबलपुर में 10 दिन के अंदर दो मरीज की मौत हो गई। इन 27 दिनों में 5 मरीज दम तोड़ चुके हैं। अप्रैल और मई में एक-एक मरीज की मौत हुई थी। रविवार को प्रदेश में 6236 सैंपल की जांच की गई। इनमें 1.18% लोग पॉजिटिव मिले हैं। भोपाल में संक्रमण दर प्रदेशभर में सबसे ज्यादा है, दूसरे नंबर पर इंदौर है।जनवरी में आई कोरोना की थर्ड वेव के बाद सिर्फ अप्रैल के महीने में सुकून रहा, लेकिन इसके बाद से लगातार कोरोना के संक्रमितों की संख्या बढ़ती जा रही है। जनवरी में 1,79,656 नए मरीज मिले थे और 51 संक्रमितों की मौत हुई थी। फरवरी में 65,448 मरीज मिले और 105 संक्रमितों ने दम तोड़ दिया। मार्च में 1,945 संक्रमित मिले और 5 मौतें हुईं। अप्रैल में सबसे कम मात्र 354 केस मिले और एक की मौत हुई। मई में 1127 मामले सामने आए और एक मरीज ने दम तोड़ दिया था। लेकिन इस महीने में लगातार मामले बढ़ रहे हैं। महीने के 27 दिनों में 1463 संक्रमित मिल चुके हैं और पांच मरीजों की मौत हुई है।

इस महीने हर हफ्ते इतने मरीज

जिला पहला सप्ताह दूसरा सप्ताह तीसरा सप्ताह चौथा सप्ताह
इंदौर 59 121 161 138
भोपाल 38 98 134 104
ग्वालियर 12 14 21 15
जबलपुर 4 28 36 36
मप्र 218 385 466 394

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Continuous increase in the number of active patients of Corona in 27 districts of Madhya Pradesh

17.06.2022
मप्र में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बीते दस दिनों में ही कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या 37 फीसदी बढ़ गई है। 6 जून को एमपी में कोरोना के मात्र 254 एक्टिव केस थे। गुरुवार को जारी हेल्थ बुलेटिन में यह आंकड़ा बढ़कर 400 पर पहुंच गया है। प्रदेश के 27 जिलों में कोरोना के मरीज सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में पड़ोसी राज्यों में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए पंचायत और नगरीय चुनाव में संक्रमण बढ़ने की संभावना भी बढ़ रही है।पिछले महीने 30 मई को स्वास्थ्य आयुक्त ने डेली कोविड टेस्टिंग का टारगेट तय करते हुए प्रदेश में रोजाना 25 हजार जांच करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद सिर्फ छह-सात हजार संदिग्ध मरीजों की यानी रोज सिर्फ एक चौथाई जांच ही हो रही है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर में एक हफ्ते में जितने सैंपल जांचे गए हैं, उतनी जांच अकेले एक दिन में करने का टारगेट है। इसके बावजूद 15-20 फीसदी जांच हो पा रही है।पिछले दस दिनों में कोरोना के 147 एक्टिव केस बढ़े हैं। 6 जून से 16 जून तक भोपाल में 59, इंदौर में 58, जबलपुर में 26, डिंडोरी में 10, ग्वालियर, सीहोर में छह-छह, हरदा में पांच, होशंगाबाद में चार, कटनी, निवाड़ी में तीन-तीन, मंडला, रतलाम, सागर में दो-दो और सतना-टीकमगढ़ में एक- एक एक्टिव केस बढ़ा है।

मध्यप्रदेश : सरकारी अस्पताल खुलेंगे ‘एकल पारी’ में, आएगा ‘राईट टू हैल्थ’

मध्यप्रदेश : 30 मई 2019

मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ ने सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं की सुदृढ़ बनाने के लिए विशेषज्ञों की सीधी भर्ती करने के निर्देश दिए और उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य लोगों का अधिकार हो इसके लिए “राइट टू हेल्थ” की दिशा में विचार करें। सीएम ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्री तुलसी सिलावट उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ये दिए निर्देश –

मरीजों की, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों की सुविधा देखते हुए सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के देखने का समय 9 से 4 निर्धारित किया जाना चाहिए।

— मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल परिसर में निजी भागीदारी में डायग्नोस्टिक सेंटर स्थापित किए जाए।

— चिकित्सा शिक्षा और लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता है। इसे लेकर सीएम ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड (CSR) अधिक से अधिक प्रदेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में आए इस दिशा में विशेष प्रयास करने को कहा।

— राष्ट्रीय स्वास्थ्य सूचकांकों के बीच के अंतर को समाप्त करने के लिए लक्ष्य और समय आधारित रणनीति बनाएं ।

— मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने को सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल कर परिणाम आधारित योजनाएं बनाएं ।

— निजी नर्सिंग कॉलेजों में फैकल्टी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ।

— डॉक्टर अस्पतालों में उपलब्ध हों और विशेषज्ञों की सेवाएं मरीजों को मिले ।

— स्वस्थ्य मध्यप्रदेश के लिए जरूरी है कि स्वास्थ्य सुविधाओं और व्यवस्थाओं का हर स्तर पर उन्नयन कर उन्हें बेहतर बनाएं।
बैठक में मुख्य सचिव श्री एस.आर. मोहंती, प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण श्रीमती पल्लवी जैन गोविल, सचिव श्री राजीव दुबे एवं आयुक्त स्वास्थ्य श्री नीतेश व्यास उपस्थित थे।

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Prerna award and scheme

National Population stabilization Fund

Prerna Award: In order to help push up the age of marriage of girls and space the birth of children in the interest of health of young mothers and infants, JSK launched PRERNA, a Responsible Parenthood strategy in all districts of seven high focus states namely Bihar, Uttar Pradesh, Madhya Pradesh, Chhattisgarh, Jharkhand, Odisha and Rajasthan. The strategy has been to identify the couple and award couples who have broken the stereotype of early marriage, early childbirth and repeated child birth and have helped change the mindsets of the community.

 

Prerna Scheme: In order to become eligible for award under the scheme, the girl should have been married on or after 19 years of age and given birth to the first child after at least 2 years of marriage. The couple will get an award of Rs.10,000/- if it is a Boy child or Rs.12,000/- if it is a Girl child. If birth of the second child takes place after at least 3 years of the birth of first child and either parent voluntarily accept permanent method of family planning within one year of the birth of the second child, the couple will get an additional award of Rs.5,000/- (Boy child) / Rs.7,000/- (Girl child). The amount of award will be given to the beneficiaries in their Adhar linked account through DBT.
The scheme is meant only for BPL families.

Attached – Prerna yojana scheme guideline and application format