Danger on the lab technicians

27.07.2022
राजधानी समेत प्रदेश में काेरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर काेरोना की जांच करने वाले पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के 15 लैब टेक्नीशियनों की नौकरी पर खतरा उत्पन्न हो गया है। काॅलेज प्रबंधन ने लैब टेक्नीशियनों को वेतन देने के लिए फंड नहीं होने का हवाला दिया है।डीन व वित्त अधिकारी इस मामले में कलेक्टर से मिलकर महामारी से मिलने वाले फंड के लिए गुहार भी लगा चुके हैं। कलेक्टर ने फंड देने का आश्वासन भी दिया है। दूसरी ओर भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि कॉलेज के ऑटोनामस बैंक अकाउंट में 12 से 15 करोड़ रुपए जमा है।इसके बाद भी वेतन देने के लिए कलेक्टर से फंड की मांग की जा रही है। प्रदेश में कोरोना के केस लगातार बढ़ रहे हैं तो टेस्ट बढ़ाने की जरूरत है। ऐसे में कॉलेज प्रबंधन फंड का बहाना कर दैनिक वेतन भोगी के बतौर काम करने वाले टेक्नीशियनों को नौकरी से निकालने की तैयारी कर रहा है। हाल ही में कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर भूरे से डीन व वित्त अधिकारी ने मुलाकात कर टेक्नीशियनों के वेतन के लिए फंड मांगा।

प्रदेश का दूसरा वायरोलॉजी लैब
मेडिकल कॉलेज स्थित वायरोलॉजी लैब प्रदेश का दूसरा है। सबसे पहले जगदलपुर मेडिकल कॉलेज में वायरोलॉजी लैब शुरू हुई। इस लैब में कोरोना ही नहीं स्वाइन फ्लू, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों की जांच की जा सकती है। पूरे कोरोनाकाल में सबसे ज्यादा जांच में इस लैब का दूसरा स्थान है। सबसे ज्यादा सैंपलों की जांच एम्स में हुई है। जानकारों का कहना है कि लैब एडवांस है और इसमें अच्छी जांच हो रही है।

टेक्नीशियनों की सेवाएं एक महीने बढ़ाने को कहा गया है। इसके लिए फंड उपलब्ध कराया जाएगा। केसेस के हिसाब से टेक्नीशियनों की सेवाएं बढ़ाई जाएंगी।
डॉ. सर्वेश्वर भूरे, कलेक्टर रायपुर

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सैकड़ों चिकित्सक बेरोजगार, नहीं निकलेगी कोई भर्ती

राजस्थान में एक जमाना था जब हजार चिकित्सकों कि भर्ती परीक्षा होती तो पांच सौ चिकित्सक परीक्षा देने आते थे, फिर पदस्थापन के बाद करीब चार सौ लोग उस जगह पर जाने का मन बनाते थे, जगह पर जाने के बाद वहां के हालातों से जूझने के बाद करीब सौ लोग भाग खड़े होते थे और तीन सौ चिकित्सक ही सेवा देते थे, उस समय पैसा भी कम मिलता था, समय के साथ सेलरी बढ़ी जो कि आज के दिन नियुक्ति के प्रथम माह में 56100/- है, प्रोबेशन भी एक साल का है उसके बाद स्थाई हो जाने पर सेलरी काफी बढ़ जाती है, साथ ही सेवारत चिकित्सकों को सेवाकाल के अनुसार उच्च शिक्षा (पीजी) में नीट परीक्षा के प्राप्तांकों पर 10-20-30% बोनस अंकों की व्यवस्था भी है, यानी नौकरी अच्छी है |

पिछले कुछ सालों में इसी कारण भर्तियों में भीड़ बढ़ गयी और चयन मुश्किल होने लगा, पदस्थापन में भी दिक्कतें आने लगी, आज के दिन राजस्थान में हालात ये हैं कि चिकित्सा अधिकारीयों के स्वीकृत पद 6200 हैं और प्रदेश में कार्यरत चिकित्सा अधिकारीयों की संख्या 7500 है, ये अतिरिक्त चिकित्सक UTB (Urgent Temporary Basis) वाले हैं, देखें तो हालात ये हैं कि आगामी कई वर्षों तक राजस्थान सरकार को चिकित्सा अधिकारीयों की कोई भी भर्ती नहीं निकालनी है |

बहुत से नए चिकित्सक MBBS करने के उपरांत इंतजार कर रहे हैं कि कब सरकारी सेवा की राह खुले और वे सेवा में आवें लेकिन राह कठिन है |

विकल्प –

  1. स्वीकृत चिकित्सा अधिकारीयों के पद 6200 से बढाकर 10000 किये जावें एवं भर्ती निकाली जावे |
  2. करीब 1500 चिकित्सा अधिकारीयों की पदोन्नति वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के पद पर होनी करीब एक साल से बकाया है, अगर इनकी पदोन्नति हो जाए तो ये MO के 1500 पद खाली हो जायेंगे और भर्ती की राह खुलेगी, लेकिन सरकार पदोन्नति करने में असफल रही है, कारण पता नहीं |
  3. UTB पर कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी ज्वाइन की जा सकती है लेकिन वो रिक्त पदों पर ज्वाइन करवाते हैं, जिनकी संख्या भी काफी कम है |

देखना दिलचस्प रहेगा कि कम चिकित्सकों का रोना रोने वाली सरकार हजारों बेरोजगार चिकित्सकों को कैसे रोजगार देती है और प्रदेश कि ग्रामीण जनता को चिकित्सा व्यवस्थाएं मुहैया करवाती है |

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job responsibilities of health professionals,GOR

job responsibilities of health professionals of medical,health and family welfare department,Govt of rajasthan
73 Dt. 25.07.2015