bhopal 1st dental microscope

अब मुंह की बीमारियों की जांच करने के लिए अंदाजे का इलाज नहीं बल्कि सटीक जांच के बाद उपचार और सर्जरी हो सकेगी। हमीदिया अस्पताल में प्रदेश का पहला डेंटेस्ट्री माइक्रो ​​​​​स्कोप शुरु किया गया है। ​​​​​​​जीएमसी के दंत रोग विभाग के एचओडी डॉ. अनुज भार्गव ने बताया कि आमतौर पर डॉक्टर अपनी आंखों से मुंह के अंदर देखकर इलाज करते हैं जहां तक जैसा दिखता है उसी के आधार पर इलाज किया जाता है। लेकिन मुंह के अंदरूनी कई ऐसे भाग होते हैं जहां आंखों से नहीं देखा जा सकता। उन हिस्सों की जांच में ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप कारगर साबित होगा। प्रदेश में हमीदिया ऐसा अस्पताल है जहां दंत रोग विभाग में इस मशीन से जांच और उपचार होगा। डीन डॉ.अरविंद राय के विशेष प्रयासों से हमीदिया अस्पताल के दंत रोग विभाग को यह मशीन मिली है।
16 गुना तक जूम कर देख पाएंगे मुंह के अंदरडॉक्टर भार्गव ने बताया कि आमतौर पर 0.2 तक मुंह के अंदर देखा जा सकता है। लेकिन ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप के जरिए जूमिंग कैपेसिटी 16 गुना तक बढ़ जाती है। ऐसे में मुंह के अंदर के हिस्से को बारीकी से देखा जा सकता है।

इन मामलों में मिलेगी मदद

रूट कैनाल, दांतों की भराई, रेस्टोरेशन में मदद मिलेगी
एक्सीडेंट में बिगडे चेहरे के अंदरूनी हिस्सों की जांच आसानी से हो सकेगी
मुंह, होंठ के टांके लगाने में आसानी से देख सकेंगे
मुंह के कैंसर की जांच में मदद मिलेगी।

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kidnapping of baby in sms jaipur

प्रदेश के सबसे बड़े SMS हॉस्पिटल से बुधवार शाम 4 महीने का बच्चा चोरी हो गया। बड़े पोते का इलाज कराने आए दादा-दादी ने अपना छोटा पोता खो दिया। किडनैपर ने दो दिन रेकी की 90 कैमरों को धोखा देकर मासूम का किडनैप कर ले गया। SMS हॉस्पिटल थाना पुलिस ने बच्चे की किडनैपिंग का मामला दर्ज किया है। हॉस्पिटल में लगे CCTV फुटेजो को खंगालने के साथ ही बच्चा चोर की तलाश की जा रही है।SHO नवरतन धोलिया ने बताया कि दौसा के चांदराना निवासी कालूराम ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है। घटना शाम 6 बजे अस्पताल के बांगड़ पार्क की है। मासूम के दादा दौसा के चांदराना निवासी कालूराम और दादी धोली देवी बड़े पोते आयुष (4) का इलाज कराने आए थे।बुधवार शाम दादा-दादी पोते काे लेकर युवक के साथ बांगड़ के पार्क के पास बैठे थे। इसी दौरान इंद्रा रसोई से खाना मिलना शुरू हुआ ताे दादी आरोपी युवक काे पोता संभला कर बड़े पोते के लिए खाना लेकर वार्ड में चली गई। पास ही दादा खाना खा रहा था। 15 मिनट बाद जब दादी लौटी ताे पता चला कि युवक 4 महीने के दिव्यांश को लेकर चला गया।

इलाज के बहाने बढ़ाई नजदीकियां
आयुष को 24 जुलाई को भर्ती करवाया था। पत्नी धोली देवी, बेटा अंकुर, बहू खेला देवी व 4 माह का दिव्यांश हॉस्पिटल में थे। दादी धोली देवी ने बताया कि बुधवार को पार्क में दोपहर में 12:30 बजे 30 वर्षीय व्यक्ति ने बातचीत शुरू की। उसका कहना था कुछ दिन भाई को भी ऐसी समस्या थी। उसने भरोसा दिलाया कि वह उनके पोते का अच्छे डॉक्टर से इलाज करवाएगा। इस पर वहआयुष की रिपोर्ट के साथ दिव्यांश को लेकर पास के ही एक निजी अस्पताल गए। यहां डॉक्टर भास्कर को आरोपी ने बच्चे की रिपोर्ट दिखाई। शाम साढे 4 बजे के करीब यह दोबारा आए। दादी ने बताया खाना लेकर अपने 4 महीने के पोते को लेकर अंदर जाने लगी तो आरोपी ने रोक कर कहा बच्चा दादा को दे दो। इस पर उन्होंने अपने पोते को दादा को संभालने के लिए दे दिया। कुछ ही देर में जब पोता नहीं दिखाई दिया तो दादा ने शोर मचाना शुरू कर दिया।

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In depression swallowed coins

02.08.2022
अवसाद (Depression) में आकर इंसान क्या-क्या कर बैठता है इसकी अजीब बानगी राजस्थान के जोधपुर में देखने को मिली है। जोधपुर में एक युवक ने अवसाद में आकर सिक्के निगल (Swallowed coins) लिये। उसके बाद पेट दर्द होने पर यह युवक मथुरादास माथुर अस्पताल पहुंचा था। वहां जांच में युवक के पेट में 50 से अधिक सिक्के होना सामने आया।यह देखकर एकबारगी डॉक्टर भी चौंक गए. बाद में डॉक्टर्स की टीम ने एंडोस्कोपी की मदद से युवक के पेट से ये सिक्के बाहर निकाले।जानकारी के अनुसार जोधपुर के एमडीएम हॉस्पिटल में हाल ही में 40 वर्षीय एक युवक पेट दर्द की शिकायत लेकर ट्रोमा सेंटर पहुंचा था।वहां पेट की जांच कराने पर पाया गया कि युवक पेट में कुछ सिक्के हैं।मामला गेस्ट्रोएंड्रोलॉजी से जुड़ा होने के कारण युवक को गेस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग रेफर किया गया. वहां डॉक्टर्स ने कुछ अन्य जांचें की।जांच के बाद युवक ने स्वीकार किया कि उसने कुछ सिक्के निगल लिए थे।

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NO facility in hospitals

nn

एमपी अजब है.. ये कहावत यूं ही नहीं कही जाती है।कहने को तो यहां की सड़कें अमेरिका जैसी हैं, शहर स्मार्ट हो गये हैं और पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं (Health facilities) बेहतर हैं. लेकिन मरीज के मरने के बाद शव को घर पहुंचाने के लिए शव वाहन तक नहीं मिलता।ताजा मामला मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शहडोल से सामने आया है. शहडोल मेडिकल कॉलेज (Shahdol Medical College) में रविवार को एक महिला की मौत के बाद जिला अस्पताल ने शव को घर ले जाने के लिए मृतक के परिवार वालों को शव वाहन तक नहीं उपलब्ध कराया। इसके बाद बेटों को मां का शव लकड़ी की पटरी में बाधकर बाइक से शहडोल जिले से पड़ोसी जिले अनूपपुर तक 80 किलोमीटर दूर अपने घर ले जाना पड़ा।
मजबूर बेटों ने बताया कि अस्पताल में न इलाज मिला और न ही मौत के बाद शव वाहन उपलब्ध कराया गया। प्राइवेट शव वाहन वाले ने 5 हजार रुपए मांगें, लेकिन परिजनों के पास इतने पैसे नहीं थे। आखिरकार बेटों ने मां के शव को बाइक पर घर ले जाना सही समझा।मृतक महिला के बेटों का आरोप है कि अनुपपुर जिले से शहडोल मेडिकल कॉलेज में अपनी मां का इलाज कराने आए थे, लेकिन यहां समुचित इलाज नहीं मिलने से उनकी मां की मौत हो गई। इसके बाद उनको शव वाहन चाहिए था, जो मांगने पर भी अस्पताल के द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया. इसके बाद बेटों ने 100 रुपए की एक लकड़ी की पटिया खरीदी और उसके ऊपर शव को बांधकर बाइक से 80 किलोमीटर का सफर तय कर अनूपपुर जिले के ग्राम गुड़ारू अपने घर पहुंचे।

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Fire in jabalpur hospital

मध्य प्रदेश के जबलपुर में सोमवार दोपहर 2:45 बजे एक निजी अस्पताल में आग लग गई। हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई। इनमें 3 स्टाफ भी हैं। 8 की हालत गंभीर है।
प्रशासन ने बताया कि तीन मंजिला न्यू लाइफ मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के एंट्रेंस पर जनरेटर में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी। हादसे के वक्त अस्पताल में 35 लोग थे, इसलिए आशंका जताई जा रही थी कि मृतकों की संख्या बढ़ भी सकती है। अस्पताल प्रबंधन का कोई बयान अभी तक नहीं आया है। हादसे की जांच जबलपुर डिवीजनल कमिश्नर बी चंद्रशेखर की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय समिति करेगी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर दुख जताया है। मध्य प्रदेश के CM शिवराज सिंह ने मृतकों के परिजन को 5-5 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है।

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Monkeypox in rajasthan

02.08.2022

राजस्थान में मंकी पॉक्स के दो संदिग्ध केस सामने आए हैं। दोनों को जयपुर के RUHS हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। उनके शरीर पर दाने नजर आ रहे हैं। एक अजमेर के किशनगढ़ और दूसरा भरतपुर जिले का रहने वाला है। सोमवार को भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट आज आएगी।RUHS के अधीक्षक डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि एक 20 साल का युवक किशनगढ़ से रविवार देर रात रेफर होकर आया था। वह बेंगलुरु में पढ़ाई करता है। उसे बुखार आने व शरीर पर दाने दिखने के बाद संदिग्ध मानते हुए जयपुर रेफर किया गया। सतर्कता बरतते हुए मरीज को आइसोलेट किया है। उसके सैंपल मंकी पॉक्स की जांच के लिए SMS मेडिकल कॉलेज भिजवाए है। मरीज की अभी कोई ट्रेवल हिस्ट्री भी सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया रिपोर्ट आने के बाद ही कंफर्म होगा कि मंकी पॉक्स का वायरस है या चिकन पॉक्स। ऐसे में हमने सामान्य ट्रीटमेंट शुरू कर दिया है।RUHS से मिली रिपोर्ट के मुताबिक एक अन्य युवक भी सोमवार सुबह भर्ती हुआ है, जो भरतपुर का रहने वाला है। इसके हल्का बुखार होने के साथ ही शरीर पर कुछ ही दाने थे। संदिग्ध मानते हुए भर्ती किया गया है। डॉक्टर की मानें तो दोनों युवकों की तबीयत स्थिर है।

6वीं मंजिल पर बना है वार्ड
जयपुर के RUHS हॉस्पिटल में प्रशासन ने ओमिक्रॉन वाले मरीजों की तर्ज पर मंकी पॉक्स के संदिग्ध अलग से आइसोलेशन वार्ड बनाया है। यह हॉस्पिटल की छठवीं मंजिल पर है। इस मंजिल पर वार्ड के अलावा कुछ प्राइवेट रूम भी हैं। इन्हीं जगहों पर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है।

कोरोना की तरह हवा में नहीं फैलता ये संक्रमण
जयपुर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन डिपार्टमेंट के सीनियर प्रोफेसर डॉ. रमन शर्मा की मानें तो ये संक्रमण कोरोना की तरह हवा में नहीं फैलता। उन लोगों को खास बचने की जरूरत है जो विदेश से यात्रा करके आए हैं। उन्होंने बताया कि वे लोग ज्यादा सतर्क रहे, जो अफ्रीकी देशों से यहां आ रहे हैं। जिन लोगों के बुखार, गर्दन में गांठे, पूरी बॉडी पर चिकन पॉक्स जैसे दाने की समस्या आ रही है तो वह तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।डॉ. शर्मा ने बताया कि इस केस में मरीज के प्राइवेट पार्ट और मल द्वार के आसपास एनोजेनाइटल पेन होता है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, मंकी पॉक्स के लक्षण 6 से 13 दिन के अंदर दिखाई देने लगते हैं। हालांकि कई बार 5 से 21 दिन का समय भी ले सकता है। संक्रमित होने पर अगले 5 दिन के अंदर बुखार, सिरदर्द, थकान और पीठ में दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं।

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Instruction to smooth running of facility

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी से जुड़ी जांचें सुचारु रखने के निर्देश दिए गए हैं। सभी चिकित्सा अधीक्षकों से कहा गया है कि एक माह का अतिरिक्त रिजेंट की व्यवस्था की जाए, जिससे मरीजों को जांच के लिए परेशान न होना पड़ा।कई जिला व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पैथोलॉजी टेस्ट के लिए प्रयोग होने वाले रिजेंट (केमिकल) की कमी हो गई है। ऐसे में जरूरी जांचें नहीं हो रही हैं। इसकी जानकारी मिलने पर c उन्होंने सभी चिकित्सा अधीक्षकों से जांच की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट मांगी है। यह भी पूछा है कि कौन-कौन सी जांचें अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।

इस तरह की आ रही हैं दिक्कतें
गोंडा जिला अस्पताल में थायरॉयड की जांच नहीं हो रही है। यहां जांच मशीन (कैलिबेटर) में लगने वाला कंट्रोल नहीं है। सीएमएस डॉ. इंदुबाला ने बताया कि कंट्रोल उपलब्ध कराने के लिए इंडेंट भेजा गया है। इसी तरह फर्रुखाबाद के डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में रिजेंट खत्म होने की वजह से जांचें प्रभावित हो रही हैं। किडनी व लिवर से जुड़ी जांच महिला अस्पताल से कराई जा रही है। इसी तरह प्रदेश के अन्य अस्पतालों में कुछ न कुछ समस्या बनी हुई है।

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Insulting of a doctor

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने बाबा फरीद स्वास्थ्य विज्ञान विश्विवद्यालय (BFUHS) के कुलपति को एक अस्पताल के निरीक्षण के दौरान अस्पताल में गंदे गद्दे पर लेटने को कथित तौर पर मजबूर करने के लिए पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री चेतन सिंह जौरामाजरा की शनिवार को निंदा की. आईएमए ने मंत्री से उनके ‘दुर्व्यवहार’ के लिए बिना शर्त माफी मांगने और इस्तीफे की मांग की. आईएमए ने साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से उनके खिलाफ तुरंत आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की.
आईएमए ने एक बयान में कहा, ‘‘आईएमए पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री की अपमानजनक कार्रवाई की कड़ी निंदा करता है, जिन्होंने 29 जुलाई को बीएफयूएचएस के कुलपति डॉ. राज बहादुर को अपमानित किया. यह न केवल कुलपति का अपमान है, बल्कि इससे पूरे भारत में पूरे चिकित्सा बिरादरी का अपमान हुआ है.” यह पता चला है कि बहादुर ने पद से इस्तीफा दे दिया है और पंजाब के मुख्यमंत्री से उन्हें सेवा से मुक्त करने का अनुरोध किया है. आईएमए ने कहा, ‘‘नेताओं द्वारा चिकित्सक समुदाय को अपमानित और परेशान करने की इस तरह की कई घटनाएं हुई हैं. इससे डॉक्टरों को पीड़ा होती है.”
एसोसिएशन ने कहा, ‘‘आईएमए स्वास्थ्य मंत्री से उनके दुर्व्यवहार के लिए तत्काल बिना शर्त माफी मांगने और इस्तीफे की मांग करता है. आईएमए पंजाब के मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने और मंत्री के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की अपील करता है” घटना शुक्रवार की है, जब जौरामाजरा फरीदकोट स्थित गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का निरीक्षण कर रहे थे, जो बीएफयूएचएस के अंतर्गत आता है.इंटरनेट पर वायरल घटना के एक वीडियो में दिख रहा है कि जौरामाजरा अस्पताल के त्वचा विभाग में रखे एक गद्दे की ‘‘खराब स्थिति” की ओर इशारा करते हुए सर्जन बहादुर के कंधे पर हाथ रखकर उन्हें उसी गद्दे पर लेटने के लिए मजबूर कर रहे हैं. वीडियो में कुलपति स्वास्थ्य मंत्री को समझाते हुए दिखाई दे रहे हैं कि वह इन सुविधाओं के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, जिस पर आम आदमी पार्टी (आप) नेता ने कहा, ‘‘सब कुछ आपके हाथ में है.”हालांकि, घटना के बाद कुलपति ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री भगवंत मान से कहा कि वह ऐसे माहौल में काम नहीं कर सकते और उन्हें सेवाओं से मुक्त किया जाए. कुलपति ने शनिवार को बताया कि मंत्री की ओर से किए गए इस तरह के व्यवहार से वह अपमानित महसूस कर रहे हैं. कुलपति के पद से इस्तीफा देने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘मैंने मुख्यमंत्री को अपनी पीड़ा व्यक्त की है और कहा है कि मैं अपमानित महसूस कर रहा हूं.” सूत्रों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने घटना पर कड़ा रुख अपनाया है और जौरामाजरा से बात की है. माना जाता है कि मान ने बहादुर को अगले सप्ताह उससे मिलने के लिए भी कहा है.

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Poor conditions of hospital

हमीदिया अस्पताल में सर्जरी के लिए आने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ने वाली है। अभी मरीजों को औसतन 10 दिन तक सर्जरी के लिए इंतजार करना पड़ता है, लेकिन अब यह इंतजार 15 से 20 दिन तक का होगा। क्योंकि, अस्पताल प्रशासन ने 1 अगस्त से हमीदिया की 2 और सुल्तानिया अस्पताल की 1 ओटी को बंद करने के आदेश जारी किए थे, लेकिन शुक्रवार से ही यहां की 2 ओटी बंद कर दी गई हैं।ओटी बंद करने की वजह एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट के 3 कंसल्टेंट को हमीदिया की नई ट्रामा इमरजेंसी यूनिट में शिफ्ट करना है। एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट की ओर से विभागों को जारी किए गए ओटी अलॉटमेंट लेटर में इसका उल्लेख है। अभी हमीदिया में 11 और सुल्तानिया अस्पताल में 3 ओटी चलती हैं।यहां मरीजों की सर्जरी करने से पहले एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट उनको बेहोशी की दवा देते हैं। यहां अभी 21 कंसल्टेंट तैनात हैं। ये रोस्टर के हिसाब से ड्यूटी करते हैं। इनमें से 3 कंसल्टेंट ट्रामा इमरजेंसी यूनिट में शिफ्ट किए गए हैं। इस कारण 3 ओटी को बंद किया जा रहा है। हमीदिया में रोज 25 लोगों की सर्जरी होती हैं।

जिम्मेदारों के गोलमोल जवाब

जब जिम्मेदारों से बात की तो उन्होंने इसे नई बिल्डिंग में शिफ्टिंग का हिस्सा बताया। यदि यह सही भी है तो शिफ्टिंग तो 1-1 करके होनी है, पर शुक्रवार को एक साथ ओटी 1 व 6 बंद कर दी गईं। फिर जिम्मेदारों ने कहा कि कि केस नहीं होने से ओटी बंद रहेगी।ऑपरेशन थिएटर (ओटी) को नई बिल्डिंग में शिफ्टिंग के लिए बंद किया जाना है, लेकिन इसके लिए पूरा प्लान बनाया गया है। एक-एक करके ओटी बंद करेंगे। 3 ओटी एक साथ बंद नहीं होंगी। हमारी कोशिश है कि मरीजों को परेशानी ना हो। ऐसा क्यों हुआ है, बात करनी पड़ेगी। -डॉ. आशीष गोहिया, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल

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NMC investigates the medical college

30.07.2022
राजधानी भोपाल के महावीर मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परिषद (एनएमसी) की छह सदस्यीय टीम ने पहुंचकर छानबीन की। टीम जब यहां निरीक्षण करने पहुंची तो गिने–चुने मरीज मिले। मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी स्टाफ भी गायब मिला। टीम को निरीक्ष्रण के दौरान मेडिकल कॉलेज में बडे़ पैमाने पर संसाधनों की कमी पाई गई है। टीम ने जांच पूरी कर ली है।

पहली बार छह सदस्यीय टीम ने की जांच

राजधानी में आमतौर पर एनएमसी की टीम में तीन सदस्य ही जांच करने आते हैं लेकिन पहली बार नेशनल मेडिकल कमीशन की तरफ से छह सदस्यीय दल को निरीक्षण करने के लिए भेजा गया है।इस मामले में महावीर मेडिकल कॉलेज के प्रशासक राजेश जैन का कहना है कि ये निरीक्षण रुटीन प्रोसेस है। ये इंस्पेक्शन हर साल होता है। टीम ने दूसरे मेडिकल कॉलेजों का भी निरीक्षण किया है। टीम ने रिपोर्ट में क्या लिखा इसकी जानकारी नहीं हैं। लेकिन मेडिकल कॉलेज में सभी व्यवस्थाएं संतोषजनक मिली हैं।

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