Conferences for family planning

05.08.2022
परिवार नियोजन को लेकर चिकित्सा विभाग अब सामाजिक गतिविधियां संचालित करने जा रहा है। इसे लेकर प्रदेश में सास- बहू सम्मेलन आयोजित होंगे। इसमें सास और बहू को बुलाकर डॉक्टर व आशा परिवार नियोजन की जानकारी देगी। इसमें सास और बहू की कम से कम 10 जोड़ियों का होना आवश्यक है। दौसा जिले में 1 हजार 280 सम्मेलन होंगे, जबकि प्रदेश में 54 हजार 536 सम्मेलन जिलेवार कराए जाएंगे।नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत परिवार नियोजन को बढ़ावा देने व इसकी जानकारी महिलाओं को देने के उद्देश्य चिकित्सा विभाग यह सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है। इसमें सास और बहू से परिवार नियोजन के अनुभव की जानकारी ली जाएगी। यह सम्मेलन तीन स्तरों पर होंगे। इनमें जिला, ब्लॉक व सेक्टर लेवल शामिल है। इन सम्मेलनों में एएनएम व आशा के साथ विभाग के अधिकारी भी शामिल होंगे। सम्मेलन एक स्वास्थ्य केंद्र पर साल में 4 बार आयोजित किए जाएंगे।

दो बच्चे वाले दंपती, नवविवाहिता को दी जाएगी जानकारी
सास-बहू सम्मेलन के लिए विभाग में शामिल होने वाली जोड़ियों को लेकर भी गाइडलाइन जारी की है। इसमें नव विवाहित के साथ दो बच्चे वाले दंपतियों का टारगेट रखा गया है। इसमें आशा अथवा एएनएम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के साथ मिलकर सास-बहू का चयन करेगी। इसके बाद उनको सम्मेलन में बुलाकर परिवार नियोजन के विभिन्न उपायों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही सम्मेलन में परिवार नियोजन के लिए बहू को प्रेरित करने वाली सास का भी चयन किया जाएगा।

प्रदेश में 54 हजार 356 व जिले में 1 हजार 280 होंगे सम्मेलन
चिकित्सा विभाग ने प्रदेश में 54 हजार 356 सास-बहू सम्मेलन के लिए जिला वार लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इसमें दौसा जिले में 1 हजार 280 सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसके िलए तैयारियां शुरू हो गई है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Improving health system in village

मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने वाले हर छात्र को अब ग्रामीण क्षेत्र में तीन साल के लिए पांच-पांच परिवार को गोद लेना होगा। इस अवधि में प्रत्येक छात्र परिवार सदस्यों से जान पहचान बढ़ाते हुए उनके घर के डॉक्टर बनेंगे। परिवार के सदस्यों की बीमारी को जानने के साथ ही कारणों का पता लगाते हुए उसकी रिपोर्ट तैयार करेंगे। रिपोर्ट के आधार पर उस गांव की स्थिति, पर्यावरण, पानी व अन्य कारणों से होने वाली बीमारियों को पता लग पाएगा।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने इस संबंध में गाइडलाइन जारी करते हुए समस्त मेडिकल कॉलेजों को पालना के आदेश दिए। आदेश की पालना में आरएनटी मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने अभी बडग़ांव पंचायत समिति क्षेत्र चुनिंदा गांव का दौरा किया। अब ये छात्र ब्लॉक सीएमएचओ, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व आशा सहयोगिनियों के माध्यम से पांच-पांच परिवार गोद लेंगे।ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की पहुंच बढ़ाने व मेडिकल छात्रों को फील्ड की जानकारी के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना को एनएमसी ने परिवार गोद कार्यक्रम का नाम दिया है। इस प्रोग्राम के तहत छात्रों को कॉलेज में किताबी ज्ञान ,अस्पताल में मरीजों कीे सेवा के साथ ही फील्ड का नॉलेज मिलेगा। वे गोद लिए परिवार के व्यवहार, बीमारियों, रहन-सहन एवं व्यवहार से जुड़े मुद्दों के बारे में जान पाएंगें।

यूं शुरू की योजना
– ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की भारी कमी
– चिकित्सकों का मरीजों के प्रति व्यवहार सुधार
– ग्रामीण क्षेत्र में होने वाली बीमारी से समय पर पता लगाना
– काउंसलिंग कर परिवार को समय पर इलाज करवाना
– ग्रामीण परिवारों से संपर्क बढ़ाना
– गांव व गोद लिए परिवार जरूरतों को समझना
– भविष्य में चिकित्सकों को गांवों में तैनाती के लिए भी तैयार करना।

इस कारण महत्वपूर्ण है योजना
– अधिकांश आबादी गांवों में रहती है उसके बावजूद डॉक्टर शहरी क्षेत्रों में हैं, इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगोंं की बीमारियों के कारणों को पता नहीं चल पाता। इस महत्ती योजना से लाभ होगा।
– वर्तमान में कम्युनिटी मेडिसिन पाठ्यक्रम के डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रेनिंग लेनी होती है, लेकिन इस कार्यक्रम में अब परिवार को गोद लेना होगा, जिससे बीमारी व कुरीतियों को पता चल पाएगा।
एनएमसी की यह महत्ती योजना है इससे भावी पीढ़ी के नए चिकित्सकों को फील्ड का नॉलेज होगा। ग्रामीणों का चिकित्सकों के प्रति विश्वास बढ़ेगा और वे खुलकर पीड़ा बता सकेंगे, ताकि उस क्षेत्र की स्थिति व बीमारियों का पता लग सकेगा।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓