ESIC admission

20.07.2022
ईएसआईसी की 11 मेडिकल काॅलेजाें में नए सत्र में एडमिशन के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू हाे गए हैं। आवेदन के लिए अंतिम तिथि 26 जुलाई तय की गई है और 27 जुलाई तक हार्डकाॅपी जमा कराई जा सकेगी।
श्रम एवं राेजगार मंत्रालय की ईएसआईसी याेजना में बीमित परिवाराें के विद्यार्थियाें के लिए ईएसआईसी की मेडिकल काॅलेजाें में सीटें रिजर्व हाेती हैं। इन सीटाें पर एडमिशन के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। देश के 11 ईएसआईसी मेडिकल काॅलेजाें में 465 सीटें बीमित परिवाराें के विद्यार्थियाें के लिए रिजर्व रहेंगी। मेडिकल काॅलेजाें में इन सीटाें पर बहुत कम शुल्क यानी सालभर की फीस 24 हजार रुपए खर्चा आता है।जबकि अन्य अभ्यर्थियाें काे सालाना एक लाख रुपए तक शुल्क देना हाेता है। सीट आबंटन के बाद साढे़ चार साल फीस चुकानी हाेती है। यानी इस याेजना से आबंटित सीटाें पर ईएसआईसी से जुड़े अल्प वेतनभाेगी कर्मचारियाें के बच्चाें काे एमबीबीएस व डेंटिस्ट बनने में आसानी रहेगी।

26 जुलाई तक ऐसे करना हाेगा आवेदन
26 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन करने के बाद हार्ड काॅपी ईएसआईसी के संबंधित कार्यालय में 27 जुलाई तक जमा करानी हाेगी। ऑनलाइन आवेदन के साथ यह सूचना अपलाेड करनी हाेगी। ऑन लाइन आवेदन ईएसआईसी की वेबसाइट www.esic.nic.in लिंक पर जाकर किया सकेगा। अभ्यर्थी काे नीट के राेल नंबर, दाे पासपाेर्ट साइज फाेटाे, ईएसआईसी कार्ड की फाेटाे प्रति, मेलआईडी, आधारकार्ड, माेबाइल नंबर, पते की जानकारी देनी हाेगी।

कहां किस मेडिकल कॉलेज में कितनी सीटें की गईं आरक्षित

ESIC मेडिकल काॅलेज फरीदाबाद- 43
ईएसआईसी मेडिकल काॅलेज जाेका काेलकाता (पश्चिम बंगाल) -65
ESIC मेडिकल काॅलेज केके नगर चैन्नई – 25
​​​​ईएसआईसी मेडिकल काॅलेज राजाजीनगर बेंगलुरु (कर्नाटक)-56 सीटें
ESIC मेडिकल गुलाबबर्गा (कर्नाटक) – 56
ईएसआईसी मेडिकल काॅलेज संस्थान नगर हैदराबाद – 43 सीटें
ईएसआईसी मेडिकल काॅलेज अलवर -20
ईएसआईसी मेडिकल काॅलेज पटना- 35
गवर्नमेंट मेडिकल काॅलेज काेयंबतूर (तमिलनाडु)- 35
एलबीएस काॅलेज, नियर चाैक मंडी हिमाचल प्रदेश- 36
गवर्नमेंट मेडिकल काॅलेज काेलाम पेरिपल्ली केरल – 38 सीटें आरक्षित की गई हैं।
ईएसआईसी की 11 मेडिकल काॅलेजाें के लिए एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हाे गई है। इसमें 26 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन करने के बाद 27 जुलाई तक हार्डकाॅपी जमा करानी हाेगी। इसके बाद आवेदकों की मेरिट लिस्ट बनेगी। – डाॅ. अनित काजला, चिकित्सा प्रभारी, ईएसआईसी झुंझुनूं

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Bariatric surgery succesfull in Ahmedabad

19.07.2022
गुजरात के बोटाद निवासी 41 वर्षीय चेतनभाई को आखिर अतिशय मोटापे से राहत मिल जाएगी। 210 किलो वजन के कारण काफी कठिनाइयों का सामना कर रहे चेतन की एशिया के सबसे बड़े अहमदाबाद सिविल अस्पताल में बैरियाट्रिक सर्जरी की गई है।मरीज के मोटापे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अपनी दैनिक गतिविधियों को ठीक से करने में असमर्थ थे। भारी वजन के बीच उनका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) भी 78 तक पहुंच गया था। गुजरात में किसी सरकारी अस्पताल में इतने वजन वाले व्यक्ति की बैरियाट्रिक सर्जरी किए जाने की यह पहली घटना है।बोटाद में हीरा घिसाई का काम करने वाले चेतनभाई पिछले काफी दिनों से वजन के कारण परेशान थे। सामान्य कुर्सी पर बैठने में असमर्थ थे। उन्हें ़पिछले सप्ताह सिविल अस्पताल में लाया गया। यहां सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. आरआर पटेल के नेतृत्व में डॉ. प्रशांत मेहता, डॉ राकेश मकवाना, डॉ विक्रम मेहता और एनेस्थेटिस्ट की एक टीम ने यह सफल ओबेसिटी बैरियाट्रिक (मिनी गैस्ट्रिक बाईपास) सर्जरी की। ऑपरेशन के एक सप्ताह बाद उनकी हालत अच्छी होने के कारण सोमवार को उन्हें छुट्टी दे दी गई। यह सर्जरी दो घंटे तक चली। निजी अस्पतालों में इस तरह का ऑपरेशन लाखों रुपए के खर्च में होता है। इसके मुकाबले सिविल अस्पताल में यह मामूली खर्च से हो गया।डॉ. प्रशान्त मेहता ने बताया कि बैरियाट्रिक सर्जरी के बाद बढ़ते वजन से छुटकारा मिलेगा। दिल के दौरा और उच्च रक्तचाप जैसी घातक बीमारियों की आशंका कम होंगी। दैनिक गतिविविधियों में आसानी होगी। जोड़ों पर पड़ने वाले भार से राहत मिलेगी।

सरकारी अस्पताल में इस स्थिति में हो सकता है ऑपरेशन

सिविल अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 40 या उससे अधिक है। या फिर 35 है लेकिन साथ में वे उच्च रक्त चाप, स्लीप एपनिया और अन्य श्वसन संबंधी रोगों से पीड़ित हैं तो उनकी बैरियाट्रिक सर्जरी की जा सकती है।

पहली बार की गई ऐसी सर्जरी

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी और अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रजनीश पटेल के अनुसार सिविल अस्पताल में इस प्रकार की सर्जरी पहलीबार की गई है। इससे पहले 500 ग्राम के शिशु से लेकर 210 किलोग्राम तक के मरीजों की अनेक तरह की सर्जरी की जा चुकी हैं। दो सौ किलो से अधिक वजन वाले मरीज की बैरियाटिक सर्जरी पहली बार की है। अस्पताल में नि:शुल्क और नहींवत खर्च से इस तरह के ऑपरेशन किए जाते हैं। निजी अस्पताल मे लाखों रुपए तक खर्च आता है। सिविल अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग ने 2017 से बैरिएट्रिक सर्जरी शुरू की थी। अब तक ऐसी आठ सर्जरी की जा चुकी हैं।

चिकित्सकों के अनुसार वजन काफी अधिक होने के कारण ऑपरेशन में कई चुनौतियां रहीं। ऑपरेशन के दौरान दो टेबल का एक साथ इस्तेमाल किया गया। मरीज को लाने ले जाने, एनेस्थीसिया, ऑपरेशन की जगह उपयोग किए गए लैप्रोस्कॉपी संबधित साधनों की अतिरिक्त व्यवस्था की गई। ज्यादा चर्बी को भेदने वाले उपकरणों को लाया गया। एक्सरे करने, वजन करने जैसी कई परेशानियों से भी गुजरना पड़ा। सामान्य सर्जरी के दौरान 10-12 कार्बन डाइऑक्साइड के दबाव की आवश्यकता होती है, जबकि ऐसी सर्जरी के लिए 20 से 25 के दबाव की आवश्यकता हुई।

डॉ. प्रशान्त मेहता, चिकित्सक जनरल सर्जरी विभाग अहमदाबाद

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Monkey pox patients in Kerala

19.07.2022
केरल में मंकीपॉक्स के दूसरे मरीज की पुष्टि ने कर्नाटक और विशेषकर दक्षिण कन्नड़ जिला प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं। जिला प्रशासन अलर्ट पर है और सह यात्रियों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार जिले में अभी तक मंकीपॉक्स का कोई सकारात्मक मामला सामने नहीं आया है। जिला निगरानी अधिकारी डॉ. जगदीश ने बताया कि यह शख्स केरल के कन्नूर का मूल निवासी है। 13 जुलाई को दुबई से मेंगलूरु हवाई अड्डे पहुंचा था और यहां से अपनी कार में कन्नूर गया था। हवाई अड्डे पहुंचने पर मंकीपॉक्स के कोई लक्षण नहीं थे। लेकिन, कन्नूर पहुंचने के बाद 15 जुलाई को लाल चकत्ते उभरने लगे। जिसके बाद उसे कन्नूर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कर जांच की गई। रिपोर्ट में मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई।उन्होंने बताया कि इस शख्स के साथ फ्लाइट में 191 यात्री थे। मरीज की सीट के करीब तीन पंक्तियों में यात्रा करने वाले सभी यात्रियों के संपर्क विवरण एकत्र किए गए हैं। इसमें मेंगलूरु के 10, उडुपी के आठ और कासरगोड़ के करीब 15 यात्री सवार थे। डॉ. जगदीश ने बताया कि सह यात्रियों को आइसोलेट किया गया है। किसी में मंकीपॉक्स के लक्षण सामने नहीं आए हैं। लक्षण सामने आने पर इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं।

स्क्रीनिंग जारी
उन्होंने बताया कि बीते एक माह से विदेश से मेंगलूरु एयरपोर्ट पहुंचने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग जारी है। यात्रियों को बुखार और चकत्तों के लिए जांचा जाता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग जारी रहेगी। मंकीपॉक्स के किसी भी संदिग्ध मामले के इलाज के लिए वेनलॉक जिला अस्पताल में 10 बिस्तरों वाला एक वार्ड आरक्षित किया गया है। ज्ञात हो कि पिछले हफ्ते, संयुक्त अरब अमीरात से केरल लौटा एक शख्स मंकीपॉक्स के लिए पॉजिटिव निकला था।

यह देश में मंकीपॉक्स का पहला ज्ञात मामला था।स्क्रीनिंग जारी

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AIIMS kalyani recruitment

आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) कल्याणी (All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) Kalyani) ने विज्ञापन संख्या 720/E-12011/6/21-(FAC) के माध्यम से विभिन्न रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. इच्छुक उम्मीदवार ऑफीशियन वेबसाइट aiimskalyani.edu.in पर जाकर एम्स कल्याणी भर्ती के लिए अंतिम तारीख से पहले तक एप्लीकेशन फॉर्म भर सकते हैं. आवेदन पत्र भरने से पहले उम्मीदवारों को ऑफिशियल नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ने की सलाह दी जाती है. आधिकारिक अधिसूचना का डायरेक्ट लिंक नीचे उपलब्ध कराया गया है।

AIIMS Kalyani Recruitment 2022: रिक्ति विवरण

प्रोफेसर – 25
एडिशनल प्रोफ़ेसर – 19
एसोसिएट प्रोफ़ेसर – 19
असिस्टेंट प्रोफ़ेसर – 26

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Incresed the stipend of doctors

राजस्थान सरकार ने राजस्थान में कार्य रेजिडेंट डॉक्टरों के वेतन में वृद्धि की और साथ ही साथ इंटर्न के लिए मौजूदा दर को संशोधित करने के लिए मंजूरी दी है। MBBS/BDS स्टूडेंट्स के लिए इंटर्न का वजीफा 7000 प्रतिमाह से बढ़ाकर 14000 प्रतिमा किया जाएगा। राजस्थान सरकार के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते की दरें डीए में भी बढ़ोतरी की जाएगी

New doc 31-May-2021 1.13 pm

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Vadodara,s gov.hospital returning the lost amile of children

18.07.2022
जन्म के समय से ही कटे हुए होंठ के साथ जन्मे बच्चों की खोई हुई मुस्कान लौटाने का काम वडोदरा का सरकारी सर सयाजीराव जनरल (एसएसजी) अस्पताल कर रहा है। यहां हर साल औसतन कटे होंठ व तालू की खामी वाले 60 बच्चों की प्लास्टिक सर्जरी की जाती है। सर्जरी नि:शुल्क होती है।गुजरात ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्य राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र से भी लोग अपने बच्चों की खोई मुस्कान लौटाने के लिए इस अस्पताल में पहुंचते हैं। करीब 20 फीसदी मरीजों ऐसे आते हैं जिनकी यह समस्या पहले की गई सर्जरी के चलते बढ़ी होती है। चिकित्सकों का कहना है कि यूं तो गर्भवती महिला की सोनोग्राफी में ही गर्भस्थ शिशु के परीक्षण के दौरान होंठ व तालू की खामी पकड़ में आ जाती है। जिससे लोगों को गर्भवती महिला की सोनोग्राफी अनिवार्य रूप से करानी चाहिए। फिर भी किसी कारणवश यह पकड़ में नहीं आने की स्थिति में इस प्रकार की जन्मजात खामी के साथ बच्चे जन्म लेते हैं, जिनके होंठ व तालू जन्म से ही कटे होते हैं। यदि कोई बच्चा ऐसा जन्म लेता भी है तो जन्म के एक साल के भीतर उसकी सर्जरी कराने पर उसके बेहतर परिणाम मिलते हैं।कटे होंठ होने से बालक के चेहरे की खूबसूरती बिगड़ती है। ऐसे होठ की सर्जरी बच्चे की 6 महीने की आयु तक कराने पर उत्तम परिणाम मिलता है। फटे तालू से बच्चे के बोलने में तकलीफ होती है, ऐसी सर्जरी जन्म के 1 वर्ष में कराने पर उत्तम परिणाम मिलते हैं। देरी करने पर बच्चे की आवाज का विकास हो जाता है उसके बाद यह सर्जरी कराने पर बोलने में खामी करने की संभावना रहती है। इच्छित परिणाम भी नहीं मिलते।

आनुवांशिकता बड़ी वजह

राजस्थान के बीकानेर के मूल के डॉ. शैलेष के. सोनी ने बताया कि माता या पिता में ऐसी खामी होने पर बच्चा ऐसी खामी के साथ जन्म लेता है। पहला बच्चा ऐसी खामी के साथ जन्म लेता है तो दूसरे बच्चे को भी ऐसी तकलीफ हो सकती है। आनुवांशिक कारण इसकी प्रमुख वजह है। गर्भस्थ शिशु की सोनोग्राफी से इसे जल्द पकड़ा जा सकता है।

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Fake payment in the name of public health in Banswara

18.07.2022
बांसवाड़ा जिले में चल रही मोबाइल मेडिकल वैन के कैंपों में बड़े स्तर पर लापरवाही और अनियमितता बरती जा रही है। जिसका फायदा उठाकर चिकित्सा विभाग और वैन संचालित करने वाली फर्म द्वारा फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। इसी फर्जीवाड़े में हर महीने लाखाें रुपए के बिल का भुगतान हाे रहा है। जबकि माैके पर चिकित्सा कैंप सभी सुविधाएं मरीजों काे नहीं मिल रही हैं। सुविधाएं ताे दूर यहां कैंपों में डॉक्टर तक उपलब्ध नहीं हाे रहे। जांच के लिए नर्सिंग स्टाफ और लैब टेक्नीशियन तक नहीं हैं। इसके बाद भी ब्लॉकस्तर पर बीसीएमओ द्वारा फर्जी वेरीफिकेशन कर वैन संचालित करने वाली फर्म काे हर महीने 15 से 16 लाख रुपए तक का भुगतान किया जा रहा है। वहीं दवाओं का 1 से 1.10 लाख रुपए तक का अतिरिक्त भुगतान हाे रहा है। इसमें विभाग स्तर पर भी कमीशन लेने की आशंका है।कारण यह है ऐसे कैंपों की जानकारी अधिक से अधिक लाेगाें काे मिले, लेकिन चिकित्सा विभाग द्वारा मोबाइल वैन काे लेकर काेई प्रेस रिपोर्ट जारी नहीं की गई। इधर, जब भास्कर टीम ने विभाग से हर ब्लाॅक से मासिक कैंप डिटेल मांगी ताे अफसरों ने इनकार कर दिया। इसके बावजूद भास्कर टीम ने परतापुर और अरथूना ब्लाॅक के कैंप डिटेल निकालकर दाैरा किया ताे कैंप के नाम पर औपचारिकता की जा रही है। जिले में 11 ब्लाॅक में हर महीने अलग-अलग जगहों पर कैंप लगाए जाते हैं। इन कैंपों में जहां कई कैंप में न ताे डॉक्टर हाेते हैं न ताे नर्सिंग स्टाफ, महज 8 से 10 प्रकार की दवाएं वैन में लाकर ओपीडी पर्ची मरीज की बनाकर उन्हें थमा दी जाती है।

अरथूना ब्लॉक में शिविर लगाया, लेकिन कहीं दवाएं ताे कहीं उपकरण कम

7 जुलाई, छाेटी बस्सी अरथूना : अरथूना ब्लाॅक के छाेटी बस्सी में मोबाइल मेडिकल वैन में न काेई डॉक्टर था न ही काेई नर्सिंग स्टाफ। यहां तक की मरीजों की जांच के लिए लैब टेक्नीशियन तक उपलब्ध नहीं थे। दोपहर 12 बजे तक कैंप में सिर्फ 6 मरीजों की ही ओपीडी पर्ची कटी थी। माैके पर ओपीडी रजिस्टर भी नहीं मिला। ड्राइवर सहित अन्य कार्मिक था, उन्होंने बताया कि वैन में सिर्फ 20 तरह की दवाएं ही उपलब्ध हैं। वहीं जांच के लिए पर्याप्त मशीन भी उपलब्ध नहीं थे।

9 जुलाई, हताेड़िया : यहां मोबाइल मेडिकल वैन कैंप स्थल पर निजी फर्म द्वारा लगाए स्टाफ में डॉ. मनाेहर मीणा, एक अन्य स्टाफ और एक ड्राइवर ही थे। माैके पर चिकित्सा विभाग की ओर से एएनएम की उपस्थिति जरूरी हाेती है, लेकिन विभाग का काेई कार्मिक नहीं मिला। यहां ब्लड प्रेशर जांच का मशीन ही खराब पड़ा मिला। मेडिकल स्टॉक रजिस्टर भी नहीं मिला। डॉक्टर से बात कि ताे बताया कि 70 की जगह 40 प्रकार की दवाएं ही उपलब्ध हैं।

11 जुलाई, हड़मतिया : हड़मतियां गांव में पहुंची मोबाइल मेडिकल वैन में एक कार्मिक राजेश खराड़ी मौजूद था। जिसके साथ में एक अन्य व्यक्ति जाे खुद काे डॉक्टर बता रहा था, लेकिन किसी भी स्टाफ के पास पद और डिग्री काे दिखाता काेई अाईडी कार्ड नहीं था। यहां पर भी छाेटी बस्सी की तरह जांच उपकरण ताे कम थे ही, दवाओं की संख्या भी बहुत कम थी। यहां पर 12 बजे तक एक भी मरीज नहीं पहुंचा था। इसके थोड़ी देर बाद मौजूद दोनों कार्मिक भी वहां से चले गए। वह केवल दो डब्बे में ही दवाएं लेकर आए थे।

शिविर लगाने और भुगतान के नियम : मेडिकल मोबाइल वैन की ओर से हर महीने एक ब्लॉक में 20 शिविर का शैड्यूल तैयार किया जाता है। एक दिन पहले उस गांव में शिविर की सूचना दी जाती है। इसकी एवज में सरकारी वैन होने पर 1 लाख 34 हजार 500 रुपए प्रति वाहन मासिक भुगतान का प्रावधान है। अगर गाड़ी कंपनी की है तो 1.49 लाख रुपए प्रति वाहन मासिक भुगतान किया जाता है। इसमें डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट व नर्सिंग कर्मी होना जरूरी है। वैन में 70 प्रकार की दवाएं हाेना जरूर हैं।

मई-21 से फरवरी-22 तक भुगतान

माह वाहन भुगतान दवाओं का भुगतान
मई 1038012 105212

जून 1583550 104904

जुलाई 1583550 104567

अगस्त 1450550 105450

सितंबर 1585050 जानकारी नहीं मिली

अक्टूबर 1585050 104273

नवंबर 1585050 105402

दिसंबर 1585050 108306

जनवरी 1585050 109286

फरवरी 1585050 109194

बांसवाड़ा में हमारी सभी वाहनों पर जीपीएस है और हम जाेधपुर से मॉनिटरिंग करते हैं। वहां हर कैंप के फाेटाे हमें मिलते हैं। ऐसे में काेई समस्या नहीं है। फिर भी ऐसी काेई समस्या बता रहे हैं ताे उसमें सुधार करेंगे। डॉक्टर और स्टाफ की मौजूदगी सुनिश्चित करेंगे। -सुरेंद्र भंडारी, मैनेजिंग ट्रस्टी, परमात्माचंद भंडारी चैरिटेबल ट्रस्ट

^कैंप प्लान पूरा ब्लाॅक लेवल से ही तैयार हाेता है। मॉनिटरिंग बीसीएमओ स्तर पर ही की जाती है। जिसकी रिपोर्ट हमें बाद में भेजते हैं। ऐसा है ताे कल ही जांच कराएंगे। – डॉ. एचएल ताबियार, सीएमएचओ

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Food licence group in Jodhpur

16.07.2022
लूनी में शनिवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया जाएगा। सीएमएचओ डॉ. बलवंत मंडा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा आयुक्त सुनील शर्मा के आदेश पर फूड लाइसेंस बनाने के लिए शिविर होगा। खाद्य सुरक्षा अधिकारी रजनीश शर्मा ने बताया कि लूनी व्यापार मंडल के आग्रह पर खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से कस्बे के मुख्य चौराहा पर शिविर आयोजित कर व्यापारियों को खाद्य व्यापार एवं कानून से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। जिन,व्यापारियों के फूड लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की अवधि खत्म होने की तिथि 6 माह के भीतर है, वे भी अपना नवीनीकरण करा सकते हैं। लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के लिए पहचान पत्र,फोटो,बिजली का बिल, किराया नामा,बड़ा व्यापार हो तो जीएसटी सर्टिफिकेट, दस्तावेज साथ लाना होगा।

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New medical college open in Ajmer

14.07.2022
राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2021-22 के अंतर्गत पब्लिक हैल्थ मेडिकल कॉलेज को मंजूरी दी है। इसके भवन निर्माण के लिए 58.42 करोड़ की स्वीकृति जारी हो गई है। जिला कलक्टर की ओर से जमीन आवंटन के साथ भवन बनेगा। फिलहाल मेडिकल कॉलेज में पब्लिक हैल्थ मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किया जाएगा।डॉ. वीर बहादुर सिंह, प्रधानाचार्य जेएलएन मेडिकल कॉलेज

यह होगा फायदा
कम्यूनिटी मेडिसिन में वैक्सीनेशन, पोलियो, कोरोना, पानी का सेनिटाइजेशन, आंत्र शोथ बीमारी सहित अन्य बीमारियों के नियंत्रण के लिए अतिरिक्त कोर्स वाले विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध होंगे। इससे आमजनता को फायदा मिल सकेगा।

प्रवेश का यह रहेगा प्रावधान
पब्लिक हैल्थ कॉलेज में 25 सीट को मंजूरी मिली है। इनमें आधी सीटें एमबीबीएस करने वाले चिकित्सकों को एवं आधी सीटों पर इन सर्विस चिकित्सकों को प्रवेश दिया जाएगा।

जमीन आवंटन का इंतजार
अजमेर में जल्द 5 एकड़ जमीन पर पब्लिक हैल्थ मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जाएगा। जमीन आवंटन के लिए जिला कलक्टर को प्रस्ताव दिया गया है। आवंटन के बाद भवन का निर्माण होगा। फिलहाल जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज परिसर में ही पब्लिक हैल्थ कॉलेज संचालित होगा। जमीन आवंटन व भवन निर्माण के बाद यह कॉलेज नए भवन में शिफ्ट किया जाएगा

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Doctor saved life a patient in Raipur ambedkar college

13.07.2022
आंबेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) में हार्टअटैक की स्थिति में पहुंचे एक 30 साल के युवक की इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी कर जान बचाई गई। हार्ट अटैक की स्थिति में लेजर द्वारा हार्ट की नली के थक्के को भाप बनाकर निकाला गया। हार्टअटैक के बीच लेजर के माध्यम से खून के थक्के को भाप बनाकर निकालना संभवत: देश की इस तरह की यह पहली प्रक्रिया है। मंगलवार सुबह करीब 9 युवक हार्टअटैक की स्थिति में एसीआई पहुंचा। उसकी तुरंत एंजियोग्राफी करने पर पता चला कि बहुत सारा खून का थक्का उसके हाथ की एक प्रमुख नली को पूरी तरह से बंद कर दिया है। आईवीयूएस यानी हार्ट के नस के अंदर की सोनोग्राफी करने पर पता चला कि यह रुकावट सिर्फ खून के थक्के के कारण हुआ है और इसमें नस का कोई ब्लाकेज नहीं है। ऐसे में युवक की कम उम्र को देखते हुए उसे खून के थक्के को लेजर द्वारा भाप बनाने का निर्णय लिया गया और यह प्रक्रिया मात्र आधे घंटे के समय में पूरी की गई। युवक की बंद नली पूरी तरह खुल गई

खून क्यों ब्लॉक हुआ, कारण का पता नहीं

काडियोलॉजिस्ट डॉ. स्मित श्रीवास्तव बताते हैं, युवक के शरीर में खून क्यों ब्लॉक हुआ। इसके कारण का पता नहीं चल पाया, क्योंकि युवक किसी प्रकार से नशे का सेवन नहीं करता। लेजर के माध्यम से भाप बनाकर खून का थक्का निकालने का केस दस से अधिक हो चुका है, लेकिन आर्टअटैक के बीच ऐसा करना देश में पहली बार है। युवकों में हार्टअटैक का प्रमुख कारण अनियमित दिनचर्चा है, जिसमें ध्यान देने की जरूरत है।

हार्ट को नहीं पहुंचा नुकसान

हार्ट अटैक के कारण ईसीजी में आया परिवर्तन भी एंजियोप्लास्टी के बाद ठीक हो गया, जो इस बात का साक्ष्य हैं कि यह प्रक्रिया सफल हुई और युवक हार्ट को और जीवन को नुकसान होने से बचा लिया गया। इस इमरजेंसी लेजर एनजियोप्लास्टी में प्रोफेसर डॉ. स्मित श्रीवास्तव के साथ डॉ. जोगेश, डॉ. आनंद, डॉ. गोपेश, डॉ. प्रतीक, नर्सेज बुद्धेश्वर और पूर्णिमा, टेक्नीशियन आईपी वर्मा, खेम सिंह, महेंद्र साहू, अश्वितिन साहू और जितेंद्र चलकर शामिल थे।

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