Death of Monkeypox infected in kerala

भारत में मंकीपॉक्स के अब तक 5 केस दर्ज हो चुके हैं। कर्नाटक की हेल्थ मिनिस्टर वीना जॉर्ज ने कंफर्म कर दिया है कि केरल में मंकीपॉक्स से एक मौत हो गई है। मृतक की उम्र 22 साल थी, वो UAE से अपने घर लौटा था। UAE से निकलने के एक दिन पहले ही उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।
मंकीपॉक्स को अब तक लोग सीरियस नहीं ले रहे हैं। देश में हुई पहली मौत के बाद इसको लेकर किस तरह सचेत होने की जरूरत है। मंकीपॉक्स से मौत की कितनी संभावना है ये सब जानेंगे डॉ. प्रभाकर तिवारी, इन्फॉर्मेशन एक्सपर्ट्स, CMHO भोपाल और डॉ. आर वी एस भल्ला, डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन, फोर्टिस अस्पताल से।

मंकीपॉक्स से बचाव के लिए हेल्थ मिनिस्ट्री की ये हैं 8 गाइडलाइन

सभी हेल्थ सेंटर्स ऐसे लोगों पर कड़ी नजर रखें, जिनके शरीर पर दाने दिखते हैं।
उन पर नजर रखें, जिन्होंने पिछले 21 दिनों में मंकीपॉक्स सस्पेक्टेड देशों की यात्रा की हो।
संदिग्ध केस को हेल्थकेयर फैसिलिटी में आइसोलेट किया जाएगा, जब तक मरीज के शरीर में दानों से पपड़ी नहीं उधड़ जाती।
मंकीपॉक्स संदिग्ध मरीजों के फ्लूइड या खून का सैंपल NIV पुणे में टेस्ट के लिए भेजा जाएगा।
अगर कोई पॉजिटिव केस पाया जाता है, तो फौरन कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू की जाएगी।
विदेश से आने वाले यात्रियों को ऐसे लोगों के संपर्क में आने से बचना चाहिए, जो स्किन की बीमारी से पीड़ित हों।
यात्रियों को चूहे, गिलहरी, बंदर सहित जिंदा और मरे हुए जंगली जानवरों के संपर्क में भी नहीं आना चाहिए।
अफ्रीकी जंगली जानवरों से बनाए गए प्रोडक्ट्स जैसे- क्रीम, लोशन और पाउडर का इस्तेमाल करने से बचें।
WHO पहले से कहता आ रहा है कि समलैंगिक पुरुषों में मंकीपॉक्स के संक्रमण की ज्यादा संभावना है। या जिस पुरुष का संबंध दूसरे पुरुष से रहता है उन्हें मंकीपॉक्स होने का खतरा ज्यादा है। इस बात को लेकर LGBTQ कम्यूनिटी में हलचल थी। अब WHO ने नई हेल्थ एडवाइजरी जारी की है जिसमें कहा है कि यह ध्यान रखना जरूरी है कि मंकीपॉक्स का खतरा केवल पुरुषों के साथ यौन संबंध यानी सेक्स करने वाले पुरुषों तक ही सीमित नहीं है। कोई भी व्यक्ति, जो किसी संक्रमित व्यक्ति के कॉन्टैक्ट में है, उसे मंकीपॉक्स होने का खतरा ज्यादा है।

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Diseases spreading in rainy season

डाॅक्टर बोले- जिन बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर, उन पर संक्रमण का ज्यादा असरइन दिनों मौसम और तापमान में लगातार बदलाव बच्चों की सेहत को बीमार कर रहा है। बरसात के इस मौमस में बच्चों में सर्दी, खांसी, बुखार की शिकायत बढ़ गई है। रोजाना बड़ी संख्या में अभिभावक बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। इन दिनों सरकारी अस्पताल के ओपीडी में जितने मरीज रहे हैं, उनमें करीब आधे मरीज बच्चे हैं। बरसात में ज्यादातर बच्चे सर्दी, खांसी, बुखार से पीड़ित हो रहे हैं। पेट खराब, जुकाम, खांसी, बुखार और गला खराब का मुख्य कारण वायरल संक्रमण है।सामान्यतः बैक्टीरिया और वायरस द्वारा शरीर में होने वाले संक्रमण पर प्रतिरक्षा पद्धति द्वारा नियंत्रण रखा जाता है। शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता अगर कम हो तो जीवाणु तेजी से पनपते हैं और बीमारियां फैलाते हैं।बारिश के इस मौसम में वायरल के साथ ही पेट संबंधी स्वास्थ्य समस्या भी लोगों को शिकार बना रही है। अस्पताल पहुंचने वाले बच्चों को उल्टी, दस्त, बुखार व सर्दी जुकाम की शिकायत ज्यादा सामने आ रही हैं। जबकि कुछ को सिर दर्द, पेट दर्द व वायरल बुखार की शिकायत भी हो रही है। जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र राणा ने बताया कि बारिश का दौर शुरू होने के बाद से बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी समस्या के मामले बढ़े हैं।ओपीडी में हर दिन मौसमी बीमारियों के शिकार बच्चे पहुंच रहे हैं। मौसम में उतार-चढ़ाव के साथ ही वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ जाता है। इस समय मौसम में कई तरह के बदलाव होते हैं। मिनटों में बदल जाता है। लिहाजा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में वायरस जल्दी चपेट में ले लेता है। बीते एक सप्ताह से लगातार मौसम बदल रहा है। कभी बारिश तो कभी धूप तो फिर उमस लोगों को बेचैन कर रही है।

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Banana prevents from heart diseases

दुनिया भर में सबसे अधिक खपत वाले फलों में से एक केला है। उनमें आवश्यक पोषक तत्व शामिल हैं जो किसी के स्वास्थ्य की रक्षा करने में मदद कर सकते हैं। उनमें से कुछ मैग्नीशियम, पोटेशियम, मैंगनीज, फाइबर, प्रोटीन और विटामिन जैसे बी 6 और सी हैं। केले का सेवन रक्तचाप को कम कर सकता है, कैंसर की संभावना को कम कर सकता है और दिल के दौरे के जोखिम को भी कम कर सकता है।
केला पोटेशियम का एक समृद्ध स्रोत है। दरअसल, एक केले में 455 मिलीग्राम पोटैशियम होता है। हर दिल की धड़कन गंभीर रूप से पोटेशियम पर निर्भर होती है। यह हृदय को प्रतिदिन 100,000 बार शरीर में रक्त पंप करने के लिए प्रेरित करता है। इसके अतिरिक्त, यह न्यूरॉन्स, मांसपेशियों के कामकाज की सुविधा प्रदान करता है, गुर्दे को रक्त निस्पंदन में मदद करता है और कोशिकाओं के अंदर और बाहर पोषक तत्वों के प्रवाह को नियंत्रित करता है जो शरीर के तरल स्तर को बनाए रखने में मदद करता है।अध्ययन क्या सुझाव देता है नए शोध के अनुसार, डॉक्टर अंततः पोटेशियम के स्तर की जाँच करके रोगियों को कुछ हृदय रोग को रोकने में सहायता करने में सक्षम हो सकते हैं।शोधकर्ताओं ने हाल ही में चूहों का उपयोग करके एक अध्ययन किया और कम आहार पोटेशियम सेवन और धमनी कैल्सीफिकेशन और महाधमनी कठोरता के विकास के बीच एक लिंक की खोज की।

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Sesonal disease increase in Raipur

19.07.2022
मौसम में लगातार बदलाव से मौसम बीमारी तेजी से पांव पसारते हैं। इस रैनी सीजन में सर्दी जुकाम, वायरल फीवर, डायरिया, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी बुखार लोगों को ज्यादा होते हैं। इन सब मौसमी बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। लोगों को मौसम बीमारियों से बचाव के लिए सतर्क रहने के साथ-साथ खान-पान और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने को कहा। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के मैदान अमले को मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए लगातार अभियान चलाने के निर्देश दिए गए है।डायरिया दूषित जल के सेवन से होने वाली बीमारी है जो जरा सी लापरवाही के चलते गंभीर रूप धारण कर सकती है। छोटे बच्चों में डायरिया की बीमारी बहुत खतरनाक हो सकती है, क्योंकि यह बच्चे को एक दिन में ही बहुत ज्यादा कमजोर कर देता है। डायरिया के प्रमुख लक्षणों में बार-बार मल त्याग करना, मल बहुत पतला होना, तीव्र दशाओं में रोगी के पेट के पूरे निचले भाग में दर्द और बेचैनी महसूस होना प्रमुख है।

ऐसे करें बचाव: डायरिया से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता तथा स्वस्थ जीवन-शैली जरूरी है। शरीर में पानी और नमक की कमी को दूर करना डायरिया का सबसे सही घरेलू उपचार है। इसके लिए ओआरएस व जिंक के सेवन की सलाह दी जाती है। तेल-मसालों वाले खाने से परहेज करना चाहिए।

मौसम बीमारियों को लेकर लगातार एडवाइजरी जारी की जा रही है। सामान्य सर्दी-जुकाम होने पर भी खुद घर पर इलाज न करें। डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराना चाहिए।

डॉ. सुभाष मिश्रा, प्रवक्ता, स्वास्थ्य विभाग छत्तीसगढ़

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Jabalpur’s youth in the grip of drug injections.

16.07.2022
शहर के हजारों युवा शराब तो पी ही रहे हैं। नया शौक नशीले इंजेक्शन का भी पाल रहे हैं। इस नशे का खतरनाक परिणाम सामने आने लगा है। विक्टोरिया अस्पताल के ओरल सबस्टीट्यूशन थैरेपी केंद्र में तमाम ऐसे नशेड़ी पहुचे रहे हैं, जिनमें एचआइवी एड्स के लक्षण दिख रहे हैं। पता चला कि एक ही इंजेक्शन से कई युवक एक साथ नसों में नशे की डोज इंजेक्ट करते हैं, तो वे गम्भीर बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। विक्टोरिया के केंद्र में इलाजरत और काउंसलिंग लेने वाले 21 वर्षीय छात्र ने बताया कि उसने अपने दोस्त को देखकर नस में नशे का इंजेक्शन लगा लिया था। कुछ दिन बाद वह इंजेक्शन से ड्रग लेने का आदी हो गया। एक व्यक्ति ने बताया कि वह लम्बे समय से इंजेक्शन के जरिए नशा ले रहा था। हालत यह हो गई कि हाथों, पैरों से मवाद निकलने लगा। इंजेक्शन लगाने की जगह नहीं बची, तो गांजा पीने लगा।शहर में कच्ची शराब खूब बनती है। इसलिए आसानी से उपलब्ध भी हो जाती है। लेकिन, इंजेक्शन का नशा करने वालों को यह जहर कुछ दवा दुकानों से मिलता है। ऐसे इंजेक्शन की कालाबाजारी होती है, जिनका इस्तेमाल नशे के रूप में होता है। पुलिस का कहना है कि नशे के इंजेक्शन बेचने वालों की पहचान मुश्किल से हो पाती है। फिर भी ऐसे लोगों पर कार्रवाई होती है। पुलिस का यह भी कहना है कि दुकानदारों को बिना डॉक्टर की पर्ची के विशेष फार्मूले वाले इंजेक्शन कतई नहीं देना चाहिए।
नशे की शुरुआत आमतौर पर शौकिया होती है। आस-पास के लोगों और दोस्तों की सोहबत भी मायने रखती है। अच्छी बातों का असर भले नहीं हो, लेकिन गलत बातें लोग पकड़ लेते हैं। परिजन को भी बच्चों पर नजर रखनी चाहिए। ध्यान देना चाहिए कि कहीं गलत दोस्तों के साथ में पड़कर नशे के गिरफ्त में तो नहीं जा रहे। इस मामले पुलिस या प्रशासन तो बाद में काम करता है। सबसे पहले परिजन को ही जागरूक होना होगा।
डॉ. सुमित पासी, मनोवैज्ञानिक

इंजेक्शन से नशा करने वालों की यहां काउंसिलिंग की जाती है। इंजेक्शन से नशा लेने के कारण कई गम्भीर संक्रमण का खतरा रहता है। काउंसिलिंग से नशे की लत से छुटकारा दिलाने की कोशिश की जाती है।

डॉ. रत्नेश कुररिया, जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, मनोरोग चिकित्सक

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