Director p.dayanand inspected govt.ayuveda medical hospital,Raipur

शासकीय आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हर गुरुवार को होने वाले सियान जतन क्लीनिक का आयुष विभाग के संचालक पी. दयानंद ने निरीक्षण किया। इस दौरान संचालक ने अस्पताल में संचालित हो रहे समस्त ओपीडी, अंतरंग वार्ड, पंचकर्म विभाग, फिजियोथैरेपी विभाग का निरीक्षण किया और उन्होंने जनसामान्य को आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का लाभ अधिकाधिक सुलभ करवाने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने आयुर्वेद फार्मेसी का भी निरीक्षण किया और औषधि निर्माण से संबंधित जानकारियां प्राप्त करते हुए निर्माण में आ रही बाधाओं से अवगत हुए। इस दौरान उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को दवा निर्माण में आ रही बाधाओं को तत्काल दूर करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान संस्थान के प्राचार्य डॉ. जीएस बघेल, अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रवीण जोशी, सहायक संचालक डॉ. विजय साहू, डॉ. निखिल रंजन नायक, रजिस्ट्रार डॉ. संजय शुक्ला, डॉ. मुकुंद अग्रवाल आदि उपस्थित थे।

सभी प्रकार की होती है निशुल्क जांच

संचालक आयुष पी. दयानंद ने सियान जतन कलीनिक एवं पंचकर्म विभाग में उपस्थित मरीजों से बातकर यहां मिल रहे उपचार के संबंध में जानकारी ली। प्रति सप्ताह लगने वाले इस विशेष क्लीनिक में बुजुर्गों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं चिकित्सा परामर्श प्रदान कर दवाइयों, आवश्यक पैथोलॉजी जांच, एक्स-रे, फिजियोथैरेपी, प्रकृति परीक्षण, आयुष काढ़ा एवं पंचकर्म आदि की नि:शुल्क सुविधा प्रदान की जाती है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Delhi aiims extented the director

24.06.2022
दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की ओर से गुरुवार को जारी एक कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, संस्थान के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया (Dr Randeep Guleria Tenure) का कार्यकाल तीन और माह के लिये बढ़ा दिया गया है। डॉ. गुलेरिया को 28 मार्च, 2017 को पांच साल की अवधि के लिए एम्स, नई दिल्ली के निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था। उनका कार्यकाल 24 मार्च को खत्म होना था पर उन्हें तीन महीने का सेवा विस्तार दिया गया था।नए ज्ञापन में कहा गया, ‘नई दिल्ली स्थित एम्स के अध्यक्ष को एम्स के निदेशक के रूप में उनके कार्यकाल को 25 जून 2022 से तीन महीने या नए निदेशक की नियुक्ति तक, जो भी पहले हो, आगे बढ़ाते हुए प्रसन्नता हो रही है। उनकी नियुक्ति के अन्य नियम और शर्तें संस्थान के नियमों के अनुसार रहेंगी।’ यहां प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) की एक बैठक 20 जून को हुई थी जिसमें एम्स के निदेशक पद के लिए नामों के एक व्यापक पैनल की मांग की गई थी।

कार्मिक मंत्रालय, लोक शिकायत एवं पेंशन कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा 20 जून को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजे गए एक कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है, ‘एसीसी में सक्षम प्राधिकारी ने एसीसी के विचार के लिए नामों का एक व्यापक पैनल भेजने के अनुरोध के साथ तत्काल प्रस्ताव वापस करने का निर्देश दिया है।’ इस साल मार्च में, एक खोज-सह-चयन समिति द्वारा चुने गए और बाद में एम्स के शीर्ष निर्णय लेने वाले संस्थान निकाय द्वारा अनुमोदित तीन डॉक्टरों के नाम अंतिम अनुमोदन के लिए एसीसी को भेजे गए थे।जिन तीन डॉक्टरों के नामों की सिफारिश निदेशक पद के लिये की गई थी, उनमें एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रमुख निखिल टंडन, एम्स ट्रॉमा सेंटर और हड्डी रोग विभाग के प्रमुख राजेश मल्होत्रा और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में प्रोफेसर प्रमोद गर्ग शामिल हैं।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Change in the posts of Director of Health and Drug Controller

राज्य सरकार चिकित्सा महकमे में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है । जन स्वास्थ्य निदेशक के पद से डॉ के. के. शर्मा के स्थान पर पर डॉ वी. के. माथुर को लगाया गया है। डॉ के. के. शर्मा अब ईएसआई के निदेशक होंगे। दूसरी ओर राज्य के औषधि नियंत्रक पद पर भी राजाराम शर्मा के स्थान पर अजय पाठक को ड्रग कंट्रोलर प्रथम के पद की जिम्मेदारी दी गई है।

डॉ. अमिता कश्यप का SIHFW Rajasthan के निदेशक पद पर कार्यकाल पूर्ण, लौटी मेडिकल कॉलेज

एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर की वरिष्ठ आचार्य डॉ. अमिता कश्यप को दो वर्ष के लिए State Institute of Health and Family Welfare, Jaipur का निदेशक नियुक्त किया गया था, जिसकी समयावधि पूर्ण हो जाने पर उन्हें मूल पद स्थापन स्थल के लिए कार्यमुक्त कर दिया गया है |

इस पद का चार्ज अतिरिक्त निदेशक (ग्रामीण स्वास्थ्य) डॉ. रवि प्रकाश शर्मा को दिया गया है |

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

राजस्थान : डॉ. शर्मा बने अतिरिक्त निदेशक (राजपत्रित)

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग राजस्थान के अहम पद, अतिरिक्त निदेशक (राजपत्रित) पर डॉ. के.के. शर्मा को पदस्थापित किया गया है | डॉ. शर्मा, इसके साथ संयुक्त निदेशक, जोन जयपुर के पद पर पहले से कार्यरत हैं |

डॉ. संजीव जैन, इस पद पर कार्यरत थे, जिनकी सेवानिवृति 31 मई 2019 को होनी थी |

⇓ Share this post on Whatsapp & Facebook  ⇓

प्रमोशन की आस में बिलखता सरकारी डॉक्टर

एक तरफ सरकार कम चिकित्सकों का रोना रोती है और दूसरी तरफ जो चिकित्सक सेवा में हैं उन्हें दर्द देने में कोई कसर नहीं छोड़ती है, चाहे वो मूलभूत संसाधनों की बात हो या चिकित्सा के अलावा अन्य कामों में उलझाए जाने या फिर विभागीय लफड़ों में अटका देने जैसे बहुत से फसाद ।
लेकिन अगर एक आज के मोटे दर्द की बात कि जाए तो वह है समयबद्ध पदोन्नति ।
पूर्व में चिकित्सक अपनी सेवा के शुरूआती पदों जैसे कि चिकित्सा अधिकारी या वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी या कनिष्ठ विशेषज्ञ के पदों पर ही पूरी जिन्दगी सेवा करते हुए सेवानिवृत हो जाते थे, वक़्त के साथ जागरूकता एवं मांग हुई कि चिकित्सकों को समयबद्ध पदोन्नति दी जाए, लेकिन ऊपर के पद कम थे इसलिए डीपीसी (The Departmental Promotion Committee) में कुछेक के प्रमोशन होते थे, हालात वही रहे तो मांग फिर तेज हुई और मिला केन्द्र की तर्ज पर डीएसीपी (Central Health Service (CHS) Officers in Central Government are governed by the Dynamic Assured Career Progression (DACP) Scheme), यानि समयबद्ध पदोन्नति, जैसे कि एक चिकित्सक को सेवा में आने के बाद प्रमोशन मिलेंगे 6-6 साल बाद, इसमें भी आगे कई विसंगतियां हैं लेकिन उनके लिए मांग जारी है ।
प्रमोशन को लेकर राजस्थान में बड़ी बड़ी हड़तालें और समझौते तक हो चुके हैं, बड़ा समझौता हुआ था कि हर साल को एक अप्रेल तक के जितने प्रमोशन बकाया होंगें वे एक अप्रेल को आगे की पे ग्रेड में प्रमोट कर दिए जायेंगे, लेकिन वही ढाक के तीन पात । आगे के प्रमोशन को तो छोड़ो, पहले प्रमोशन के ही लाले पड़ रहे हैं ।

2017 में सरकारी वादा हुआ कि आगे से हर साल कि एक अप्रेल को विगत साल के समस्त बकाया प्रमोशनों की लिस्ट जारी कर दी जायेगी, अच्छा लगा, जय जयकार हुई, मजा आया, लेकिन दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि यह मजा आभासी निकला, करीब 1500 डॉक्टरों के प्रमोशन 1 April 2018 को होने थे, एक अप्रेल को वो सुबह से नहा धोकर पूजा की थाली ले, पूरे दिन विभाग और अरिसदा की जय जयकार करते हुए इन्तजार करते रहे कि कब वो समझौते कि मोहर लगी प्रमोशन लिस्ट जारी हों और चिकित्सा अधिकारी हो जाएँ वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, दिन ढल गया रात हो गयी, अगला दिन चला गया, अगला महीना चला गया अप्रेल 2018 से अप्रेल 2019 आ गयी, वरिष्ठ बनने कि लालसा पाले वो बेचारा आम एमओ, त्रिविम में झाँक रहा है, मई 2019 आ गया है ।

एक साल एक्स्ट्रा गुजर गया, लेकिन कुछ नहीं, हालाँकि बीच में एक बार सीनियरटी लिस्ट जरूर डाली गयी थी जिसमें 2011 वाले को 2007 वाले सीनियर बता रखा था, आवेदन मांगे गए कि कोई कमी लगे तो बताओ, लोगों ने कमियां बताई, फिर लिस्ट जारी हुई, लगभग सभी कमियां वैसी कि वैसी थी, फिर से लिस्ट जारी हुई, ज्यादातर कमियां सेम कि सेम, लोगों ने दो बार अप्लिकेशन देदी कि मेरी गलती सुधार दो लेकिन कोई धणी-धोरी नहीं ।

1 अप्रेल 2018 तक करीब 1500 चिकित्सकों का प्रमोशन बकाया था, अप्रेल 2019 में फिर बहुत से बढ़ गए ।

सुना है कि अभी इन 1500 चिकित्सकों का डेटा कार्मिक विभाग भेजा गया है ताकि DACP कि कारवाई हो, वो डेटा ? हाँ वही जो एकदम फर्जी था । लोगों ने दो दो बार अपनी ACR जमा करवा दी लेकिन जवाब मिलता है कि आपकी ACR/APR (Annual Progress Report) नहीं आई । किसी कि कहते हैं IPR (Immovable Property Return – Yearly) नहीं आई, जबकि वो जमा करवा चुका, कार्मिक विभाग को डेटा भेजने से पहले एक बार संशोधन का मौका तो दिया जाता ना कि किसका क्या आधा अधुरा है । निदेशालय में कोई ऐसी जगह नहीं है जहाँ से यह पता किया जा सके कि किस कर्मचारी का किस वर्ष का ACR & IPR जमा है और किस वर्ष का नहीं, जिलों से ACR भेजे जाते रहे हैं लेकिन यहाँ नहीं पहुँचते, ना ही कोई पावती दी जाती है, ना ही डेटा ऑनलाइन किया गया, किसी को कोई लेना देना नहीं है, सरकारी डॉक्टर बस बिलखता रहे, ना विभाग, ना विभाग के आला अधिकारी । विभागीय लक्ष्यों और कार्यक्रमों के आंकड़े इन्हें फटाफट और सही चाहिए, सब उपस्थित, युनिफोर्म और सफाई जोरदार चाहिए, कहते हैं नाकारा सामान हटाओ, अजी असली नाकारा सामान तो स्वास्थ्य भवन का बाबूराज है, जिनके कारण से एक अप्रेल को होने वाला प्रमोशन अगली एक अप्रेल को पार कर गया है, जिन 1500 चिकित्सकों का डेटा कार्मिक विभाग भेजा गया है उनमें से करीब एक हजार के कागजों में कुछ ना कुछ दिक्कत है और उनके प्रमोशन “डेफर” किये जा रहे हैं, यानी ठन्डे बस्ते में, और यह बस्ता इतना ठंडा है कि काफी गरम करने के बाद ही फ़ाइल यहाँ से खिसकती है, और बड़ी बात यह कि असल में ACR कि जरुरत ही DPC के लिए होती है, DACP तो बिना किसी कागज़ के नियत समय पर कर दी जाती है ।

लेकिन सुने कौन ???
किसे सामने गिडगिडायें ?
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारीयों के सामने ? मीडिया के सामने ? कोर्ट के सामने ? संघ के सामने ? या फिर स्वास्थ्य विभाग के बाबूराज के आगे दण्डवत हो जावें, यह मान लें कि चिकित्सा विभाग का बाबु ही भगवान है और वो जितनी खैरात विभाग के अपने जैसे तथाकथित अधिकारीयों को बाँट दे उसे लेकर जय जयकार करते रहें ? क्या करें ?

आप ही बतावें ।

⇓ Share this post on Whatsapp & Facebook  ⇓

8700 ग्रेड पे की कैपिंग वाले हड़ताली समझौते का पोस्टमार्टम

सरकार और चिकित्सकों के बीच हुए समझौते की हकीकत

वर्ष 2011 दिसम्बर में हुई एतिहासिक हड़ताल के बाद दवाब में आकर कांग्रेस सरकार ने कुछ समझौते किये जिन्हें लेकर चिकित्सक करीब सात वर्ष तक घूमते रहे लेकिन उनका पूर्ण किर्यांवन किया नहीं गया | इसी क्रम में फिर से चिकित्सक आक्रोशित हुए और वर्ष 2017 की अगस्त क्रांति और दिसम्बर की बड़ी हड़ताल के बाद तत्कालीन भाजपा सरकार ने फिर से समझौतों का पुलिंदा बाँध दिया, जिसके किर्यांवन के लिए चिकित्सक वापस से उसी हालात में हैं |

इसी बीच निदेशक जनस्वास्थ्य के एक आदेश (नीचे संलग्न है) से चिकित्सकों में शंका है कि 8700 ग्रेड पे की कैपिंग तो हट गयी थी तो यह लेटर कहाँ से आया ? यह तो समझौते की ध्वजियाँ उड़ रही हैं ? आप खुद समझौते और निदेशक के आदेश को दुबारा पढ़ें !

दिसम्बर 2017 समझौते के प्रथम बिंदु में ही डीएसीपी से संबंधित मुद्दे थे, जिसमें कहा गया था कि 18 वर्ष वाले तीसरे प्रमोशन (6-6-6) में कुल चिकित्सकों के 18% के बजाय सभी पात्र चिकित्सकों को डीएसीपी का लाभ दिलवाया* जायेगा |

* यहीं पेच है, समझौते में सरकार चालाकी बरत गयी, 18% की कैपिंग नहीं हटाई, बल्कि यह लिख दिया गया की शेष को भी वित्त विभाग से शिथिलन दिलवा देंगे |
* अपना कैडर करीब दस हजार चिकित्सकों का है यानि 18% के हिसाब से 1800 डॉक्टर ही 8700 ग्रेड में घुसे रह सकते हैं, अभी करीब 900 डॉक्टर इसमें घुसे हुए हैं, कुछ नए घुसेंगे और कुछ रिटायर होते रहेंगे, अगर देखा जाए तो अगले दस साल तो कोई दिक्कत नहीं आएगी लेकिन वर्ष 2005 के बाद भर्ती हुए चिकित्सक जब तीसरे प्रमोशन की उम्र तक पहुंचेंगे, उस वक़्त 8700 ग्रेड में 1800 लोग हो चुके होंगें और यह फुल हो चुका होगा, यानि बड़ी दिक्कत तभी आएगी (करीब वर्ष 2025 ) |

* मुद्दा 8700 की कैपिंग को हटवाने का था लेकिन समझौता कैपिंग ना हटवाकर एक्स्ट्रा लोगों को वित्त विभाग से परमिशन दिलवाकर उन्हें डीएसीपी दिलवाने का हुआ तो अब वित्त विभाग परमिशन दे, ना दे, किसको दे, क्या पता | बाकि राड़ 2025 में होगी जब 1801वां चिकित्सक 2025 में जाकर कहेगा की हमारा दिसम्बर 2017 में समझौता हुआ था, उसकी अनुपालना में मुझे वित्त विभाग से शिथिलता दिलवाकर 8700 ग्रेड में लो, तो राम जाने लेंगे की नहीं !

एसीएस वीनू गुप्ता, एमडी नवीन जैन का चिकित्सा विभाग से तबादला, लौटे समित शर्मा

श्री रोहित कुमार सिंह, आईएएस

DOB – 16/03/1964
RR:89

डॉ. समित शर्मा, आईएएस

DOB – 21/02/1972
RR:04

श्री हेमन्त कुमार गेरा, आईएएस

DOB – 29/08/1970
RR:97

श्री सुरेश चंद गुप्ता, आईएएस

DOB – 05/07/1962
(Promote RAS )

डीएसीपी के इंतजार में पथरा रही आँखें

राजस्थान के युवा सरकारी डॉक्टरों में सबसे ज्यादा की जोइनिंग दिसम्बर 2011 के आस पास की है, इन डॉक्टरों का पहला प्रोमोशन छह साल बाद होना होता है, यानि दिसंबर 2017 में | अरिसदा के लम्बे संघर्ष के बाद समझौता हुआ की हर वर्ष की 1 अप्रेल को उस दिन तक के बकाया सभी प्रोमोशन की डीएसीपी लिस्ट जारी कर दी जाएगी, इस समझौता से हर चेहरा खिला हुआ था, अप्रेल बीते जमाना हो चुका, पर अभी तक लिस्ट की कोई सुचना नहीं हैं, बीच में कई बार सीनियरटी लिस्ट जरूर डाली गयी हैं, लेकिन उनमें भी बेजा खामियां हैं | अप्रेल-मई में तो इन लाभार्थियों ने भाग दौड़ भी मचाई, वाट्सएप पर भी चर्चाएँ चली पर अब आस धूमिल हो चुकी हैं, लगता था कि नयी सरकार ही सुध लेगी, पर वे भी बेवफा ही निकले | दबी जुबान कुछ डॉक्टर समझौते के सामर्थ्य पर शक कर रहे हैं तो कुछ निदेशालय के बाबूराज को कोस रहे हैं |

RAS as director in medical colleges

Director and additional directors in medical colleges & attached hospitals will be from Rajasthan administrative services (RAS).