बरसात शुरू होते ही डेंगू बुखार का प्रकोप बढ़ जाता है। बारिश का पानी लंबे समय एक ही जगह जमा रहने पर मादा एनाफिलिज मच्छर पनपता है, जिसके काटने से डेंगू बुखार होता है। इसको देखते हुए डेंगू से बचाव काे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है। सिविल सर्जन डाॅ. यूसी शर्मा ने जिले के सभी पीएचसी प्रभारियाें काे डेंगू-चिकनगुनिया से बचाव काे लेकर अलर्ट मोड में रहने के साथ ही निचले इलाकों में नियमित फॉगिंग कराने का निर्देश दिया है।वहीं, फाइलेरिया कर्मियों की ओर से सभी चिह्नित स्थलों पर नियमित रूप से एंटी लार्वा स्प्रे का छिड़काव कराने काे कहा है। सिविल सर्जन ने कहा, यदि किसी व्यक्ति को पूर्व में डेंगू हो चुका है तो उन्हें अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। बीमारी के लक्षण होने पर तुरंत अस्पताल में जाकर चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। ़डेंगू बुखार आमतौर पर संक्रमित मच्छर द्वारा काटे जाने के चार से 10 दिन बाद शुरू होता है। इधर, जिला मलेरिया अधिकारी डाॅ. सतीश कुमार ने डेंगू से बचाव के लिए सतर्क रहने की अपील की।
डेंगू बुखार के प्रमुख लक्षण
तेज बुखार, बदन, सिर व जाेड़ाें में दर्द, आंखाें के पीछे दर्द हाेना, त्वचा पर लाल धब्बे या चकत्ते का निशान हाेना, नाक-मसूढ़ाें से या उल्टी के साथ खून निकलना, शौच काला हाेना आदि।
बचाव को बरतें ये सतर्कता
दिन में भी साेते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। {मच्छर भगाने वाली दवा-क्रीम का प्रयाेग दिन में भी करें। {पूरे शरीर काे ढंकने वाले कपड़े पहनें। घर व आसपास काे साफ व हवादार बनाकर रखें। {टूटे-फूटे बर्तन, कूलर-फ्रिज के पानी की निकासी ट्रे, पानी टंकी व घर के अंदर व अगल-बगल में पानी नहीं जमा होने दें। {घर के आसपास साफ-सफाई रखें। जमा पानी व गंदे स्थलों पर कीटनाशी दवाओं का छिड़काव करें। {गमला, फूलदान आदि का पानी हर दूसरे दिन बदलें। {जमे हुए पानी में मिट्टी का तेल डालें।
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