Dr. YS Sachan death case

10.08.2022
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पूर्व उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी (डिप्टी सीएमओ) डॉ वाईएस सचान की जेल में संदिग्ध परिस्थिति में मौत के मामले में विशेष अदालत के सात जुलाई, 2022 के आदेश पर रोक लगाते हुए पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कर्मवीर सिंह, तत्कालीन अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) विजय कुमार गुप्ता और अन्य को बड़ी राहत दी है।उच्‍च न्‍यायालय ने डॉ. सचान की जेल में मौत के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत द्वारा बतौर अभियुक्त तलब किए गए तत्कालीन डीजीपी कर्मवीर सिंह, तत्कालीन अपर डीजीपी विजय कुमार गुप्ता एवं तत्कालीन जेलर भीमसेन मुकुंद के खिलाफ गत सात जुलाई को जारी तलबी आदेश पर रोक लगा दी है।अदालत ने डॉ. सचान की पत्नी मालती सचान को नोटिस जारी कर उनको इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट, सीबीआई के सात जुलाई के आदेश पर अंतरिम रोक केवल याचिकाकर्ताओं के लिए रहेगी।न्यायमूर्ति ए के श्रीवास्तव की पीठ ने उपरोक्त तीनों पूर्व अधिकारियों की ओर से अलग-अलग दाखिल याचिकाओं पर यह आदेश दिया। आदेश सोमवार को जारी किया गया। पीठ ने अपने आदेश में सीबीआई के अधिवक्ता अनुराग कुमार सिंह की दलील को आधार बनाया, जिसमें उन्होंने कहा था सीबीआई ने मामले की बारीकी से जांच की थी और डॉ. सचान की मृत्यु को आत्महत्या पाए जाने के बाद ही क्लोजर रिपोर्ट लगाई गई थी।याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि मामले में सीबीआई जांच कर चुकी थी और डॉ. सचान की मृत्यु को आत्महत्या पाते हुए क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल की गई थी। यह भी दलील दी गई कि सरकारी अधिकारी होने के कारण याचिकाकर्ताओं को तलब किए जाने से पूर्व शासन से संस्तुति प्राप्त करना अनिवार्य था।उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सचान कथित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले में मुख्य आरोपी थे। यह घोटाला स्वास्थ्य केंद्रों को उन्नत करने के मद में जारी करोड़ों रुपये का गबन से संबंधित है। डॉ. सचान एनआरएचएम घोटाला मामले में न्यायिक हिरासत में थे और 22 जून 2011 को लखनऊ जेल में संदिग्ध परिस्थिति में उनकी मौत हो गई थी।यहां की एक अदालत ने पूर्व डीजीपी सिंह, तत्कालीन एडीजी गुप्ता, तत्कालीन लखनऊ जेल के जेलर भीम सेन मुकुंद को एक दशक पहले जेल में डॉ.सचान को मारने की साजिश रचने के आरोप में मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया था।उनकी मौत के सिलसिले में 26 जून, 2011 को अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ थाना गोसाईगंज में प्राथमिकी दर्ज हुई थी. इसके बाद डॉ सचान की मौत की न्यायिक जांच शुरू हुई। 11 जुलाई 2011 को न्यायिक जांच रिपोर्ट में डॉ सचान की मौत को हत्या करार दिया गया। 14 जुलाई, 2011 को उच्‍च न्‍यायालय ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।27 सितंबर, 2012 को सीबीआई ने जांच के बाद डॉ सचान की मौत को आत्महत्या करार देते हुए अंतिम रिपोर्ट दाखिल किया।डॉ.सचान की पत्नी मालती सचान ने सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट को चुनौती दी. सीबीआई की विशेष अदालत ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए सीबीआई को अतिरिक्त कार्रवाई का आदेश दिया. नौ अगस्त, 2017 को सीबीआई ने फिर से अंतिम रिपोर्ट दाखिल किया। 19 नवंबर, 2019 को सीबीआई अदालत ने इसे भी खारिज कर दिया और मालती सचान की अर्जी को परिवाद के रूप में दर्ज किया।मालती सचान ने अदालत में न्यायिक जांच रिपोर्ट के अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल एक्सपर्ट ओपिनियन और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले डॉक्टरों के बयान के साथ ही सीबीआई द्वारा दर्ज बयानों का भी हवाला दिया। सात जुलाई 2022 को सीबीआई अदालत ने डॉ सचान की मृत्यु को हत्या का मामला मानते हुए, तत्कालीन डीजीपी सिंह, तत्कालीन एडीजीपी गुप्ता एवं लखनऊ जोन के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) सुबेश कुमार सिंह समेत लखनऊ जेल के तत्कालीन जेलर बीएस मुकुंद, डिप्टी जेलर सुनील कुमार सिंह, प्रधान बंदीरक्षक बाबू राम दूबे और बंदीरक्षक फहींद्र सिंह को हाजिर होने का आदेश दिया था।

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Death due to corona in chandigarh

चंडीगढ़ में कोरोना एक बार फिर से जानलेवा बनता जा रहा है। पिछले 24 घंटे में शहर में एक कोरोना प्रभावित व्यक्ति की मौत हो गई। पिछले 8 दिनों में यह 5वीं मौत है। इससे पहले गत 26 जुलाई से लेकर 29 जुलाई तक 4 जानें गई थीं।बीते 24 घंटे में 101 नए संक्रमित भी मिले हैं। इसके साथ ही शहर में कोरोना के एक्टिव केस बढ़ कर 936 हो गए हैं। एक सप्ताह में पॉजिटिविटी रेट 9.63 प्रतिशत हुआ है। एक सप्ताह में रोजाना मिलने वाले केसों का औसत 134 हो गया है।PGI के वेंटिलेटर पर 4 और GMCH-32 के वेंटिलेटर पर 2 मरीज भर्ती हैं। ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड पर PGI और GMCH-32 में 17-17 तथा GMSH-16 में 10 मरीज भर्ती हैं। नए मिले 101 केसों में सबसे ज्यादा 17 मरीज मनीमाजरा में आए हैं।

बच्चों का कोरोना वैक्सीनेशन जारी

शहर में 12 से 14 वर्ष के 34,904 बच्चों को कोरोना की पहली और 21,830 बच्चों को कोर्बेवैक्स की दोनों डोज लग चुकी हैं। ऐसे 45 हजार बच्चों को कवर करने का प्रशासन का लक्ष्य है। 15 से 18 वर्ष के 74,263 बच्चों को को-वैक्सीन की पहली और 51,742 बच्चों को दोनों डोज लग चुकी हैं। ऐसे 72 हजार बच्चों को कवर करने का लक्ष्य था।शहर में वयस्कों को पहले ही कोरोना की दोनों डोज से कवर किया जा चुका है। कुल 9,12,397 वयस्क कोरोना की दोनों डोज लगवा चुके हैं। 30 सितंबर तक शहर में कोरोना की बूस्टर डोज फ्री है। अभी तक 75,331 वयस्क बूस्टर डोज लगा चुके हैं। 2 अगस्त को 1641 लोगों ने बूस्टर डोज लगवाई।

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Fire in jabalpur hospital

मध्य प्रदेश के जबलपुर में सोमवार दोपहर 2:45 बजे एक निजी अस्पताल में आग लग गई। हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई। इनमें 3 स्टाफ भी हैं। 8 की हालत गंभीर है।
प्रशासन ने बताया कि तीन मंजिला न्यू लाइफ मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के एंट्रेंस पर जनरेटर में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी। हादसे के वक्त अस्पताल में 35 लोग थे, इसलिए आशंका जताई जा रही थी कि मृतकों की संख्या बढ़ भी सकती है। अस्पताल प्रबंधन का कोई बयान अभी तक नहीं आया है। हादसे की जांच जबलपुर डिवीजनल कमिश्नर बी चंद्रशेखर की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय समिति करेगी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर दुख जताया है। मध्य प्रदेश के CM शिवराज सिंह ने मृतकों के परिजन को 5-5 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है।

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Death of Monkeypox infected in kerala

भारत में मंकीपॉक्स के अब तक 5 केस दर्ज हो चुके हैं। कर्नाटक की हेल्थ मिनिस्टर वीना जॉर्ज ने कंफर्म कर दिया है कि केरल में मंकीपॉक्स से एक मौत हो गई है। मृतक की उम्र 22 साल थी, वो UAE से अपने घर लौटा था। UAE से निकलने के एक दिन पहले ही उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।
मंकीपॉक्स को अब तक लोग सीरियस नहीं ले रहे हैं। देश में हुई पहली मौत के बाद इसको लेकर किस तरह सचेत होने की जरूरत है। मंकीपॉक्स से मौत की कितनी संभावना है ये सब जानेंगे डॉ. प्रभाकर तिवारी, इन्फॉर्मेशन एक्सपर्ट्स, CMHO भोपाल और डॉ. आर वी एस भल्ला, डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन, फोर्टिस अस्पताल से।

मंकीपॉक्स से बचाव के लिए हेल्थ मिनिस्ट्री की ये हैं 8 गाइडलाइन

सभी हेल्थ सेंटर्स ऐसे लोगों पर कड़ी नजर रखें, जिनके शरीर पर दाने दिखते हैं।
उन पर नजर रखें, जिन्होंने पिछले 21 दिनों में मंकीपॉक्स सस्पेक्टेड देशों की यात्रा की हो।
संदिग्ध केस को हेल्थकेयर फैसिलिटी में आइसोलेट किया जाएगा, जब तक मरीज के शरीर में दानों से पपड़ी नहीं उधड़ जाती।
मंकीपॉक्स संदिग्ध मरीजों के फ्लूइड या खून का सैंपल NIV पुणे में टेस्ट के लिए भेजा जाएगा।
अगर कोई पॉजिटिव केस पाया जाता है, तो फौरन कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू की जाएगी।
विदेश से आने वाले यात्रियों को ऐसे लोगों के संपर्क में आने से बचना चाहिए, जो स्किन की बीमारी से पीड़ित हों।
यात्रियों को चूहे, गिलहरी, बंदर सहित जिंदा और मरे हुए जंगली जानवरों के संपर्क में भी नहीं आना चाहिए।
अफ्रीकी जंगली जानवरों से बनाए गए प्रोडक्ट्स जैसे- क्रीम, लोशन और पाउडर का इस्तेमाल करने से बचें।
WHO पहले से कहता आ रहा है कि समलैंगिक पुरुषों में मंकीपॉक्स के संक्रमण की ज्यादा संभावना है। या जिस पुरुष का संबंध दूसरे पुरुष से रहता है उन्हें मंकीपॉक्स होने का खतरा ज्यादा है। इस बात को लेकर LGBTQ कम्यूनिटी में हलचल थी। अब WHO ने नई हेल्थ एडवाइजरी जारी की है जिसमें कहा है कि यह ध्यान रखना जरूरी है कि मंकीपॉक्स का खतरा केवल पुरुषों के साथ यौन संबंध यानी सेक्स करने वाले पुरुषों तक ही सीमित नहीं है। कोई भी व्यक्ति, जो किसी संक्रमित व्यक्ति के कॉन्टैक्ट में है, उसे मंकीपॉक्स होने का खतरा ज्यादा है।

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Corona in mp

मध्यप्रदेश में बीते 2 दिन में कोरोना से 4 मौतें रिपोर्ट हुई हैं। वहीं इस महीने अबतक प्रदेश में कुल 14 मौतें दर्ज हुई हैं। जो कि जून मुकाबले 5 ज्यादा है। संक्रमण की स्पीड भी जून के मुकाबले डबल हो चुकी है। जून में 1878 संक्रमित मिले थे। जुलाई में अबतक 5380 मरीज मिल चुके हैं। इनमें आधे तो इंदौर से हैं, भोपाल की स्थिति भी चिंताजनक है।थर्ड वेव गुजरने के बाद मार्च से मई तक तीन महीनों में एक-एक मरीज की मौत हुई, लेकिन जून में मौत के मामले बढ़ने लगे। सिर्फ तीन शहरों जबलपुर, इंदौर और भोपाल में जून के महीने में 9 मरीजों की मौत हो गई। जून से संक्रमण ने रफ्तार पकड़ी और कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या भी बढ़ गई। इस महीने में ही प्रदेश में अबतक 10 मरीज दम तोड़ चुके हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग मरीजों की मौत को एक से दो हफ्ते बाद दर्ज कर रहा है।

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Death of innocent

झोलाछाप महिला डॉक्टर ने दो साल के मासूम को एक के बाद एक दो इंजेक्शन लगाए। इससे पांच मिनट में मासूम की मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद भी आरोपी महिला उसकी चाची को गुमराह करती रही। वह बच्चे को लेकर दो निजी अस्पताल में गई, जहां डॉक्टर्स ने बच्चे को मृत घोषित किया। खास तो यह रहा कि आरोपी महिला और उसके रिश्तेदारों ने रात 10 बजे कार से शव को सुनसान इलाके में फेंक दिया। वहीं साथ में मौजूद उसकी चाची, जो महिला का विरोध कर रही थी, को लात-घूसों से पीटा। सूचना पर पुलिस रात को ही मौके पर पहुंची। पुलिस ने पीड़ित परिवार से रिपोर्ट भी ली। प्रत्यक्षदशिर्यों ने बताया कि दोनों ही पक्षों के बीच रात को मौताणे को लेकर भांजगड़ा हुआ। यहां पर बच्चे की जिंदगी की कीमत परिवार ने 10 लाख रुपए लगाई। बाद में मामला 5 लाख रुपए तक पहुंचा, लेकिन बात नहीं बनी तो पीड़ित परिवार शुक्रवार दोपहर थाने में FIR कटाने के लिए बैठा रहा। मामला कुशलगढ़ थाने के थांदला रोड का है।

बुखार देखने के बाद दिए दो इंजेक्शन

पुलिस ने बताया कि परनाला निवासी श्रद्धा लबाना, जो कि कथित झोलाछाप है, का थांदला रोड पर मकान और क्लीनिक है, जहां गुरुवार शाम को जाड़ी निवासी रेखा पत्नी नरेश कटारा उसके भतीजे आयुष (2) पुत्र नरबेश कटारा को लेकर आई। बुखार देख आरोपी महिला ने उसे दो इंजेक्शन दिए। उसी समय बच्चे के मुंह से झाग निकलने लगे। रेखा का आरोप है कि बच्चा मरने के बाद भी महिला ने उसे ड्रिप चढ़ाई।महज दो मिनट बाद ड्रिप अपने आप बंद हो गई। इसके बाद आरोपी महिला बच्चे को गोद में लेकर कुशलगढ़ के भारती हॉस्पिटल गई, जहां डॉक्टर ने बच्चे को मृत बताया। महिला फिर दूसरी बार बच्चे और रेखा को साथ लेकर बांसवाड़ा के केएल दोसी हॉस्पिटल आई। वहां भी डॉक्टर ने बच्चे को मरा हुआ बताया। रात को महिला रेखा और मरे हुए शव को लेकर कुशलगढ़ की ओर रवाना हुई। बीच रास्ते में आरोपी महिला के उसके करीब 60 रिश्तेदार बीच रास्ते में जमा हो गए। आरोप है कि परनाला गांव की सड़क पर आरोपी महिला ने बच्चे का शव कार से फेंक दिया। वहीं विरोध कर रही रेखा के साथ मारपीट की। सूचना पर पुलिस आई और शव को मोर्चरी में शिफ्ट कराया। वहीं रेखा को लेकर थाने गई।

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Corona in indore

कोरोना पॉजिटिव पेशेंट्स की संख्या में उतार-चढ़ाव जारी है। बुधवार को जहां 97 पॉजिटिव आए थे वहीं गुरुवार को 121 पॉजिटिव पाए गए जबकि एक महिला की मौत भी हुई है। 35 वर्षीय यह महिला एचआईवी पॉजिटिव थी तथा एमआरटीबी अस्पताल में एडमिट थी। दो दिन पहले भी एक महिला की मौत हुई थी। वर्तमान में एक्टिव केसों की संख्या बढ़कर 712 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि जिन लोगों ने बूस्टर डोज नहीं लगाया है, वे जरूर लगवाएं।सीएमएचओ डॉ. बीएस सेत्या ने बताया कि कुल 940 सैंपल टेस्ट किए गए थे। इनमें से 808 नेगेटिव तथा 121 पॉजिटिव पाए गए। इस तरह अब संक्रमण दर 12.87% प्रतिशत हो गई है। इन दिनों पॉजिटिव पेशेंट्स उस स्थिति में मिल रहे हैं जब किसी को सामान्य सर्दी-खांसी हो और कोरोना टेस्ट कराया हो। हालांकि अधिकांश पेशेंट्स सामान्य होकर होम आइसोलेट हैं। दो दिन पहले 27 वर्षीय एक महिला की सरकारी एमआरटीबी अस्पताल में मौत हुई थी। उसे किडनी की बीमारी तो थी ही साथ ही उसने वैक्सीन भी नहीं लगाई थी। सीएमएचओ ने बताया कि अभी बूस्टर डोज को लेकर लगातार कैंप लगाए जा रहे हैं। जिन लोगों के दूसरे डोज की अवधि खत्म होकर छह महीने हो गए हैं वे बूस्टर डोज जरूर लगवाएं।

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Death of newborn due to lightning

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला अस्पताल में बुधवार देर रात लाइट जाने से एक नवजात की मौत हो गई। जबकि दो बच्चों को दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया है। घटना सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट (SNCU) में हुई। लाइट जाने के चलते ऑक्सीजन सप्लाई रुक गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। वहीं अफसरों ने इससे पल्ला झाड़ लिया है। उनका कहना है कि जिस बच्चे की मौत हुई वह पहले से ही कमजोर था। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।जानकारी के मुताबिक, कोरबा स्थित इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय के SNCU में देर रात करीब 12 बजे शार्ट सर्किट हुआ। इसके बाद SNCU की लाइट बंद हो गई। बताया जा रहा है कि वोल्टेज फ्लैक्चुएशन के चलते घंटों ऑक्सीजन की सप्लाई भी बाधित रही। बच्चों की हालत बिगड़ने लगी तो उनके परिजनों को बुलाया गया। इस आपाधापी में दीपका निवासी अमित कुमार के बच्चे की मौत हो गई, जबकि एक बच्चे को बिलासपुर और दूसरे को कोरबा के ही प्राइवेट अस्पताल में रेफर किया गया है।

परिजन बोले-नर्स ने कहा मशीन लोड नहीं ले रही

बच्चे के पिता अमित कुमार ने बताया कि उनका पहला बच्चा था। यहीं उनकी पत्नी की डिलीवरी हुई थी। रात करीब 12 बजे के बाद एक नर्स आई की बच्चे की हालत गंभीर है। फिर रात 1 बजे कॉल आया कि बच्चे को यहां से लेकर चले जाइए। जब वहां गए तो देखा कि लाइट आ-जा रही थी। नर्स बोली की बच्चे को ले जाओ, उसे ऑक्सीजन नहीं मिल रहा है। मशीन लोड नहीं ले रही है। फिर आधा घंटे बाद कहा कि बच्चे की मौत हो गई है। फिर शव ले जाने का दबाव बनाने लगे। कहा-मॉर्चुरी में रखवा दो।

लापरवाही नहीं हुई, पर जांच करा लेंगे

वहीं दूसरी ओर अस्पताल के डीन अविनाश मेश्राम का कहना है कि शार्ट सर्किट के कारण SNCU की बिजली जरूर गई थी, लेकिन कुछ समय में ही व्यवस्था बहाल कर ली गई। उन्होंने बताया कि एक बच्चे की मौत हुई है, लेकिन वह पहले से ही कमजोर था इस कारण उसकी जान चली गई। इसमें कोई लापरवाही की बात नहीं है। हालांकि वह मामले की जांच की बात जरूर कर रहे हैं। अस्पताल में लाइट जाने पर जो जनरेटर लगाया गया है, वह काफी समय से खराब पड़ा है।

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Dr.Zaheer-ul-islam is no more

28.07.2022
डॉ. जहीर का शुमार देश-दुनिया के उन डॉक्टरों में है, जिन्होंने प्लास्टिक सर्जरी के बूते कई मायूस लोगों को नई जिंदगी दी। बुधवार शाम 4:30 बजे फानी दुनिया को डॉ. जहीर ने अलविदा कह दिया।रात को सूफिया मस्जिद में उनकी नमाज-ए-जनाजा हुई और भोपाल टॉकीज के पास वाले कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्देखाक किया गया। परिवार के नाम पर सिर्फ पत्नी के रूप में नजमा हैं। उनके छोटे भाई शहर के प्रसिद्ध सर्जन डॉ. नईम हैं। डॉ. जहीर का सबसे बड़ा करिश्मा साल 1977 में ग्वालियर की एक युवती मुन्नी बाई को मुन्ना लाल बनाने का है। मुन्ना की अब संतानें हैं।

दरअसल, मुन्नीबाई पुलिस इंस्पेक्टर की बेटी थीं। उनकी शादी के तीसरे दिन पति ने उन्हें घर से निकाल दिया। इसके पीछे वजह बताई गई कि उनका शरीर और हावभाव स्त्रियों की तरह न होकर पुरुषों जैसे थे। इसके बाद पिता उन्हें इलाज के लिए इंदौर के महाराजा यशवंत अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने उन्हें भोपाल के हमीदिया अस्पताल में डॉ. जहीर को दिखाने के लिए कहा।
इसके बाद डॉ. जहीर ने 3 महीने तक हमीदिया में रखकर उनका दो बार ऑपरेशन किया और मुन्नी बाई, मुन्ना लाल बन गई। उनके इस काम के कारण उन्हें अमेरिका समेत कई देशों में हुई मेडिकल कॉन्फ्रेंस में बुलाया गया। डॉ. जहीर की एक खासियत यह भी थी कि वे दोनों हाथों से एकसाथ सर्जरी कर लेते थे।

बात-बात पर शेर कहना फन था

जैमिनी के अनुसार स्वभाव से मजाकिया, बात-बात पर शेर कहना डाॅ. जहीर का एक फन था। रिश्ते निभाने के मामले में वे एक मिसाल थे। साथ ही मेडिकल दुनिया के वे इनसाइक्लोपीडिया थे। उन्हें भोपाल से बहुत मोहब्बत थी। बर्रु कट भोपाली होने के साथ ही उर्दू अदब में दखल रखते थे।

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Death by corona in surat

20.07.2022
शहर में पिछले कुछ दिनों से कोरोना मरीजों की संख्या घट रही है, लेकिन सिविल के कोविड-19 अस्पताल में मंगलवार को चौथी लहर में पहली बार तीन कोरोना मरीजों की मौत हुई है। इसमें दो मरीज पॉजिटिव तथा एक निगेटिव होने की जानकारी मिली है। हालांकि मनपा के स्वास्थ्य विभाग ने कोविड-19 से किसी मौत से इन्कार किया है।सूत्रों के मुताबिक वेडरोड अखंड आनंद स्कूल विक्रम नगर निवासी 44 वर्षीय व्यक्ति को 13 जुलाई को न्यू सिविल में एक्यूट रिसपरेटरी डिजीज के लिए भर्ती किया था। कोरोना की आशंका के साथ उनका इलाज शुरू किया गया। इलाज के दौरान मंगलवार सुबह सात बजे मौत हो गई। उन्होंने कोरोना वैक्सीन की दो डोज ली थी।दूसरे मामले में नवसारी बाजार क्षेत्र निवासी 67 वर्षीय वृद्ध को 30 जून को कोरोना पॉजिटिव आने पर भर्ती किया था। उनकी इलाज के दौरान मंगलवार सुबह 7.15 बजे मौत हो गई। उनको हाइपरटेंशन और डायबिटिज की बीमारी थी। उन्होंने कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ली थीं।तीसरा मामला मंगलवार शाम को सामने आया जिसमें 70 वर्षीय वृद्ध की मौत हुई है। जानकारी के मुताबिक उनको एक्यूट रिसपरेटरी डिजीज थी और कोविड पॉजिटिव आने पर भर्ती हुए थे। उन्होंने कोरोना की खुराक नहीं ली थी।सिविल अस्पताल के स्टेमसेल बिल्डिंग में तीन मरीजों की मौत का मामला काफी समय बाद सामने आया है। मनपा के डिप्टी कमिश्नर हैल्थ एंड हॉस्पिटल डॉ. आशीष नायक ने कोरोना से मौत से इनकार किया है। गौरतलब है कि लंबे समय से कोविड 19 से मौत का कोई मामला सामने नहीं आया था। चौथी लहर में एक ही दिन में तीन मरीजों की मौत से स्वास्थ्य विभाग में हड़कम्प मचा है।

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