NMC approves 2 new medical colleges

08.08.2022

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने हाल ही में राज्य में दो नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी है, एक पंचमहल जिले के गोधरा में और दूसरा पोरबंदर में।एनएमसी द्वारा 29 जुलाई को दो कॉलेजों का निरीक्षण किया गया था, जिसके बाद उन्होंने एक सप्ताह से भी कम समय में मंजूरी जारी कर दी थी।वर्तमान में, राज्य में 30 मेडिकल कॉलेज हैं जिनमें निजी, सरकारी और अनुदान प्राप्त कॉलेज शामिल हैं, जिनमें कुल उपलब्ध मेडिकल सीटों की संख्या 5,500 है।नए स्वीकृत दो कॉलेजों में प्रत्येक में 100 सीटें होंगी, जिससे राज्य में उपलब्ध मेडिकल सीटों की कुल संख्या बढ़कर 5,700 हो जाएगी।राज्य में प्रस्तावित पांच नए मेडिकल कॉलेजों में से एनएमसी ने उनमें से दो के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। अन्य तीन प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज राजपीपला, नवसारी और मोरबी में स्थित हैं। एनएमसी ने कथित तौर पर राजपिपला, नवसारी और मोरबी में अन्य तीन प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों का भी निरीक्षण किया था।स्वीकृत मेडिकल कॉलेजों का निर्माण 660 करोड़ रुपये और प्रत्येक में 330 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। और सूत्रों के अनुसार, खर्च का 60% केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा जबकि शेष 40% राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जाएगा।यह कहते हुए कि दो कॉलेजों को एनएमसी द्वारा अनुमोदित किया गया है, गुजरात के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, मनोज अग्रवाल ने कहा, “प्रत्येक में 100 एमबीबीएस सीटें होंगी। इससे राज्य के छात्रों को बड़े पैमाने पर मदद मिलेगी।” उन्होंने कहा कि वे उम्मीद कर रहे हैं कि एनएमसी जल्द से जल्द तीन अन्य कॉलेजों के लिए भी मंजूरी दे देगा।नए कॉलेजों में प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, छात्रावास, ट्यूटर और पैरामेडिकल स्टाफ जैसी सुविधाएं होंगी। गुजरात मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च सोसाइटी (जीएमईआरएस) ने हाल ही में प्रस्तावित नए कॉलेजों में मेडिकल कॉलेजों में शिक्षक के रूप में काम कर रहे 258 डॉक्टरों को स्थानांतरण आदेश जारी किए थे।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Allegation of disturbace in tender

पाली के संवेदक भोमेश्वर थानवी ने मेडिकल कॉलेज में करीब एक करोड़ के फर्नीचर खरीद के टेंडर जारी करने में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। थानवी का कहना है कि निविदा छोड़ने में नियमों को ताक पर रखा गया।उन्होंने कॉलेज के प्रिंसिपल को पत्र लिखकर गुड़गांव की एक कम्पनी के जयपुर डीलर पर मिलीभगत व विभाग के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि निविदा की शर्तों में आओटा (आल इंडिया ओकोपेशनल थेरेपिस्ट एसोसिएशन) सटिर्फिकेट की अनिवार्यता की गई, जो कि नहीं था। वेबसाइड की सूची के अनुसार गुड़गांव के आओटा सर्टिफिकेट के आधार पर निविदा भरी है,जबकि गुडगांव का माल दिया ही नहीं है। थानवी का आरोप है कि फर्नीचर खरीद में सारे नियमों की अवहेलना करके 12 में से 11 फर्मो के आवेदन निरस्त कर एक को आदेश दे दिया, जबकि अभी तक माल भी नहीं आया। उनका आरोप है कि गुड़गांव की कम्पनी का जयपुर में कोई डीलर नहीं है।फर्नीचर खरीद में जिला उद्योग केंद्र के प्रतिनिधि को भी शामिल किया जाना था, मगर उन्हें भी नहीं लिया गया। इस निविदा आदेश के बारे में जानकारी लेने के लिए आरटीआई के तहत मांगी गई, पर अभी कोई जानकारी नहीं दी है।इस बारे में पूर्व प्रिसिंपल डॉ. एमएम पुकार को फोन किया तो उन्होंने रिसीव नहीं किया, जबकि ये टेंडर उनके कार्यकाल में जारी किया गया था। नए प्रिसिंपल डॉ. बीएल बिनावरा ने कहा कि शुक्रवार को ज्वॉइन किया है। भोमेश्वर थानवी ने आरटीआई में जानकारी उपलब्ध नहीं करवाने की जानकारी दी। थानवी को जानकारी दी जाएगी। उन्होंने उनको शनिवार को बुलाया है।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Medical college principals order

राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी, जयपुर ने निम्नलिखित चिकित्सक शिक्षकों को उनके नाम के सम्मुख अंकित मेडिकल कॉलेजों में प्रधानाचार्य के पदों पर तुरंत प्रभाव से नियुक्त करने के दिए आदेश

OFFICIAL ORDERS HERE

Pmc order

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

50 bed critical care unit

05.08.2022
अयोध्या। जिले में आगामी समय में गंभीर मरीजों के इलाज के लिए लखनऊ, दिल्ली, मुंबई या अन्य बड़े संस्थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके लिए राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में ही 50 बेड के क्रिटिकल केयर यूनिट की स्थापना होगी।
निर्माण कार्यों व साजो-सज्जा के सामान पर करीब 23.75 करोड़ रुपये खर्च होंगे। शासन ने मेडिकल कॉलेज से इसके निर्माण के लिए आवश्यक भूमि की उपलब्धता का विवरण मांगा है, जिसका प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है।राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2019 से ही एमबीबीएस की कक्षाएं संचालित हैं। मौजूदा समय में यहां पर 300 बेड का अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर क्रियाशील है और 200 बेड का भवन निर्माणाधीन है।
जिसके भी शीघ्र ही हैंडओवर होने की उम्मीद है। इस अस्पताल को कोविड एल-2/एल-3 अस्पताल भी बनाया गया है। जहां आईसीयू, पीआईसीयू, एनआईसीयू, एचडीयू आदि भी बनाए गए हैं।जिसका जनपदवासियों समेत निकटवर्ती जिले के लोगों को भी लाभ मिल रहा है। फिर भी किडनी, लीवर, हृदय, न्यूरो, नेफ्रो, यूरो आदि के गंभीर मरीजों को हायर सेंटर ही रेफर करना पड़ता है।अब शासन की ओर से इससे निजात देने के लिए अस्पताल को एक और सौगात देने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए इस अस्पताल में 50 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट की स्थापना की जाएगी।राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक अपर्णा उपाध्याय द्वारा 28 जुलाई को जारी पत्र के अनुसार मेडिकल कॉलेज में इसके निर्माण के लिए आवश्यक भूमि का विवरण मांगा गया है।इस यूनिट का निर्माण प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (पीएम-एबीएचआईएम) मिशन के तहत किया जाएगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज में 4750 वर्ग मीटर जगह की आवश्यकता बताई गई है।
इसके निर्माण कार्यों पर 16.63 करोड़ व उपकरण और साजो-सज्जा के सामान पर 7.12 करोड़ खर्च होंगे। समस्त निर्माण कार्य के लिए कार्यवाही एनएचएम स्तर से ही की जाएगी।
शासन की ओर से मेडिकल कॉलेज में 50 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट खोलने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए 4750 वर्ग मीटर जगह की आवश्यकता बताई गई है। मेडिकल कॉलेज के पास इसके निर्माण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है। जिसका विवरण तैयार करके शासन को भेजा जाएगा। इसके निर्माण से तमाम बीमारियों के गंभीर बीमारियों के मरीजों का इलाज मेडिकल कॉलेज में हो सकेगा।

डॉ. सत्यजीत वर्मा, प्राचार्य, राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Good news for medical students

नीट पास कर एमबीबीएस करने के इच्छुक छात्रों के लिए अच्छी खबर है। देश के 16 राज्यों में एमबीबीएस की 3495 सीटें बढ़ाने की तैयारी चल रही है. राजस्थान में अधिकतम 700 और मध्य प्रदेश में 600 सीटें बढ़ाई जाएंगी। हालांकि पुराने मेडिकल कॉलेजों में ये सीटें बढ़ाई जाएंगी। नए कॉलेजों को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में यह जानकारी दी है.केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनुसख मंडाविया ने लोकसभा में सांसद डॉ. हीना गावित और डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे के एक सवाल में बताया कि केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) के तहत सरकारी मेडिकल कॉलेजों को अपग्रेड किया जाएगा. इसके तहत मौजूदा मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें बढ़ाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि 16 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 3495 एमबीबीएस स्वीकृत किए गए हैं।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) के तहत राज्य के मेडिकल कॉलेजों को अपग्रेड किया जाएगा। वहां मेडिकल पीजी की सीटें बढ़ेंगी और पीजी के नए विषय शुरू होंगे। इसके तहत 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में दो राज्यों में 5930 सीटों को मंजूरी दी गई है।

कहां कितनी बढ़ेंगी एमबीबीएस की 3495 सीटें
राज्य और सीटें
राजस्थान 700
मध्य प्रदेश 600
कर्नाटक 550
तमिलनाडु 345
गुजरात 270
ओडिशा 200
आंध्रपदेश 150
महाराष्ट्र 150
झारखंड 100
पंजाब 100
पश्चिम बंगाल 100
जम्मू कश्मीर 60
मणिपुर 50
यूपी 50
उत्तराखंड 50
हिमाचल प्रदेश 20

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

100 seat recognition in medical college

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। राज्य सरकार की पहल पर प्रदेश में तीन नए मेडिकल कॉलेज में पिछले साल जहां कांकेर काे एनएमसी से मान्यता मिली थी, वहीं इस बार महासमुंद काे भी मान्यता मिल गई।प्रदेश में दाे साल पहले कांकेर, महासमुंद व काेरबा जिले में नए मेडिकल कॉलेज खाेलने की मंजूरी मिली थी। इसके बाद तीनाें ही जिलाें में मेडिकल कॉलेज की तैयारी शुरू हुई। पिछले साल एनएमसी के निरीक्षण के बाद कांकेर काे मान्यता मिली थी।इस बार मान्यता की दाैड़ में महासमुंद व काेरबा मेडिकल कॉलेज थे। करीब 2 महीने पहले एनएमसी ने दाेनाें कॉलेज का एक ही दिन वर्चुअल निरीक्षण किया था। उसके बाद से फाइनल रिपाेर्ट का इंतजार चल रहा था।शुक्रवार काे एनएमसी ने एक रिपाेर्ट जारी की, जिसमें महासमुंद मेडिकल कॉलेज काे शैक्षणिक सत्र 2022-23 के लिए 100 सीट के चिकित्सकीय शिक्षा के लिए मान्यता प्रदान कर दी गई है।प्रदेश में शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटों में बढ़ोतरी होने से मेडिकल की शिक्षा के साथ ही मरीजों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

NMC investigates the medical college

30.07.2022
राजधानी भोपाल के महावीर मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परिषद (एनएमसी) की छह सदस्यीय टीम ने पहुंचकर छानबीन की। टीम जब यहां निरीक्षण करने पहुंची तो गिने–चुने मरीज मिले। मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी स्टाफ भी गायब मिला। टीम को निरीक्ष्रण के दौरान मेडिकल कॉलेज में बडे़ पैमाने पर संसाधनों की कमी पाई गई है। टीम ने जांच पूरी कर ली है।

पहली बार छह सदस्यीय टीम ने की जांच

राजधानी में आमतौर पर एनएमसी की टीम में तीन सदस्य ही जांच करने आते हैं लेकिन पहली बार नेशनल मेडिकल कमीशन की तरफ से छह सदस्यीय दल को निरीक्षण करने के लिए भेजा गया है।इस मामले में महावीर मेडिकल कॉलेज के प्रशासक राजेश जैन का कहना है कि ये निरीक्षण रुटीन प्रोसेस है। ये इंस्पेक्शन हर साल होता है। टीम ने दूसरे मेडिकल कॉलेजों का भी निरीक्षण किया है। टीम ने रिपोर्ट में क्या लिखा इसकी जानकारी नहीं हैं। लेकिन मेडिकल कॉलेज में सभी व्यवस्थाएं संतोषजनक मिली हैं।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

NEW Medical colleges approval

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार 2014 से तीन चरणों में अबतक 157 नए मेडिकल कॉलेज को मंजूरी दी गयी है।केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बृहस्पतिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों तथा चिकित्सा शिक्षा निदेशकों के साथ योजना की समीक्षा करते हुए परियोजनाओं की धीमी प्रगति को रेखांकित किया।उन्होंने राज्यों से परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी लाने की अपील की ताकि 2023-24 शिक्षण सत्र में स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकें।भूषण ने कहा कि चूंकि योजना 31 मार्च 2024 को समाप्त हो रही है,इसलिए सभी परियोजनाएं वक्त पर पूरी होनी जरूरी हैं।मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा परियोजना में व्यय की धीमी गति और धन के लिए अनुरोध नहीं किये जाने को लेकर केंद्र आगे धन जारी नहीं कर सकता।बैठक में अंडमान निकोबार द्वीपसमूह, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, जम्मू कश्मीर, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा और पंजाब ने हिस्सा लिया।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Medical college of ratlam

शहर के मेडिकल कॉलेज में मार्च माह में दूषित भोजन के सेवन से कई बच्चें बीमार हुए थे और उनको भर्ती करना पड़ा था। पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई के नाम पर मात्र मेस संचालक को हटाने की कार्रवाई की है। इसमे मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मेस संचालक के खिलाफ पुलिस में कोई कार्रवाई तक कराना जरूरी नहीं समझा।मार्च माह में जिले के एकमात्र शासकीय मेडिकल कॉलेज में फूड पाईजिनिंग की घटना हुई थी। इसमे कई बच्चें बीमार हुए थे। इस घटना को पहले तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन दबाता रहा, जब घटना बाहर आ गई तो शुरू से लेकर अंत तक मेस संचालक को बचाने का काम होता रहा। इतना ही नहीं, मेडिकल कॉलेज से जुड़े किसी प्रशासनीक अधिकारी पर इस मामले में जांच तक नहीं की गई।

कई सवाल, जिनके जवाब तक नहीं

घटना के बाद अब अब तक कई सवाल है, जिनके जवाब देने से मेडिकल कॉलेज प्रशासन बचता है। इस मामले में नियम यह है कि जो छात्र बीमार हुए और उल्टी हुई, ऐसे मामले में पुलिस को बुलाकर उल्टी को जांच के लिए सागर लैब भेजा जाता है, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने मात्र पुलिस को सूचना देना जरूरी समझा। इसके लिए अलग से कोई कार्रवाई के लिए बताना तक जरूरी नहीं समझा गया। इतना ही नहीं खाद्य और औषधि प्रशासन को भी इस मामले में कोई सूचना नहीं दी गई। जबकि नियम अनुसार सूचना दी जाती तो यह विभाग बचे हुए उस भोजन के नमूने ले लेता, जिसको खाने से मेडिकल कॉलेज के बच्चें बीमार हुए थे।

समिति में कौन नहीं पता

इस मामले को जहां शुरू से अंत तक मेडिकल कॉलेज प्रशासन दबाता रहा, वही बाद में भी कोई सूचना साझा करना जरूरी नहीं समझा गया। बड़ी बात यह है कि जब सूचना के अधिकार कानून में जानकारी चाही गई तो यह तो बता दिया गया कि मेस संचालक को हटा दिया गया, लेकिन जांच समिति में कौन था, समिति ने किन बिंदुओं पर जांच की, जांच समिति कब बनाई गई यह सब बताना जरूरी नहीं माना गया
नियम अनुसार कार्रवाई कीमेडिकल कॉलेज में कुछ खाने से बच्चें बीमार हुए थे, जिसके बाद उनको बेहतर उपचार दिया गया था। मार्च माह में हुई इस घटना के बाद जांच की गई और दोषी मेस संचालक को निष्कासित कर दिया गया।

लोकेंद्र सिंह कोट, मीडिया प्रभारी, शासकीय मेडिकल कॉलेज

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Now pmch college patna free examination of seasonal diseases

13.07.2022
कोरोना का संक्रमण शहर में लगातार बढ़ रहा है। साथ ही साथ मौसमी बीमारियां भी दस्तक देने लगी हैं। इसलिए मौसमी बीमारियों की भी जांच पीएमसीएच के माइक्रोबायोलॉजी विभाग शुरू की गई है। इनमें कोरोना के अलावा डेंगू, मेनिनजाइटिस, जापानी इंसेफ्लाइटिस, मलेरिया, चिकनपॉक्स आदि की भी जांच शुरू कर दी गई है।डेंगू जांच कराने के लिए मरीज भी आने लगे हैं। अस्पताल के अनुसार माइक्रोबायोलॉजी विभाग में एक सप्ताह के दौरान अभी कोई मरीज पॉजिटिव नहीं मिला है। हालांकि प्राइवेट क्लिनिक दावा कर रहे हैं जांच में डेंगू के मामले शुरू हो गए हैं। अभी एक-दो मरीज ही पॉजिटिव मिले हैं। बताया जा रहा है कि बारिश के बाद होने वाले जलजमाव में डेंगू के मच्छर उत्पन्न होंगे तब डेंगू का प्रकोप दिखने लगेगा।

जरूरत और मांग के अनुसार सुविधा बहाल की जाएगी

पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. आईएस ठाकुर के मुताबिक भर्ती होने वाले डेंगू मरीजों की संख्या बढ़ेगी या फिर विभाग से इस तरह का कोई निर्देश आएगा तो अलग वार्ड की व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल अभी कोई मरीज आता है तो उसकी व्यवस्था की जाएगी। अभी अलग वार्ड बनाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया। जरूरत और मांग के अनुसार सुविधा बहाल की जाएगी।

प्लेटलेट्स भी जरूरत के अनुसार तैयार किया जाएगा। क्योंकि डेंगू मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत होती है। ब्लड बैंक को भी जरूरत के अनुसार प्लेटलेट्स तैयार करना होगा। उसकी भी व्यवस्था है। डॉक्टरों ने बताया कि डेंगू के मच्छर साफ जमा पानी में पनपते हैं। इसलिए घर या आसपास में यदि पानी जमा हो तो उसे साफ कर दें। वरीय फिजिशियन डॉ. राजीव रंजन और डॉ. बीके चौधरी का कहना है कि बुखार और शरीर में तेज दर्द होने की शिकायत लेकर मरीज आ रहे हैं।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓