kidnapping of baby in sms jaipur

प्रदेश के सबसे बड़े SMS हॉस्पिटल से बुधवार शाम 4 महीने का बच्चा चोरी हो गया। बड़े पोते का इलाज कराने आए दादा-दादी ने अपना छोटा पोता खो दिया। किडनैपर ने दो दिन रेकी की 90 कैमरों को धोखा देकर मासूम का किडनैप कर ले गया। SMS हॉस्पिटल थाना पुलिस ने बच्चे की किडनैपिंग का मामला दर्ज किया है। हॉस्पिटल में लगे CCTV फुटेजो को खंगालने के साथ ही बच्चा चोर की तलाश की जा रही है।SHO नवरतन धोलिया ने बताया कि दौसा के चांदराना निवासी कालूराम ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है। घटना शाम 6 बजे अस्पताल के बांगड़ पार्क की है। मासूम के दादा दौसा के चांदराना निवासी कालूराम और दादी धोली देवी बड़े पोते आयुष (4) का इलाज कराने आए थे।बुधवार शाम दादा-दादी पोते काे लेकर युवक के साथ बांगड़ के पार्क के पास बैठे थे। इसी दौरान इंद्रा रसोई से खाना मिलना शुरू हुआ ताे दादी आरोपी युवक काे पोता संभला कर बड़े पोते के लिए खाना लेकर वार्ड में चली गई। पास ही दादा खाना खा रहा था। 15 मिनट बाद जब दादी लौटी ताे पता चला कि युवक 4 महीने के दिव्यांश को लेकर चला गया।

इलाज के बहाने बढ़ाई नजदीकियां
आयुष को 24 जुलाई को भर्ती करवाया था। पत्नी धोली देवी, बेटा अंकुर, बहू खेला देवी व 4 माह का दिव्यांश हॉस्पिटल में थे। दादी धोली देवी ने बताया कि बुधवार को पार्क में दोपहर में 12:30 बजे 30 वर्षीय व्यक्ति ने बातचीत शुरू की। उसका कहना था कुछ दिन भाई को भी ऐसी समस्या थी। उसने भरोसा दिलाया कि वह उनके पोते का अच्छे डॉक्टर से इलाज करवाएगा। इस पर वहआयुष की रिपोर्ट के साथ दिव्यांश को लेकर पास के ही एक निजी अस्पताल गए। यहां डॉक्टर भास्कर को आरोपी ने बच्चे की रिपोर्ट दिखाई। शाम साढे 4 बजे के करीब यह दोबारा आए। दादी ने बताया खाना लेकर अपने 4 महीने के पोते को लेकर अंदर जाने लगी तो आरोपी ने रोक कर कहा बच्चा दादा को दे दो। इस पर उन्होंने अपने पोते को दादा को संभालने के लिए दे दिया। कुछ ही देर में जब पोता नहीं दिखाई दिया तो दादा ने शोर मचाना शुरू कर दिया।

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Kidney transplant in Gujrat

06.07.2022
बाछड़ाऊ निवासी एक 38 वर्षीय महिला ने अपने बेटे की जान बचाने के लिए अपनी जान दाव पर लगा दी। दमी देवी का बेटा हरीश लंबे समय से बीमार था और उसकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी थी।
बेटे की जिंदगी बचाने के लिए मां दमी ने अपनी किडनी देने की पेशकश की। जांच के बाद किडनी ट्रांसप्लांट पर तो सहमति बन गई लेकिन इसके लिए 27 लाख रुपए खर्चा आ रहा था।इतनी बड़ी रकम होने की वजह से यह परिवार व्यवस्था करने में सक्षम नहीं था। ऐसे में इन्होंने भामाशाहों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई। इसके बाद केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने मददगार बनकर इनकी मदद की और गुजरात के अस्पताल में इलाज करवाया। किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद अब मां और बेटा दोनो स्वस्थ है।

केंद्रीय मंत्री ने गुजरात में कराई मदद
हरीश के पिता शेराराम सियाग किसान है। किडनी ट्रांसप्लांट के 27 लाख रुपए नहीं थे। बाछड़ाऊ पूर्व सरपंच मानाराम बेनीवाल, किसनाराम मूंढ़ण, आदूराम मेघवाल ने हरीश की मदद की गुहार केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी से लगाई। केंद्रीय मंत्री चौधरी ने सांसद कोटे से डेढ़ लाख रुपए दिए साथ ही हरीश के किडनी ट्रांसप्लांट अहमदाबाद में एक निजी अस्पताल में होनी थी, तब मंत्री ने गुजरात के मुख्यमंत्री से फोन पर मदद की मांग की। गुजरात सीएम कार्यालय से हरीश के नाम स्वास्थ हेल्थ कार्ड जारी कर किडनी ट्रांस प्लांट की व्यवस्था करवाई।

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद होश में आई माता दमी तो सबसे पहले पूछा; मेरा बेटा कैसा है
जब मां किडनी देने के बाद होश में आई तो मुंह से केवल एक ही शब्द निकला मेरा बेटा कैसा है। अहमदाबाद में मां बेटे की किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अब दोनों स्वस्थ हैं। विदेशी डॉक्टरों द्वारा सफल ऑपरेशन किया गया। हरीश सियाग कक्षा 9 में बाछड़ाऊ स्कूल में अध्ययनरत है। दोनों किडनियां खराब होने से हरीश ने चारपाई पकड़ ली थी, लेकिन अब स्वस्थ होने के बाद दुबारा अध्ययन कर पाएगा
परिवार की आर्थिक स्थिति खराब, अब भी मदद की दरकार
हरीश की किडनी का सफल ऑपरेशन होने के बाद अब भी दो से तीन लाख रुपए की मदद की दरकार है। हरीश की माता गृहणी व पिता किसान हैं। हरीश के इलाज के लिए इस किसान परिवार ने पहले भी काफी कर्ज ले रखा है। अभी हरीश के पूर्ण इलाज के लिए दो से तीन लाख रुपए की जरूरत है। समाज सेवी हरीश मूंढण ने बताया कि यदि कोई भामाशाह या संस्था आकर इस परिवार की आर्थिक मदद करे तो इसका पूर्ण इलाज हो पाएगा।

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A middle-aged, 7-year-old girl molested in the women’s washroom of Sawai Mansingh Hospital (SMS), Jaipur.

18.06.2022
राजस्थान के सबसे बड़े अस्पताल में सात साल की मासूम के साथ अधेड़ ने छेड़छाड़ कर दी।आरोपी बच्ची के पीछे-पीछे अस्पताल की वॉशरूम में घुस गया।जानकारी के अनुसार छेड़छाड़ का मामला गुरुवार का है। धौलपुर का रहने वाला परिवार एसएमएस अस्पताल आया था। उनके साथ उनकी सात साल की बच्ची भी थी। अस्पताल में बच्ची के नाना को आर्टिफिशियल पैर लगाया जाना था। बच्ची के पिता उसके नाना को डॉक्टर को दिखाने के लिए उनके कैबिन में ले गए थे। बच्ची अपनी मां और भतीजे के साथ बैठी हुई थी। इस दौरान बच्ची और भतीजा दोनों वॉशरूम चले गए।मासूम जैसे ही महिला वॉशरूम में घुसने लगी तो एक अधेड़ व्यक्ति भी अंदर चला गया और उसे पकड़ लिया। बच्ची के जोर से चिल्लाने की आवाज सुनकर महिलाएं उस ओर भागी। यह देखकर आरोपी उसे छोड़कर फरार हो गया। इसके बाद मासूम अपनी मां के पास पहुंची और घटना के बारे में बताया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अस्पताल सहित आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालने रही है।

Doctor surprised to see Rahul’s normal BP, pulse in hospital after removing Rahul who fell in borewell in Janjgir Champa, Chhattisgarh

16.06.2022
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में बोरवेल में फंसे राहुल को 106 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन बाद मंगलवार देर रात सुरक्षित निकाल लिया गया। रेस्क्यू के फौरन बाद उसे बिलासपुर के अपोलो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। राहुल शुक्रवार को दोपहर करीब 2 बजे 60 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था। प्रशासन, SDRF, NDRF और सेना ने इस ऑपरेशन को बिना रुके अंजाम दिया। ये देश का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन बताया जा रहा है। इससे पहले हरियाणा के कुरूक्षेत्र में 21 जुलाई 2006 को 50 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 5 साल के प्रिंस को 50 घंटे में बचाया गया था।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रेस्क्यू ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए थे। वो राहुल के परिजनों के संपर्क में थे। मंगलवार रात उन्होंने सोशल मीडिया पर रेस्क्यू ऑपरेशन कामयाब होने की जानकारी दी। CM ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान गड्‌ढे में एक सांप भी आ गया था। मगर खतरा टल गया। काफी लोग घटनास्थल के पास मौजूद थे।जैसे ही राहुल को बाहर निकाला गया जवानों ने भारत माता की जय के नारे लगाए। लोगों ने रेस्क्यू टीम के लिए तालियां बजाईं और पटाखे चलाए। लोगों ने SDRF, NDRF और सेना के जवानों को गोद में उठा लिया।

In Bilaspur, doctors got success in removing coins from the girl’s mouth, 8-year-old girl kept coins in her mouth while playing

06.06.2022
डॉक्टरों ने चार घंटे की मशक्कत के बाद आठ साल की बच्चे की भोजन नली से तीन सिक्के निकाले।दरअसल, कोरबा जिले के पाली ब्लॉक के खैरा डुबान की रहने वाली लड़की ने खेलते वक्त मुंह में सिक्के रखे लिए थे। जो अंदर जाकर भोजन नली में फंस गए।इससे बच्ची रोने लगी और उसकी हालत खराब हो गई। घबराए परिजन उसे अस्पताल ले गए, जहां से उसे बिलासपुर रेफर कर दिया गया था।परिजन उसे लेकर निजी अस्पताल पहुंचे, तब उसकी हालत नाजुक थी और वह दर्द से सुस्त पड़ गई थी। उसे सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। डॉक्टरों ने एक्स-रे से देखा, तब सिक्के बच्ची के गले में फंसे थे। सिक्कों को निकालने के लिए डॉक्टरों ने बच्ची को बेहोश किया। फिर ऐसोफेगो स्कोप नामक यंत्र को उसके मुंह से खाने की नली में डाला। कुछ देर बाद एक सिक्का निकला। फिर दूसरे सिक्के को निकाला गया। दो सिक्के निकालने के बाद डॉक्टरों ने फिर से एक्स-रे मशीन से देखा तो एक और सिक्का नजर आ रहा था, जिसे निकालने के लिए तीसरी बार स्कोप को खाने की नली में डाला और तीसरा सिक्का भी निकाल लिया गया। बच्ची दो रुपए के दो और एक रुपए के एक यानि की तीन सिक्कों को निगल ली थी। कुल मिलाकर 5 रुपए बच्ची के गले में फंस गए थे। सिक्के निकालने के बाद बच्ची की हालत अब ठीक है, डॉक्टर बृजेश पटेल ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए पेरेंट्स को बच्चों पर नजर रखना चाहिए। बच्चों को सिक्कों को मुंह में डालने न दें। इसी तरह कोई भी खाने की ठोस वस्तु भी बच्चे खा रहे हैं, तो पैरेंट्स को ध्यान रखना चाहिए। गले में स्वांस नली और भोजन नली में सिक्के या खाने का कोई ठोस वस्तु फंस जाए, तो घातक हो सकता है। स्वांस नली में सिक्के फंसने से दम घूट सकता है और बच्चों की जान भी जा सकती है। ऐसे में छोटे बच्चों का खास ध्यान रखना चाहिए।

राखी पर एक बहिन का खुला पत्र अपने भाई के नाम

प्यारे भैया

आज राखी पर बड़ी दीदी ने शायद तुम्हारी कलाई पर राखी बांध दी होगी ! मेरे हिस्से वाली राखी शायद इस साल भी तुम्हें बांध नहीं पाउंगी । इस साल भी तुम्हारी कलाई पर नहीं बंधी एक राखी, तुम्हें मेरी याद दिलाएगी । उस कलाई पर नहीं बंध पा रही, तुम्हारी कलाई पर उस राखी के घेरे जाने वाली जगह सिर्फ मेरी है । मैं तुमसे नाराज हूँ । नाराज उस बात पर, जिसमें गलती तुम्हारी नहीं थी, पर तुम्हारी वजह से ही आज मैं वहां नहीं हूँ जहाँ मुझे होना था । मेरे वजूद और इन्सान के तौर पर स्वाभिमान को तोड़ने में तुम सबसे बड़े कारण थे मेरे भाई ।

हर बार टाल जाती हूँ पर आज तुम्हें बताना चाहती हूँ, अपना सच, जो कभी तुम्हें बताया नहीं, वो सच जो घिनौना है, कड़वा है पर है तो सच ही । सुनो, बड़ी दीदी के जन्म के समय घर में सबके चेहरे उदास तो थे पर उतने ग़मगीन नहीं थे जितना उस समय हुए, जब मेरे जन्म से पहले ही मम्मी पापा ये देखने के लिए की मैं लड़की हूँ या लड़का, किसी जगह मुझे लेकर गए और उन्हें पता लग गया की मम्मी के पेट में तुम नहीं मैं थी । लड़का नहीं एक लड़की । पापा गुस्सा हो गए, उन्होंने मम्मी को खूब भला बुरा कहा । उन्होंने मम्मी को क्यों डांटा मुझे तो समझ नहीं ही नहीं आया । अब मम्मी के पेट में लड़का आएगा या लड़की, ये मम्मी को थोड़े ही पता होगा और इसे गलती की तरह देखना भी भाई, कितनी बड़ी गलती थी । क्या हम लड़कियों का इस धरती पर आना अपराध है । क्या हम लड़कियां किसी की इच्छा से नहीं, गलती से धरती पर आते हैं । क्या हम वो नंबर हैं जो गलती से लग जाते हैं । रोंग नंबर । हमें गलती की तरह क्यों देखा और पाला जाता है ।शायद इसलिए हमारे साथ भेदभाव होता है क्योंकि गलती को तो, अच्छे खाने की, अच्छे कपड़े की, अच्छी शिक्षा की, स्वास्थ्य की और आजादी की जरुरत थोड़े हो होती है, गलतियाँ तो बीएस सजा भुगतने के लिए ही होती हैं । हाँ, लोग अब कुछ बदले हैं । समाज बदला है । किताबों में, अख़बारों में, फिल्मों में, और टीवी की बहस में लड़कियों को लेकर अच्छी बातें होने लगी हैं पर समाज का कड़वापन आज भी हरा है । पहले जो चीजें खुले तौर पर होती थी अब दबे पांव होती हैं, जैसा की मेरे साथ भी हुआ ।

मैंने देखा की पापा किसी को पैसे दे रहे थे और कुछ कह रहे थे । मुझे लगा शायद पापा यह बोले होंगे की मैं यहाँ मम्मी के पेट में अकेली हूँ, कैसी रह रही होउंगी । कोई दवाई या खाना मुझे दिया जायेगा जिससे मुझे अच्छा लगेगा या शायद मुझे जल्दी बाहर निकालने के लिए कहा होगा । वो मुझे गोदी में लेने और प्यार करने को उतावले हो रहे होंगें । मेरे मासूम दिल ने कहा पापा तो पापा ही होते हैं । बेटी अपनी मां से भी ज्यादा अपने पापा के करीब होती है । पापा की बेटी । और मैं भी अब साड़ी जिंदगी उनका सारा ध्यान रखूंगी । उनकी दवाई, उनका खाना, उनकी तबियत, सबका । मेरे पापा, प्यारे पापा । मैं यह सब सोच रही थी और पता नहीं क्या हुआ, मेरे पास बहुत हलचल सी होने लगी, मैं घबरा गयी । अचानक मेरा डीएम घुटने लगा, मुझे सांस आनी बंद हो गयी और फिर धीरे धीरे मेरा मांस का लोथड़ा शांत हो गया.. मैं सो गयी, ऐसी सोई की फिर कभी जागी ही नहीं । दुनिया में आने से पहले ही दुनिया से विदा कर दी गयी ।

समाज इसे हत्या नहीं सफाई कहता है । गंदगी का नाम सफाई । अजब गजब लोग और अजब गजब उनकी व्याख्याएं । मैं अब भी देख रही थी.. सब कुछ । मैं अब मरी हुई, खून से लथपथ चिपचिपी सी, गन्दी ट्रे में पड़ी हूँ । मम्मी पापा अब यहाँ नहीं थे । पता नहीं अब कहाँ थे । दिखाई नहीं दे रहे थे । कोई आदमी वहां साबुन से अपने हाथ धो रहा था । बार बार । पता नहीं ऐसा कौन सा खून लग गया था उनके हाथों पर जो इतना धोने पर भी नहीं निकल रहा था । अचानक दरवाजा खुला और एक आदमी आया, उसने मेरे शरीर को कपड़े में लपेटा और उठा लिया ।

सब्जी के थैले के जैसे उसके हाथों में थी मैं अब । जैसे सब्जी के थैले से थोड़ी सब्जी बाहर लटकती है वैसे ही कपड़े से बाहर मेरे छोटे छोटे पैर लटके हुए थे । नन्हे पैर । इन्हीं नन्हे पैरों को देवी के पैर मान कर पूजा होती है देश में । वो ही लटके नन्हें पैर किसी सहारे की तलाश में थे ।

मेरा शरीर उसके हाथों में बहुत दूर तक आ गया । यहाँ अँधेरा ही अँधेरा था । उस आदमी ने मेरे शरीर को झाड़ियों में फेंक दिया । मेरा छोटा सा शरीर मिट्टी से भरा, काँटों में था । छिल गया था, पर कोई नहीं था जो मेरा ध्यान रखे । थोड़ी देर में वहां कुत्तों का झुण्ड आ गया और मेरा शरीर एक कुत्ते के मुंह में था । उसके नुकीले दांतों के बीच । वो हर सड़क से निकल रहा था । बस्ती से, मोहल्लों से, कॉलोनियों से । सभ्य और पढ़े लिखे समाज का जनाजा अपने मुंह में दबाये । बरसात होने लगी । मुझे लगा भगवान रोये हैं मेरे लिए, उनका दिल दुख होगा । सोचा होगा मुझे इन्सान बनाकर भेजने क बजाय कुत्ता बनाकर ही भेज दिया होता तो शायद आज मेरे मांस के लोथड़े में जान बाकी होती ।

मुझे इस संसार में लाये भी मम्मी पापा और संसार से विदा भी किया मम्मी-पापा ने । मैं थैंक्स बोलूं या शिकायत करूँ, समझ नहीं आता । राखी पर कितने ही भाइयों को ये पता भी नहीं होगा की उसकी कलाई सूनी क्यों है ?

अगर वो इसकी और जांच पड़ताल करेंगे तो शायद वो अपने घर, प[परिवार और समाज की उस कड़वी हकीकत के बारे में जान पाएंगे जिसके कारण बहुत से भाइयों की कलाई पर या तो राखी कम है या फिर है ही नहीं । दुखद है पर हकीकत है की हालात नहीं सुधरे तो कलाई से राखियां और घर से लड़कियां कम होती रहेंगी ।

  • श्री नवीन जैन, एमडी एनएचएम, राजस्थान

Audio concept – Dr. Jitendra Bagria, MBBS, DHM, PGDPHM

Audio voice – Dr. Mehvish Sharma

Child care leave Rajasthan CCL

चाइल्ड केयर लीव
तीन स्थितियों में ली जा सकती है – बच्चे की देखभाल अथवा परीक्षा अथवा बीमारी में, यानि बच्चे की परीक्षा और बीमारी ही होना आवश्यक नहीं है बल्कि सामान्य पालन हेतु भी छुट्टी मिलती है 🙂
1- राजस्थान सेवा नियम 1951 में नया नियम *103 C चाइल्ड केअर लीव* जोड़ा गया।
2- एक महिला कर्मिक को उसके पूरे सेवाकाल में सबसे बड़े दो बच्चों के पालन पोषण व जरूरत के समय देखभाल यथा बीमार होने, परीक्षा इत्यादि के लिए अधिकतम *2 वर्ष जो कि 730 दिन* के लिए ये, अवकाश स्वीकृत करने वाले सक्षम अधिकारी द्वारा स्वीकृत की जा सकेगी।
3- तत्काल प्रभाव से लागू किया गया।
4- चाइल्ड का तात्पर्य उसकी *आयु 18 वर्ष से कम हो*। *40%* या उससे अधिक विकलांगता की स्थिति में *22 वर्ष* तक चाइल्ड माना जायेगा।
5- यह *सवैतनिक अवकाश* होगा।  अवकाश प्रस्थान से पूर्व जो वेतन आहरित किया जा रहा है वो इस अवकाश काल में देय होगा।
6- इसे अन्य किसी भी देय अवकाश के साथ लिया जा सकेगा।
7- इस अवकाश के लिए आवेदन राज्य सरकार द्वारा जारी *अनुमोदित प्रारूप* में स्वीकृती हेतु समयानुरूप आवेदन करना होगा।
8- चाइल्ड केयर लीव अधिकार नही है। किसी भी स्थिति में महिला कार्मिक बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व स्वीकृति के अवकाश पर प्रस्थान नहीं कर सकेगी।
9- किसी भी स्थिति में अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रही महिला कार्मिक को यह अवकाश स्वीकृत नहीं किया जायेगा अगर बाद में इस अवकाश हेतु आवेदन किया है तो।
10- *पहले लिए जा चुके अवकाश* और वर्तमान में धारित अवकाश को किसी भी सूरत में चाइल्ड केयर लीव में *परिवर्तित नही* किया जा सकेगा।
11- इस अवकाश को अन्य अवकाश लेखो में से नहीं घटाया जा सकेगा।  राज्य सरकार द्वारा निर्धारित फॉर्म में इन अवकाशों को संधारित किया जाएगा। तथा ये फॉर्म सेवा पुस्तिका में चिपकाया जाएगा।
12- सक्षम अधिकारी आवेदित अवकाश को स्वीकृत करने से *मना भी कर सकता* अगर राज कार्य प्रभावित होते होते हों अथवा विभागीय लक्ष्यों की पूर्ति नहीं हो पा रही हों।
13-  *एक कलेंडर वर्ष में तीन बार से अधिक ये अवकाश नहीं लिया जा सकेगा।* एक स्पेल जो कि एक कैलेंडर वर्ष में शुरू हुआ और अगले कैलेंडर वर्ष में खत्म हो है तो ऐसी स्थिति में उसे, जिस कलेंडर वर्ष में अवकाश शुरू हुआ है उसमें गिना जाएगा।
14- सामान्यता *प्रोबेशनर्स को यह अवकाश देय नही होगा*।यद्धपी फिर भी विशेष परिस्थितियों कोई ये अवकाश लेता है तो उसका प्रोबेशन अवकाश अवधि के बराबर आगे बढ़ाया जाएगा।
15- यह अवकाश उपार्जित अवकाश की भांति ही ट्रीट होगा। तथा उसी प्रकार स्वीकृत किया जा सकेगा।
16- इस अवकाश के प्रारम्भ अथवा अंत में आने वाले रविवार, सार्वजनिक अवकाश घटाए जायेंगे।
17- दिव्यांग चाइल्ड के लिए ये अवकाश लेने पर सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर ही स्वीकृत किया जा सकेगा।
18- चाइल्ड के बीमार होने पर व बाहर रहने की स्थिति में डॉक्टर के प्रमाण के आधार पर ये अवकाश लिया जा सकेगा।
19- चाइल्ड की परीक्षा होने पर लिया जा सकेगा। यदि चाइल्ड होस्टल में रहता है तो महिला कार्मिक को यह तथ्य प्रस्तुत करना होगा कि होस्टल में आपकी केअर की जरूरत कैसे है। इसका प्रमाण प्रस्तुत करने पर ही हॉस्टलर्स चाइल्ड के लिए ये अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा।।
Attachments –
1. Order, Application formats
2. Clarification

Adoption Leave

Adoption Leave

A female member of the service on her adoption of a child may be granted leave of the kind due and admissible(including  commuted leave without production of medical certificate for a period not exceeding 60 days and leave-not-due) upto one year subject to the following conditions:

(i)     The facility will not be available to an adoptive mother already having two living children at the time of adoption
(ii)  The maximum admissible period of leave of the kind due and admissible will be regulated as under –

  1. If the age of the adopted child is less than one month, leave upto one year may be allowed;
  2. If the age of the child is six months or more leave upto six months may be allowed.
    3.   If the age of the child is nine months or more leave upto three months may be allowed.

responsibilities of government employees to stop child marriage