Dr. YS Sachan death case

10.08.2022
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पूर्व उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी (डिप्टी सीएमओ) डॉ वाईएस सचान की जेल में संदिग्ध परिस्थिति में मौत के मामले में विशेष अदालत के सात जुलाई, 2022 के आदेश पर रोक लगाते हुए पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कर्मवीर सिंह, तत्कालीन अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) विजय कुमार गुप्ता और अन्य को बड़ी राहत दी है।उच्‍च न्‍यायालय ने डॉ. सचान की जेल में मौत के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत द्वारा बतौर अभियुक्त तलब किए गए तत्कालीन डीजीपी कर्मवीर सिंह, तत्कालीन अपर डीजीपी विजय कुमार गुप्ता एवं तत्कालीन जेलर भीमसेन मुकुंद के खिलाफ गत सात जुलाई को जारी तलबी आदेश पर रोक लगा दी है।अदालत ने डॉ. सचान की पत्नी मालती सचान को नोटिस जारी कर उनको इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट, सीबीआई के सात जुलाई के आदेश पर अंतरिम रोक केवल याचिकाकर्ताओं के लिए रहेगी।न्यायमूर्ति ए के श्रीवास्तव की पीठ ने उपरोक्त तीनों पूर्व अधिकारियों की ओर से अलग-अलग दाखिल याचिकाओं पर यह आदेश दिया। आदेश सोमवार को जारी किया गया। पीठ ने अपने आदेश में सीबीआई के अधिवक्ता अनुराग कुमार सिंह की दलील को आधार बनाया, जिसमें उन्होंने कहा था सीबीआई ने मामले की बारीकी से जांच की थी और डॉ. सचान की मृत्यु को आत्महत्या पाए जाने के बाद ही क्लोजर रिपोर्ट लगाई गई थी।याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि मामले में सीबीआई जांच कर चुकी थी और डॉ. सचान की मृत्यु को आत्महत्या पाते हुए क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल की गई थी। यह भी दलील दी गई कि सरकारी अधिकारी होने के कारण याचिकाकर्ताओं को तलब किए जाने से पूर्व शासन से संस्तुति प्राप्त करना अनिवार्य था।उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सचान कथित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) घोटाले में मुख्य आरोपी थे। यह घोटाला स्वास्थ्य केंद्रों को उन्नत करने के मद में जारी करोड़ों रुपये का गबन से संबंधित है। डॉ. सचान एनआरएचएम घोटाला मामले में न्यायिक हिरासत में थे और 22 जून 2011 को लखनऊ जेल में संदिग्ध परिस्थिति में उनकी मौत हो गई थी।यहां की एक अदालत ने पूर्व डीजीपी सिंह, तत्कालीन एडीजी गुप्ता, तत्कालीन लखनऊ जेल के जेलर भीम सेन मुकुंद को एक दशक पहले जेल में डॉ.सचान को मारने की साजिश रचने के आरोप में मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया था।उनकी मौत के सिलसिले में 26 जून, 2011 को अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ थाना गोसाईगंज में प्राथमिकी दर्ज हुई थी. इसके बाद डॉ सचान की मौत की न्यायिक जांच शुरू हुई। 11 जुलाई 2011 को न्यायिक जांच रिपोर्ट में डॉ सचान की मौत को हत्या करार दिया गया। 14 जुलाई, 2011 को उच्‍च न्‍यायालय ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी।27 सितंबर, 2012 को सीबीआई ने जांच के बाद डॉ सचान की मौत को आत्महत्या करार देते हुए अंतिम रिपोर्ट दाखिल किया।डॉ.सचान की पत्नी मालती सचान ने सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट को चुनौती दी. सीबीआई की विशेष अदालत ने उनकी अर्जी स्वीकार करते हुए सीबीआई को अतिरिक्त कार्रवाई का आदेश दिया. नौ अगस्त, 2017 को सीबीआई ने फिर से अंतिम रिपोर्ट दाखिल किया। 19 नवंबर, 2019 को सीबीआई अदालत ने इसे भी खारिज कर दिया और मालती सचान की अर्जी को परिवाद के रूप में दर्ज किया।मालती सचान ने अदालत में न्यायिक जांच रिपोर्ट के अलावा पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल एक्सपर्ट ओपिनियन और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने वाले डॉक्टरों के बयान के साथ ही सीबीआई द्वारा दर्ज बयानों का भी हवाला दिया। सात जुलाई 2022 को सीबीआई अदालत ने डॉ सचान की मृत्यु को हत्या का मामला मानते हुए, तत्कालीन डीजीपी सिंह, तत्कालीन एडीजीपी गुप्ता एवं लखनऊ जोन के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) सुबेश कुमार सिंह समेत लखनऊ जेल के तत्कालीन जेलर बीएस मुकुंद, डिप्टी जेलर सुनील कुमार सिंह, प्रधान बंदीरक्षक बाबू राम दूबे और बंदीरक्षक फहींद्र सिंह को हाजिर होने का आदेश दिया था।

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medical college suicide case

06.08.2022
इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट सुसाइड केस में पुलिस पैटर्न लॉक नहीं खोल पा रही है। सायबर एक्सपर्ट भी उसका लॉक खोलने में सफल नहीं हो सके। एसआईटी ने सुसाइड करने वाले स्टूडेंट का मोबाइल जब्त कर भोपाल स्थित सायबर ऑफिस भेजा था। पैटर्न लॉक नहीं खुलने से पुलिस को जांच की दिशा नहीं मिल पा रही है। इधर, ग्रामीण आईजी द्वारा बनाई गई एसआईटी में से डीसीपी का ट्रांसफर होने से भी जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। इस मामले में पकड़ाए दो छात्रों को भी कोर्ट से जमानत मिल गई है।
चेतन पाटीदार (22 वर्ष) पुत्र दिनेश पाटीदार निवासी ग्राम मौलाना जिला उज्जैन ने 31 मार्च को फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी। इस मामले में परिवार ने कालेज के डीन डॉ. जीएस पटेल और तृतीय वर्ष के दो छात्रों रोमिल सिंह व दुर्गेश हाड़ा, होशांक वर्मा और अर्पित हाड़ा पर आरोप लगाए थे। पुलिस ने इसमें से डीन डॉ. पटेल और रोमिल व दुर्गेश हाड़ा को आरोपी बनाकर केस दर्ज किया था। दोनों छात्रों की गिरफ्तारी हो गई थी। लेकिन डीन डॉ. जीएस पटेल को सबूत के अभाव में पूरे मामले की जांच करने पर गिरफ्तार करने की बात कही गई थी।

भोपाल में सायबर एक्सपर्ट नहीं खोल पाए पैटर्न लॉक
इंदौर से एसआईटी की टीम में एडिशनल डीसीपी शशिकांत कनकने, अनिल चौहान और राजीव त्रिपाठी मामले की जांच कर रहे थे। उन्होंने खुड़ैल पुलिस द्वारा जब्त चेतन का मोबाइल भोपाल सायबर ऑफिस भेजा था। यहां से भी मोबाइल बिना लॉक खुले वापस आ गया। एक्सर्ट उसका लॉक नहीं खोल पाए। इधर एसआईटी के एक अधिकारी अनिल चौहान का ट्रांसफर हो गया। जिसके कारण जांच रूक गई।

दोनों छात्रों को मिली जमानत
चेतन पाटीदार की मौत के मामले गिरफ्तार किये गए दोनों छात्र रोमिल और दुर्गेश को कोर्ट ने जमानत दे दी। परिवार के मुताबिक उनके दो बार एसआईटी की टीम ने बयान लिये हैं। अब मोबाइल बाहर के सायबर एक्सपर्ट के यहां भेजने की बात कही जा रही है।

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Ragging in medical colleges

मध्य प्रदेश के रतलाम में राजकीय मेडिकल कॉलेज के 7 छात्रों के खिलाफ रैगिंग के आऱोप में एफआईआर दर्ज की गई है. उन्हें एक साल के लिए कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया है. रैगिंग से जुड़ा वीडियो वायरल होने के बाद यह कार्रवाई की गई है. अधिकारी ने कहा कि घटना 28 जुलाई को हुई थी और एक दिन बाद सोशल मीडिया पर जूनियर छात्रों को लाइन में खड़ाकर थप्पड़ मारते हुए दिखाए जाने वाले वीडियो सामने आए थे. इंडस्ट्रियल सेक्टर पुलिस थाने के एएसआई सुरेश कुमार शिंदे ने बताया कि रतलाम मेडिकल कॉलेज के वार्डन डॉ. अनुराग जैन की लिखित शिकायत के आधार पर शनिवार रात को सात छात्रों के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 341 एवं 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने कहा कि आरोपी छात्रों पर कॉलेज के पुरूष छात्रावास में जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग का आरोप है.
कॉलेज के डीन डॉ. जीतेन्द्र गुप्ता ने बताया कि इन सातों छात्रों को कॉलेज से एक साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है. वीडियो में छात्र जूनियर को लाइन में खड़ा कर थप्पड़ मारते नजर आ रहे हैं, बाद में मौके पर पहुंचे वार्डन डॉ. जैन पर बोतले फेंकने की घटना भी हुई थी.वहीं मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के हलाली बांध में रविवार को करंट की चपेट में आने से एक 40 वर्षीय व्यक्ति की डूबने से मौत हो गई और दो अन्य लापता हो गए हैं.

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Murder case in hospital

कालवाड़ थाना पुलिस ने इलाके के चिरायु अस्पताल के डॉक्टर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया हैं। कोर्ट के आदेश पर डॉक्टर मनोज चौधरी के खिलाफ हत्या का केस किया गया। इस मामले की जांच सीआई कालवाड़ को दी गई है। जगदम्बा नगर झोटवाड़ा निवासी कृष्णकांत जांगिड थाने में रिपोर्ट देते हुए बताया कि उसकी 22 वर्षीय बहन निकिता जांगिड़ के बांए पैर की पिंडली में एक गांठ थी। ईलाज के लिए वह बहन को 26 अप्रैल को चिरायु अस्पताल लेकर गया। वहीं, इस मामले में डॉक्टर मनोज चौधरी का कहना है कि यह एफआईआर गलत तथ्यों के आधार पर दर्ज की गई है। मौत DIC नाम के कैंसर से हुई।पीड़ित ने बताया कि डॉक्टर मनोज चौधरी ने चैक करने के बाद कहा था कि यह सामान्य गांठ है। एक छोटा सा ऑपरेशन करके छुट्टी दे देंगे। उपचार के लिए एसएमएस के डॉक्टर दिनेश जिंदल आएंगे। जिस पर युवती को एडमिट कर लिया गया। 27 अप्रैल को बिना सर्जन डॉक्टर दिनेश जिंदल को बुलाए ही युवती का ऑपरेशन डॉक्टर मनोज चौधरी ने कर दिया। इस दौरान पैर की गलत नस कट गई। ज्यादा की खून बहने पर डॉक्टर मनोज चौधरी ने ऑपरेशन के बाद तीन यूनिट ब्लड मंगवाया। इसके बाद दो यूनिट ब्लड और चार यूनिट प्लाजमा भी मंगवाया। शाम को डॉक्टर मनोज चौधरी ने बताया कि निकिता की हालत सीरियस है। इसलिए वेन्टीलेटर पर ले लिया है।पूछताछ करने पर डॉक्टर मनोज चौधरी ने बताया कि गलती से इसकी ब्लड की नस कट जाने के कारण ब्लीडिंग ज्यादा हो गई। शरीर में ब्लड की कमी हो रही है। इसे बार- बार प्लाजमा और ब्लड दिया जा रहा है, इसलिए इसे वेन्टीवेटर पर लिया गया है। निकिता की तबीयत खराब होने पर उसे परिजन एसएमएस लेकर गए। जहां उपचार के दौरान निकिता की मौत हो गई।

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Monkeypox in Ghaziabad-Noida

28.07.2022
गाजियाबाद में मंकीपॉक्स के दो संदिग्ध केस मिले हैं। एक मरीज दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में भर्ती हुआ है। दूसरा मरीज गाजियाबाद के MMG हॉस्पिटल में पहुंचा है। ग्रेटर नोएडा की 47 वर्षीय महिला अध्यापक भी वहां के जिला अस्पताल में भर्ती हुई हैं। उनके मुंह और पूरे शरीर पर लाल रंग के दाने हैं। तीनों के सैंपल जांच के लिए पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी यानी NIV में भेज दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने तक तीनों संदिग्ध मरीज डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगे।

पूरे शरीर पर लाल रंग के दाने
गाजियाबाद के जिला सर्विलांस अधिकारी डॉक्टर आरके गुप्ता ने बताया, “28 वर्षीय युवक अर्थला का रहने वाला है और साहिबाबाद क्षेत्र की एक कंपनी में जॉब करता है। मंगलवार को वह MMG हॉस्पिटल की ओपीडी में आया। उसके शरीर पर कई जगह लाल रंग के दाने थे, जैसे मंकीपॉक्स में होते हैं। इसे मंकीपॉक्स का संदिग्ध मरीज मानते हुए सैंपल लिया गया है। इस सैंपल को जांच के लिए NIV भेजा गया है।”

लोकनायक में डॉक्टरों की निगरानी में मरीज
गाजियाबाद का दूसरा संदिग्ध मरीज दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में मंगलवार को भर्ती हुआ है। यह मरीज अस्पताल की इमरजेंसी में बुखार और त्वचा पर दाने के लक्षण के साथ आया था। फिलहाल उसको आइसोलेशन वार्ड में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। प्राथमिक जानकारी यह भी सामने आई है कि उक्त संदिग्ध मरीज 20 दिन पहले ही मुंबई से लौटा है। वह दो महीने पहले पेरिस भी गया था।

नोएडा में मंकीपॉक्स का कंट्रोल रूम बनाया गया
नोएडा के सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल की नई बिल्डिंग में मंकीपॉक्स को लेकर कंट्रोल रूम बना दिया गया है। यहां के नोडल अधिकारी डॉक्टर जीके मिश्रा से 9675322617 और सहायक दिनेश गौड़ से 9899965203 से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा मंकीपॉक्स के संदिग्ध मरीजों को भर्ती करने के लिए जिला अस्पताल में 20 बेड का आइसोलेशन वार्ड भी बना दिया गया है।

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Vigilance regarding monkeypox

26.07.2022
दिल्ली में मंकी पाक्स के एक केस मिलने से यहां भी स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मूड पर है। विभाग ने शहर में संचालित सभी निजी अस्पतालों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि विदेशों से यहां इलाज कराने आने वालों पर विशेष नजर रखें और यदि किसी में मंकी पॉक्स के लक्षण नजर आए ताे स्वास्थ्य विभाग को तत्काल जानकारी शेयर करें। स्वास्थ्य विभाग का यह भी कहना है कि इसका खतरा विदेशों से आने वालों पर है। ऐसे में शहरवासियों को पैनिक होने की जरूरत नहीं है। सिर्फ सतर्क रहने और सावधानी बरतने की जरूतर है।बता दें कि दिल्ली में 34 वर्षीय एक युवक में मंकी पॉक्स के लक्षण मिले हैं। उसका एलएनजेपी अस्पताल में इलाज चल रहा है। उक्त युवक की कोई विदेश टूर की हिस्ट्री नहीं है। बल्कि वह कार से एक महीने पहले 25जून को हिमाचल प्रदेश गया था। वहां नारकंडा में रुकने के बाद 27 जून को दिल्ली वापस लाैटा था। डिप्टी सीएमओ डॉ. रामभगत का कहना है कि ऐहतियात के तौर पर मंकी पॉक्स मरीजों के लिए अलग से वार्ड बनाने की तैयारी है। हालांकि अभी फरीदाबाद में कोई मरीज नहीं मिला है। उनका कहना है कि यहां के निजी अस्पतालों में विदेशों से मरीज इलाज कराने आते हैं। ऐसे में सभी निजी अस्पतालों को इस बारे में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मंकी पॉक्स को लेकर किसी को डरने की जरूरत नहीं है। यह कोरोना जैसे खतरनाक नहीं है। करीब 45 साल पहले लोगों को स्मॉल पॉक्स के टीके लगा करते थे। ऐसे में 45 साल से ऊपर वालों को कोई खतरा नहीं है।

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Physician,lawyer and teacher arrested in fake curreny case

11.07.2022

हरियाणा के हिसार में राजगुरु मार्केट से 2,56,100 रुपए के नकली नोट बरामदगी मामले में सीआईए ने तीन और युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों में दादरी, गौतमबुद्ध नगर, उत्तरप्रदेश निवासी पवन, शास्त्री पार्क बुराड़ी, दिल्ली निवासी विकास पटेल, नवनीत उर्फ नवी निवासी मुडखर, तलेली, जिला मंडी, हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। आरोपी पेश से वकील, ट्यूशन टीचर और फिजिशियन हैं। अपने पेशे के साथ-साथ वे नकली करंसी का धंधा भी करते थे। अब तक इस मामले में 5 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पहला आरोवी रविकांत और दूसरा समालखा निवासी अभय है।सीआईए हिसार प्रभारी निरीक्षक प्रहलाद राय ने प्रेस वार्ता में बताया कि पुलिस टीम ने नकली नोट मामले में समालखा पानीपत निवासी अभय को गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड पर लिया गया था। रिमांड के दौरान पुलिस टीम ने अभय की निशानदेयी पर संजोली, माल रोड, शिमला हिमाचल प्रदेश से नवनीत उर्फ नवी और शास्त्री पार्क, बुराड़ी दिल्ली निवासी विकास कुमार पटेल को गिरफ्तार किया। आरोपी नवनीत उर्फ नवी BA LLB पास है और मंडी अदालत में वकालत की प्रैक्टिस करता था, जोकि इसने करीब दो महीने पहले बंद कर दी थी। आरोपी के ऊपर कर्जा है।अपना कर्जा उतारने के लिए मोबाइल पर आसान व कम समय में पैसा कमाने के तरीके ढूंढता रहता था।

फेस बुक पर फेक करंसी का विज्ञापन देखा

आरोपी नवनीत उर्फ नवी में लगभग एक महीना पहले फेसबुक पर फेक करेंसी के नाम से विज्ञापन् देखा और वहां पोस्ट किए गए व्हाट्सएप नंबर पर मैसेज किया। इस पर नवनीत के पास उसी व्हाट्सएप पर बुराड़ी, दिल्ली निवासी विकास कुमार पटेल ने मैसेज भेज नवनीत को वीडियो कॉल पर नकली नोटों के सैंपल दिखाए और उसे समालखा पानीपत बुलाया।समालखा आने पर विकास कुमार ने नवनीत को 700 रुपए के नकली नोट दिखाए और दोनों की आपस में दोस्ती हो गई। विकास कुमार ने नवनीत से कहा कि समालखा में ज्यादा काम नहीं है तो नवनीत ने कहा कि शिमला पर्यटन स्थल है। बहुत सारे सैलानी पूरे भारत से यहां घूमने आते हैं। नकली नोटों का धंधा यहां आराम से चल जाएगा और पहाड़ी एरिया होने के कारण यहां पुलिस का भी डर नहीं है। नवनीत उर्फ नवी दोबारा फिर से समालखा,पानीपत विकास कुमार के कमरे पर गया, जहां विकास के साथ अभय, रविकांत किराए के कमरे में नकली नोट तैयार कर रहे थे।

2 लाख 35 हजार रुपए की कटिंग कर ली

सीआईए प्रभारी ने बताया कि इतनी आसानी से नकली नोटों के चलने पर आरोपियों ने 100 व 200 के करीब तीन चार लाख के नकली नोट तैयार कर किए, जिसमें करीब 2 लाख 35 हजार रुपए की कटिंग भी कर ली थी और बाकी की कटिंग करनी अभी बकाया थी। नवनीत उर्फ नवी द्वारा तैयार की गई फेस सोशल मीडिया आईडी को देख दिए गए व्हाट्सएप नंबर पर गौतम बुद्ध नगर निवासी पवन ने मैसेज कर चार लाख रुपये के नकली नोट की डिमांड की।नवनीत उर्फ नवी ने चार लाख रुपए के नकली करेंसी नोटों के बदले में आपके एक लाख पचास हजार रुपए के असली नोट मांगे। आठ जुलाई को विकास पटेल, पवन को नकली नोटों के सैंपल देकर आया और सैंपल पसंद आने पर कल नवनीत और विकास, पवन को कैथल में चार लाख में नकली करेंसी नोट देने वाले थे जिसमें से 2,34,000 रुपए के नकली करेंसी नोटों को कटिंग की जा चुकी थी और कुछ कटिंग बाकी थी। नवनीत और विकास की निशानदेयी पर पवन को कैथल से 4400 रुपये की नकली करेंसी नोट और I-10 गाड़ी सहित गिरफ्तार किया गया।

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Jaipuriya hospital superintendent filled a case against a clerk

09.07.2022
जयपुरिया अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. सुनीत सिंह राणावत ने महिला एलडीसी के पति के खिलाफ बजाज नगर थाने में मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया है। घटना एक अक्टूबर 2021 की बताई है। इस्तगासे से दर्ज मामले में बताया कि महिला कर्मचारी अक्सर कार्यालय में देरी से आती थी। नोटिस देकर देरी से आने का कारण पूछा गया तो उसने पति द्वारा मारपीट करने की बात कही। अधीक्षक ने इसकी शिकायत पुलिस को करने के लिए कहा। अगले दिन महिला का पति डॉ. राणावत के ऑफिस पहुंचा और उनके साथ मारपीट की। गौरतलब है कि उक्त मामले में महिला ने डॉ.राणावत पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। राज्य सरकार ने राणावत को अस्पताल अधीक्षक पद सहित राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार पद से भी हटा दिया था। मामले में गठित जांच कमेटी ने भी डॉ.राणावत को दोषी माना था।

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नीट पीजी काउंसलिंग और वकीलों की चांदी

मेडिकल पीजी की एक सीट करोड़ रुपये की मानी जाती है, सो साफ़ है कि हर सीट के लिए घमासान होता है, ब्रांच का लालच हो या पीजी का तमगा, ख़ास तो होता ही है, अगर इसके लिए पढाई के साथ कुछ क़ानूनी लड़ाई में पैसे खर्च हो जाएँ तो भी कम ही हैं | लगभग हर साल ही काउंसलिंग कोर्ट में घसीटी ही जाती है, कोर्ट यानी वकील, वकील यानि मोटी फीस, वो भी नकद में | हर वकील सोचता है कि डॉक्टरों के पास पैसों की क्या कमी ? सो तैयार रहते हैं, हालांकि सरकारी ग्रामीण भत्ताधारी चिकित्सकों के पास कहाँ पैसा है लेकिन वकील उनकी तुलना जयपुर के एसएमएस वाले मोटे डॉक्टरों से करते हैं, सो बेचारे सरकारी डॉक्टर चंदा चपाटी करके ये फीस चुकाते हैं | पिछले तीन साल में केस जयपुर से दिल्ली तक गए और फीस लाखों से करोड़ों तक गयी | इसी बीच जयपुर में कुछ युवा वकीलों ने मेडिकल लाइन में ही कैरियर बनाने कि ठानी और वे दिल्ली की सभी सुनवाइयों में खुद के खर्चे पर जाने लगे, मकसद यह दिखाना कि हम मेडिकल के केसों के जानकार हैं, पधारो म्हारे ऑफिस, कई कॉलेज वाले छात्र उनके यहाँ पधारने लगे | एक युवा वकीलन ने तो मेडिकल कॉलेज हॉस्टल के आस पास फ्रेशर ढूंढने कि कोशिश करी ताकि एक बार कैसे भी मामले को खुद के पैसे खर्च करके भी कोर्ट में पटक दिया जाए ताकि फिर एक बार माहौल बन जाए तो वो दिल्ली तक जाए, कैरियर भी बने और कैशियर भी | यानि जबरदस्ती शुरुआत की कोशिश की जा रही है जबकि राजस्थान में कोई किसी भी तरह का केस बनता ही नहीं, गिने चुने सेवारतों के काम चलाऊ नंबर आये हैं, फील्ड से ज्यादातर लोग कॉलेजों में जा चुके हैं, अब बचे ही बहुत कम हैं, जो हैं वे भी एक दो साल में ही आये हैं | अतः सावधान रहें, चांदी बचा कर रखें |

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Prevention of Hospital violence and damage to property act 2008

राजस्थान के किसी भी अस्पताल में अगर किसी भी स्टाफ के साथ कोई गलत घटना होती है और अस्पताल में किसी भी सामान को क्षति होती है तो इसके बचाव और कार्यवाही हेतु राज्य सरकार द्वारा अधिनियम 2008 लाया गया है | ऐसी घटना होने पर तुरंत पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया जाना चाहिए, मुकदमे में दो बातों का ख़ास उल्लेख होना चाहिए – अधिनियम 2008 और राजकार्य में बाधा |
अगर महिला स्टाफ के साथ कुछ गलत हुआ है तो उसके लिए अलग से उत्पीड़न की धाराओं के अंतर्गत कारवाई होगी |

अधिनियम संलग्न है
सैम्पल एफआईआर संलग्न है

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