delivery of cancer patient

इंदौर के डॉक्टरों ने आंतों के कैंसर से पीड़ित एक महिला की सफलतापूर्वक डिलीवरी कराई है। आंतों के कैंसर से पीड़ित महिला को डॉक्टर नियमित रूप से कीमोथैरेपी दे रहे हैं। दो घंटे चली इस सर्जरी में गर्भवती व नवजात दोनों की जान को खतरा बना हुआ था। डॉक्टरों ने इमरजेंसी दवाएं देने के साथ उसे स्टेबल कर उसकी सर्जरी की। डिलीवरी के बाद प्रसूता व नवजात दोनों ही स्वस्थ हैं।मामला इंदौर निवासी 26 वर्षीय महिला का है। उसे आंतों का कैंसर (Colorectal) है। अक्टूबर 2021 में इंदौर के ही एक प्राइवेट अस्पताल में कैंसर सर्जरी की गई। इसके बाद डॉक्टर ट्रीटमेंट के साथ नियमित रूप से कीमोथैरपी दे रहे थे।ट्रीटमेंट व कीमोथैरपी के दौरान प्रेग्नेंट हुई महिला के परिवार ने डिलीवरी कराने पर जोर दिया। इस बीच महिला को कैंसर के साथ तिल्ली बढ़ी होने तथा हाइपरटेंशन की समस्या हो गई। 18 जुलाई को महिला को परिजन इंदौर के ही एक अन्य प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी के लिए लेकर पहुंचे। उस दौरान उसके गर्भकाल के 37 हफ्ते पूरे हो चुके थे। यहां महिला को खून की उल्टियां होने के साथ प्लेट्लेट्स घटकर 40 हजार तक पहुंच गए जबकि सामान्यत: यह डेढ़ लाख होने चाहिए। इसके चलते उसकी डिलीवरी कराने में काफी रिस्क थी। इसमें महिला व नवजात दोनों की ही जान को खतरा था।ट्रीटमेंट कर रहे डॉ. ए. नैयर ने बताया कि आमतौर पर कैंसर पीड़ित महिलाओं के लिए सरोगेसी ही संतान सुख पाने का एकमात्र विकल्प होता है लेकिन दूसरी ओर कई प्रयोग भी चल रहे हैं। ऐसे में डॉ. नैयर, डॉ. अंजलि पाटिल, डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. खुशबू व अन्य ने कहा डिलीवरी को लेकर जितनी जटिलता थी, उसे इमरजेंसी ट्रीटमेंट के तहत एक-एक कर नियंत्रित किया। करीब 10 दिनों बाद जब उसकी स्थिति ठीक हुई तो 30 जुलाई को उसका ऑपरेशन किया गया। इस दौरान उसे एक यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाई गई। उस दौरान महिला व नवजात सीरियस भी रहे। इसके चलते दोनों को आईसीयू में रखा गया। सोमवार को दोनों को आईसीयू से वार्ड में रैफर किया गया। अब दोनों की हालत खतरे से बाहर है।

डॉक्टरों ने कहा था ऐसी स्थिति में गर्भधारण खतरे से खाली नहीं
कैंसर ट्रीटमेंट और कीमोथैरेपी के दौरान डॉक्टरों ने हिदायत दी कि ऐसी स्थिति में प्रेग्नेंसी अडॉप्ट नहीं करना चाहिए। यह खतरनाक हो सकता है। इससे महिला व नवजात दोनों की जान को खतरा होता है। डॉक्टरों ने दंपती से कहा था कि कीमोथेरेपी न सिर्फ बाल झड़ने या भूख घटने की वजह बनती है बल्कि गर्भधारण पर भी बुरा असर डालती है। ऐसे में महिला के गर्भवती होने पर उसकी और बच्चे की जान को बचाना डॅाक्टरों के लिए सबसे मुश्किल काम होता है।

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Again,breaky therapy started in hamidia hospital,Bhopal

05.07.2022
हमीदिया अस्पताल में कैंसर मरीजों के लिए एक बार फिर से ब्रेकी थेरेपी शुरू की जा रही है। इसके लिए यहां उपलब्ध मशीन का सोर्स 3 दिन पहले अपलोड कर दिया गया है। हमीदिया में 2001 में एचडीआर गामा मेक ब्रेकी थेरेपी मशीन लगाई गई थी। मशीन में लगाने वाला सोर्स भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर से आता है। सोर्स नहीं आने के कारण यह 2019 से बंद थी। हाल ही में शौच और उसके साथ लगने वाले दूसरे पार्ट लाए गए। सोर्स लोड होने के बाद अब ब्रेकी थेरेपी मशीन से कैंसर मरीजों की शिकायत के लिए तैयार है। जानकारों की माने तो 100 कैंसर मरीजों में से 30 मरीजों को इसकी जरूरत होती है। हमीदिया में शुरू होने वाली ब्रेकी थेरेपी लोगो के लिए वरदान साबित होगी, क्योंकि निजी अस्पताल में ब्रेकी थेरेपी के 15 से ₹20000 तक ले जाते हैं। वही सरकारी अस्पतालों की बात करें तो सिर्फ एम्स में ही यह सुविधा है, लेकिन अब हमीदिया में भी यह सुविधा निशुल्क मिलेगी। रेडियो थेरेपी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. एचयू गोरी ने कहा की ब्रेकी थेरेपी मशीन का सोर्स अपलोड हो गया है एक दिन में करीब 500 मरीजों की ब्रेकी थेरेपी दे पाएंगे।

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Reduce the no. of cancer patients in sms hospital

27.06.2022

भले ही देश में कैंसर तेजी से बढ़ रहा हो, लेकिन आंकड़ाें की मानें तो राजस्थान में कैंसर पिछले सालों की तुलना में आधा रह गया है। वर्ष 2015 में 290 बच्चों में कैंसर था वहीं 2021 में संख्या 137 रह गई। इसके पीछे कोविड बड़ा कारण रहा है, क्योंकि इस दौरान रजिस्ट्रेशन ही नहीं हुए। इधर, आंकड़ोें के उलट सिर्फ एसएमएस में एक साल में 4400 से अधिक बच्चे कैंसर का इलाज ले चुके हैं।यह कारण है:सरकार: 2015 में 290 बच्चों व 2021 में 137 बच्चों में कैंसर सच : एक साल में ही सिर्फ एसएमएस में 4400 का इलाजआंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते।
कोरोनाकाल में रजिस्ट्रेशन कम होने से राजस्थान में कैंसर के मरीजों की संख्या आधी हुई
कितने केस
वर्ष फिमेल बच्चियां मेल बच्चे कुल
2015 97 193 290
2016 101 176 277
2017 105 200 305
2018 67 177 244
2019 107 194 301
2020 59 131 190
2021 42 95 137

वर्ष 2020 और 2021 में कुल 327 बच्चों के इलाज का दावा किया जा रहा है, लेकिन एसएमएस के आंकड़े बताते हैं कि 2021 में ही चार हजार से अधिक बच्चे इलाज ले चुके।

केस 1 सवाईमाधोपुर निवासी आठ साल का रिदम। 8 महीने पहले तबीयत खराब हुई जांच में ब्लड कैंसर निकला। पिता विजय सेन ने दो महीने पहले एसएमएस में भर्ती कराया और इलाज जारी है। उनका कहना है कि करीब ड़ेढ महीने से अस्पताल में ही हैं। एक बहन है जो हर दिन इसका इंतजार करती है। इलाज पर तो खर्च नहीं हो रहा लेकिन पेट भरने, रहने के लिए पैसे तो चाहिए।

केस 2 सवाईमाधोपुर निवासी आठ साल का रिदम। 8 महीने पहले तबीयत खराब हुई जांच में ब्लड कैंसर निकला। पिता विजय सेन ने दो महीने पहले एसएमएस में भर्ती कराया और इलाज जारी है। उनका कहना है कि करीब ड़ेढ महीने से अस्पताल में ही हैं। एक बहन है जो हर दिन इसका इंतजार करती है। इलाज पर तो खर्च नहीं हो रहा लेकिन पेट भरने, रहने के लिए पैसे तो चाहिए। आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते

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Dr. Shatrughan, a resident of Sakra village of Muzaffarpur, despite himself being a cancer patient, is rendering his service to other patients.

13.06.2022
जीवन में थोड़ी सी परेशानी से भी आदमी टूट जाता है और हार मान लेता है। लेकिन ऐसे घबराहट की स्थिति में भी नवादा के जाने-माने चिकित्सक डॉ. शत्रुघ्न सिंह परिचय देते हुए मरीजों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। 2 माह पहले उन्हें अपने कैंसर का पता लगा, जिस लिए उन्हें कीमोथेरेपी के लिए लगातार 15 दिन तक जरूरत पड़ेगी, उनका इलाज पटना व मुंबई के डॉक्टरों द्वारा चल रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी वह अपने मरीजों से जुड़े हैं। हर रोज करीबन 25 मरीजों का राज कर रहे हैं। जीवन के प्रतिकूल स्थिति में भी उनके साहसपूर्ण कार्य के लिए उनके चाहने वालों के अलावा भी चिकित्सकगण उनकी तारीफ कर रहे हैं। डॉ. शत्रुघ्न का नवादा जिले से 47 से जुड़ाव है। डॉ. शत्रुघ्न 25 फ़ीसदी मरीजों के इलाज मुफ्त में करते हैं इसलिए जिले के लोग उन्हें अच्छी तरह जानते पहचानते हैं। उनका यहां के लोगों से एक आत्मीय लगाव है।

This happened for the first time in history, every patient got rid of cancer in drug trial

10.06.2022
कैंसर आज भी दुनिया के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। मेडिकल साइंस हर दिन नए चमत्कार कर रहा है। इसी बीच एक ऐसी दवा का ट्रायल किया गया है जिससे हर मरीज को कैंसर से छुटकारा मिला है। मलाशय के कैंसर यानी रेक्टल कैंसर के इलाज के लिए एक दवा की शुरुआती ट्रायल में शामिल किए गए 18 मरीजों को बीमारी से छुटकारा मिला है।न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक बहुत ही छोटे नैदानिक परीक्षण (क्लीनिकल ट्रायल) में 18 रोगियों ने लगभग छह महीने तक डॉस्टरलिमेब नामक दवा ली और अंत में, उनमें से प्रत्येक ने अपने ट्यूमर को गायब होते देखा।डॉस्टरलिमेब प्रयोगशाला द्वारा निर्मित अणुओं वाली एक दवा है, जो मानव शरीर में स्थानापन्न एंटीबॉडी (सब्सीट्यूट एंटीबॉडी) के रूप में कार्य करती है। सभी 18 रेक्टल कैंसर रोगियों को एक ही दवा दी गई और उपचार के परिणामस्वरूप, सभी रोगियों में कैंसर पूरी तरह से समाप्त हो गया। शारीरिक परीक्षणों जैसे एंडोस्कोपी, पॉजिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी या पीईटी स्कैन या एमआरआई स्कैन में भी कैंसर का नामोनिशान नहीं मिला।न्यूयॉर्क के मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर के डॉ. लुइस ए डियाज जे ने कहा कि यह “कैंसर के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है”। डॉ डियाज अध्ययन लेखकों में से एक हैं। परीक्षण के दौरान, यह पता चला है कि रोगियों ने छह महीने तक हर तीन सप्ताह में दवा ली। विशेष रूप से, सभी मरीज अपने कैंसर के समान चरणों में थे। यह उनके मलाशय में था, लेकिन शरीर के अन्य अंगों में नहीं फैला था।

Vicious Santosh Gupta, who cheated 22 thousand in the name of treatment of a cancer patient in Bhopal, was caught by the police.

03.06.2022
समय-समय पर शातिर चोर पैसे ठगने के नए-नए तरीके अपनाते हैं। ऐसा ही मामला भोपाल में देखा गया, यहां पर कैंसर पीड़ित बच्ची के इलाज के नाम पर सोशल मीडिया का सहारा लेकर 22 हजार ठगने का मामला आया है, लोगों को इसी तरह से फंसाने वाले एक 12वीं फेल साइबर ठग को भोपाल पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पेशे से कबाड़ी यह ठग IPS सचिन अतुलकर के नाम से झूठी आईडी बनाकर मदद मांग रहा था। इस मामले में पुलिस को शिकायत मिली थी। वह इसी तरह कई लोगों काे ठग चुका है।

World Cancer Day 2022: Why this year’s theme is ‘Close the Care Gap’

विषय का उद्देश्य कैंसर देखभाल और रोकथाम में व्यापक अंतर के बारे में जागरूकता बढ़ाना है जिसका समाज के विभिन्न वर्गों के लोग लाभ उठा सकते हैं

विश्व कैंसर दिवस हर साल 4 फरवरी को दुनिया भर में घातक बीमारी और इसके लक्षणों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। यह दिन रोग से पीड़ित सभी व्यक्तियों के लिए त्वरित कार्रवाई और जीवन रक्षक उपचार और देखभाल के लिए प्रेरित करने का भी प्रयास करता है। इस अंतर्राष्ट्रीय जागरूकता दिवस का नेतृत्व यूनियन फॉर इंटरनेशनल कैंसर कंट्रोल (UICC) द्वारा किया जाता है।

जागरूकता बढ़ाने के अलावा, यह विशेष दिन कैंसर से होने वाली मौतों को रोकने और रोगियों के लिए हर संभव उपचार प्रदान करने के लिए मिलकर काम करने के बारे में भी है।

हर साल, कैंसर लगभग 10 मिलियन लोगों की जान लेता है। मरने वालों में लगभग 70 प्रतिशत 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के हैं।

थीम:

इस वर्ष विश्व कैंसर दिवस की थीम “क्लोज द केयर गैप” है। विषय का उद्देश्य कैंसर देखभाल और रोकथाम में व्यापक अंतर के बारे में जागरूकता बढ़ाना है जिसका लाभ समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उठा सकते हैं। कम आय वाले, शैक्षिक योग्यता की कमी और विकलांग लोगों को कैंसर की देखभाल करने में काफी बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

ट्रांसजेंडर आबादी और शरणार्थी कुछ ऐसे समूह हैं जो अक्सर उचित उपचार प्राप्त करने में असमर्थ होते हैं जब तक कि उनका कैंसर एक उन्नत चरण तक नहीं पहुंच जाता। कैंसर के लिए स्वास्थ्य देखभाल विकल्पों का लाभ उठाने में भी दौड़ एक महत्वपूर्ण कारक है। यूआईसीसी के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के लिए पांच साल की जीवित रहने की दर सफेद महिलाओं के लिए 71 प्रतिशत और काले महिलाओं के लिए 58 प्रतिशत है।

रिपोर्ट के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों में 90 प्रतिशत से अधिक मध्यम और निम्न आय वाले देशों में होती हैं।

इतिहास और महत्व:

विश्व कैंसर दिवस की शुरुआत वर्ष 2000 में हुई थी, जब संघ इतिहास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का सामना करने के लिए सभी को एकजुट करने के लिए एक सकारात्मक आंदोलन लेकर आया था।

दिन का जन्म 4 फरवरी को पेरिस में न्यू मिलेनियम के लिए कैंसर के खिलाफ विश्व शिखर सम्मेलन में हुआ था। यूआईसीसी का उद्देश्य अनुसंधान को बढ़ावा देना, जागरूकता बढ़ाना, रोगी सेवाओं में सुधार करना, कैंसर को रोकना और वैश्विक समुदाय को अपने अभियान में प्रगति करने के लिए प्रेरित करना है।

दिवस कैसे मनाया जाता है?

इस दिन को मनाते हुए, समुदाय और संगठन हर साल कई गतिविधियों और कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं ताकि लोगों को कैंसर के वैश्विक प्रभाव को कम करने में उनकी भूमिका की याद दिलाई जा सके। हालांकि, महामारी के कारण यह आयोजन वर्चुअल हो गया है और लोग इसे ऑनलाइन सेलिब्रेट कर रहे हैं।

गुटखा गोगो की दर्दनाक अमर कहानी

गुटखा गोगो जी कैंसर से चल बसे

श्रृद्धांजलि (RIP) 😞

शहर भर का दुःख समेटकर, असीम पीड़ा के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि क्राइम-मास्टर गोगो के लाडले पुत्र ‘गुटखा गोगो’ का, वर्षों तक दबाकर गुटखे चबाने, बीड़ी फूंकने और शराब सेवन के बाद कैंसर से कल की सर्द रात में देहांत हो गया है |
ये अपने पीछे गुटखा चबाता, सिगरेट फूंकता और बिलखता परिवार छोड़ कर गए हैं 😏

उनके कहे अंतिम शब्द “गुटखा-बीड़ी-सिगरेट का उपयोग ना करें, गुटखा गोगो नहीं बनें” !

बिलखते पिता : काश मैंने समय रहते बेटे की आदतों को सुधारा होता

#GutkhaGoGo #SBCC #नशा_मुक्त_राजस्थान

Full story of fictional character Gutkha GoGo is given below…
Poster series –

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अगर आप गुटखा बीड़ी सिगरेट जैसे किसी भी नशे का इस्तेमाल करते हैं और इस से छुटकारा पाना चाहते हैं तो यह आसान विधि अपनावें –

This is a work of fiction. Names, characters and incidents are products of the author’s imagination and used in a fictitious manner. Any resemblance to actual persons, living or dead, or actual events is purely coincidental. If anyone feel distressed with any content please mail us, we will remove that in next 24 Hours. Images source is Google.

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सिगरेट गुटखा से छुटकारा कैसे पावें ?

Smoking is injurious to healthSmoking leads to poor health outcomes and is has a statutory warning printed on all cigarette packs. But yet people smoke. Most people associate smoking to lung cancer etc.

“At least three times every day take a moment and ask yourself what is really important. Have the wisdom and the courage to build your life around your answer.”

सिगरेट गुटखा आदि व्यसन धीरे धीरे आदमी को अपने चंगुल में ले लेते हैं, पता नहीं चलता कब उसका शौक उसकी आदत बनके अंततः लत बन जाता है, जो की उसके स्वयं के लिए शारीरिक, आर्थिक और मानसिक रूप से भारी पड़ता है और उसके परिवार को भी नुकसान उठाना पड़ता है |
तो क्या इन व्यसनों से छुटकारा पाना असंभव है ? तो जवाब है – बिल्कुल नहीं |

थोड़ी सी मेहनत से इनसे पीछा छुड़ाया जा सकता है, जानने के लिए यह विडियो देखें –

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