Diarrhoea in bhilai

भिलाई के स्मृति नगर स्थित स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के हॉस्टल में फैला डायरिया जानलेवा होने लगा है। उल्टी-दस्त से पीड़ित होने की वजह से रविवार को परिजन के साथ गृह जिले बालोद गई छात्रा ने वहीं दम तोड़ दिया है। 39 छात्र-छात्राओं को नजदीक के निजी अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा है।उनमें से 23 अब भी भर्ती हैं। डाक्टरों ने उनकी हालत फिलहाल सामान्य बताई है। छात्रा की मौत के बाद हेल्थ एंड फूड सेफ्टी की टीम ने जांच शुरू कर दी है। फूड एंड सेफ्टी टीम ने सोमवार को हॉस्टल का जायजा लिया और खाने-पीने के इंतजाम तथा हाईजीन पर फोकस किया है। टीम ने रिपोर्ट अभी अफसरों को नहीं सौंपी।जिस हॉस्टल में डायरिया फैला, उसका संचालन रस्तोगी नर्सिंग कॉलेज की समिति करती है। हॉस्टल में 625 छात्र-छात्राएं हैं, जिनका भोजन मेस में तैयार होता है। भिलाई-दुर्ग में हफ्तेभर पहले तक भारी बारिश हुई।डायरिया की शिकायत इसी दौर में शुरू हुई और चार-पांच दिन के भीतर छात्र-छात्राओं को उल्टी-दस्त के साथ-साथ तेज पेट दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किया जाने लगा। कामिनी नाम की जिस छात्रा ने बालोद में दम तोड़ा, वह भी अस्पताल में भर्ती थी। देखभाल के लिए परिजन उसे एक दिन पहले ही घर ले गए थे।

किचन में नाली का पानी, नमी में रखे फूड पैकेट और पीने का पानी वजह
1 मेस के किचन के पीछे निगम की गंदी नाली थी। बताया गया कि तेज बारिश में इसका पानी किचन में घुस गया था।

2 जिस जगह 6 सौ से ज्यादा बच्चों के फूड पैकेट रखे जाते हैं, वहां बारिश के कारण काफी नमी पाई गई।

3 निगम के पानी के बजाय अपने स्रोत का पानी उपयोग कर रहे हैं। इतने छात्रों के लिए केवल एक ही आरओ लगा है।

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Low cost technology of treatment

29.07.2022

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) रायपुर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई मिलकर इलाज की प्रभावी और कम लागत तकनीक विकसित करेंगे। इसके साथ ही IIT में नेत्र रोगियों और MRI के लिए विकसित की गई नई तकनीक को भी ट्रायल के लिए एम्स को प्रदान किया जाएगा। दोनों ने मिलकर अनुसंधान के लिए नए अवसर तलाशने के लिए MOU पर हस्ताक्षर किए हैं।एम्स के निदेशक डॉ. नितिन एम. नागरकर और IIT भिलाई के निदेशक प्रो. रजत मूना ने इस करार पर हस्ताक्षर किए हैं। बताया गया कि IIT ने नेत्र रोगियों और एमआरआई की लागत कम करने के लिए लगातार शोध के बाद नई तकनीक और उपकरणों का विकास किया है। इसे ट्रायल के लिए एम्स को हस्तांरित किया जा सकता है।प्रो. नागरकर का कहना था कि दोनों संस्थानों के शिक्षक मिलकर संयुक्त अनुसंधान प्रारंभ कर सकते हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में सदैव नई तकनीक की जरूरत रहती है जिसे IIT के इंजीनियर पूरा कर सकते हैं। इसी दिशा में यह कदम उठाया गया है।IIT के निदेशक प्रो. रजत मूना ने बताया कि IIT में 10 से अधिक स्टार्टअप हैं जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के लिए अपनी तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान की है। इनमें नेत्रों की ज्योति को परखने के लिए एक नई मशीन भी बनाई गई है जो काफी कम लागत पर जांच कर सकती है। एमआरआई की लागत कम करने के लिए भी शोध किया गया है जिसका लाभ सभी वर्ग को मिल सकेगा।इस अवसर पर IIT भिलाई ने मेडिकल छात्रों के लिए नई तकनीक पर एक कोर्स भी शुरू करने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा संस्थान और तकनीकी संस्थान के मध्य यह अपने तरह का पहला MOU है जो प्रदेश के लिए नई राह खोल सकता है।

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