सेवारत चिकित्सकों की एसीआर आईपीआर का ब्यौरा जारी – बाबूराज को फटका

Jaipur (Rajasthan) October 2019

सेवारत चिकित्सकों को प्रतिवर्ष वार्षिक प्रतिवेदन (ACR APR) और अचल संपत्ति विवरण (IPR) विभाग में भरकर देना होता है, वर्ष 2016 के बाद से ये ऑनलाइन भरे जाते हैं, पहले की स्थिति में ऑफलाइन सिस्टम था ।

पदोन्नति के लिए चिकित्सकों को प्रत्येक वर्ष का वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन (APR/ACR) एवं अचल संपत्ति विवरण (IPR) जमा करवाना होता है, लेकिन इस ACR और IPR का निदेशालय में कोई धणी-धोरी नहीं है, चिकित्सक अपना अपना रेकॉर्ड समय से भेज भी दें तो यह रास्ते मे पता नहीं कहाँ कहाँ अटक जाता है, और इस अनुभाग में पहुंच भी जाये तो दांयी से बांयी टेबल पर नहीं आता, वहां भी कमियां निकाल कर पटक दिया जाता है, भोग की आस में । चिकित्सक तो ये सोचकर आराम से बैठे होते हैं कि उनका रेकॉर्ड तो पहुंच गया है, और 1 अप्रैल को उनकी पदोन्नति हो जाएगी, उन्हें क्या पता कि किस बिल और भोलाराम के जीव में अटक रखा है उनका रिकॉर्ड ।

2019 मई माह में डीओपी द्वारा पदोन्नति किये जाने वाले चिकित्सकों का रिकॉर्ड मांगे जाने पर निदेशालय के बाबूराज द्वारा आधा अधूरा रिकॉर्ड पकड़ा दिया जाता है, कायदे से रिकॉर्ड देने से पहले आंकड़े सार्वजनिक किए जाते हैं कि किसका कौनसा रेकॉर्ड बकाया है ताकि वो अपना अटका रिकॉर्ड निकलवा सके और कुछ बकाया हो तो जमा करवा सके । लेकिन बिना सूचित किये ही अधकचरे को आगे भिजवाया गया और 15 जून 2019 को जारी हुई लिस्ट में 1700 में से करीब 600 की ही पदोन्नति की गई, इसमें भी सीनियरिटी का ध्यान नहीं रखा गया है, चार ACR वाले का नाम है लेकिन सैंकड़ों ऐसों का नाम नहीं है जिनकी पूरी 6 जमा थी, यानी भयंकर गफलत हुई है जिससे राज्य के हजार चिकित्सक तनाव में हैं ।

एक सरकारी चिकित्सक सैंकड़ों किलोमीटर यात्रा करके निदेशालय में मात्र इसलिए जाता है कि उसे यह पता लगे की उसकी कौनसी ACR or IPR बकाया है, वह चिकित्सक वहां जाकर बाबूराज से मिन्नतें करता हुआ दिखता है, घूस वाली चाय भी पिलाता है । ऐसी स्थिति में सरकारी डॉक्टर द्वारा श्रीमान एसीएस महोदय को इस भयावह स्थिति से अवगत करवाया, साथ ही अरिसदा द्वारा भी सहयोग दिया गया तो एसीएस महोदय ने कई ऑनलाइन सहूलियतें देने की हामी भरी जिनमें से एक था ACR IPR का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करना, यह ब्यौरा सार्वजनिक किया गया है, नीचे संलग्न है ।

  • ऑनलाइन की स्थिति में जिनका ACR स्टेटस Initiated हैं, यानि इनकी ACR इनके राजकाज खाते में अनछुई पड़ी है इसे फटाफट से भरकर सबमिट करें, आगे कहीं पेंडिंग है तो उसके लिए जिम्मेदार सम्बंधित अधिकारी हैं ।

बाकी जिनकी ACR IPR बकाया है वे जल्द से जल्द इसकी पूर्ती करावें क्यूंकि एसीएस महोदय के आदेशों से जल्द ही DACP होने जा रही है ।

IMMOVABLE PROPERTY REPORT (IPR) ONLINE STATUS ON DOP WEBSITE –

ANNUAL PERFORMANCE APPRAISAL REPORTS FILLING AUTHORITIES (NEW) –

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राजमेडिकोन 2019 : चिकित्सक संगम, आयोजन और विवाद, पूरी कहानी

राज-मेडिकोन 2019, आइएमए और अरिसदा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चिकित्सक महासंगम का आयोजन 29-30 जून को जयपुर के बिड़ला ऑडीटोरियम में हुआ । आयोजन एतिहासिक था, जिसमें करीब 2500 चिकित्सकों ने हिस्सा लिया, इन चिकित्सकों में प्राइवेट और सरकारी दोनों तरह के थे, चूँकि यह अरिसदा का पहला अधिकारिक संगम भी था । दो दिन के आयोजन में बहुत सी सेलेब्रिटीज और चिकित्सा जगत के नामी जनों के सेशन्स थे जिनका चिकित्सकों ने भरपूर आनंद लिया, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया ऑनलाइन एवं ऑफलाइन थी, नाश्ते, खाने का आयोजन बहुत ही शानदार बताया गया (बटरचिकन नहीं था), हालांकि ड्रिंक्स के दो कूपन मिलने पर चिकित्सक चर्चा करते देखे गये कि इनका क्या उद्देश्य है, साथ ही रेजिडेंट डॉक्टरों को ड्रिंक्स कूपन नहीं मिलने कि चर्चा एवं शिकायत गलियारों में रही । चिकित्सकों ने आयोजन को सराहा और भविष्य में ऐसे आयोजन चिकित्सक एकता की दिशा में करते रहने की आवश्यकता जताई । सरकारी डॉक्टरों के लिए आयोजन में भाग लेने को ड्यूटी माने जाने के आदेश विभाग की तरफ से जारी किये गए, जिससे चिकित्सकों में उत्साह दिखा । एक प्राइवेट लेब कि तरफ से चिकित्सकों कि लिपिड और डायबिटीज प्रोफाइल मुफ्त में जाँची जा रही थी जिसकी रिपोर्ट देखकर भी कई चिकित्सक माथा और पेट पकड़े हुए, सुबह उठकर दौड़ने का प्लान बना रहे हैं ।

कार्यक्रम की आयोजन कमेटी

रजिस्ट्रेशन फीस

साथ ही गारंटी ली गयी थी कि अगर मजा नहीं आये तो पूरा पैसा वापस दिया जायेगा, कुछ चिकित्सकों का कहना है, उन्हें उतना मजा नहीं आया, वे कूपन लेकर डोल रहे हैं, सो अब वे इस गारंटी को भुनाने के प्रयास जल्द ही आयोजनकर्ताओं से मिलकर करेंगे ।

कार्यक्रम का अजेंडा और सेशन

अवार्ड्स

निम्न केटेगरीज में करीब सौ से ज्यादा अवार्ड थे, जिनमें से कई चयन विवादित रहे, नजदीकीवाद दिखा ।

विवाद

निश्चित रूप से इतना बड़ा आयोजन होता है तो कुछ न कुछ छोटा मोटा विवाद से नाता हो ही जाता है लेकिन दैनिक भास्कर के फ्रंट पेज पर न्यूज छप जाने के बाद अंदर कि बातें सार्वजनिक हुई, पहले दिन मंत्रीजी के आंकड़ों के बारे में खबर छपी तो दुसरे दिन मारपीट और बाबा की खबर । बिना फाइनेंस कमेटी और ट्रेजरार कमेटी के आयोजन पर भी कई सवाल अंत में हुई जीबीएम में खड़े हुए, आइएमए सचिव डॉ. जैन शरीर का ताप बढ़ जाने के कारण, समापन जीबीएम में अनुपस्थित रहे । कुछ आइएमए के वरिष्ठ भी साइडलाइन किये जाने से चुपचाप दिखे |

विवाद 1. बेटी-सालीवाद

निश्चित रूप से आयोजनकर्ता का हस्तक्षेप आयोजन प्रक्रिया, अवार्ड्स, सेशन्स, सेलेब्रिटी चयन में रहता है लेकिन उन्हें इस तरह कि स्थिति से जितना हो सके बचना चाहिए, लेकिन जैन शाहब बच नहीं पाए, सपरिवार महामहिम पूर्व राष्ट्रपति के साथ फोटो खिंचवाने, खुद की बेटी जो कि मुंबई में चिकित्सक है उस से महामहिम को स्वागत बुके भेंट करवाने को लेकर सयानों में चर्चा रही लेकिन सबसे अजीब और विकट स्थिति तब उत्पन्न हुई जब शाहब कि साली शाहीबा जो कि एक आरएएस अधिकारी हैं, भ्रष्टाचार में एसीबी में रंगे हाथ पकड़ी गयी थी, अभी सस्पेंड चल रही हैं, उनसे राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री रोहित कुमार सिंह को स्वागत बुके भेंट करवा दिया गया, घटना से चिकित्सक सतब्ध रह गये लेकिन डायस पर पूर्व राष्ट्रपति के होने के कारण चुप्पी साध गए, सयानों का कहना है कि सस्पेंड साली को इस आयोजन से दूर रखा जाना चाहिए था, उसकी फेसवेल्यु बढाने के लिए इस आयोजन का इस्तेमाल न किया जाए, आयोजन के दो दिन पहले राज्य के एक बड़े मीडिया हाउस ने इसका खुलासा भी कर दिया था कि एक भ्रष्ट अधिकारी राजमेडिकोन में अहम रोल अदा कर रही है, तत्पश्चात आयोजकों ने कहा था कि वे इस अधिकारी से किनारा करेंगे लेकिन ऐन मौके पर बेटीसालिवाद फैलाया गया जिस मुद्दे पर शाम 7 बजे के करीब ऑडीटोरियम की सीढ़ियों पर आयोजकों एवं कुछ चिकित्सकों में तनातनी हुई, तत्पश्चात ड्रिंक काउंटर बंद कर दिए गए तो कई चिकित्सकों ने विरोध दर्ज किया, आयोजक बिगड़ते माहौल को देख गाड़ी में भागने लगे तो कुछ लोगों ने गाड़ी को जाने नहीं दिया, लेकिन अरिसदा अध्यक्ष और आईएमए के सयानों के हस्तक्षेप से श्री जैन रवाना हुए और काउंटर, खाना आदि चले, आधी रात तक ।

विवाद 2. बाबावाद

अक्षरधाम अहमदाबाद में बाबा ज्ञानवत्सल जी का मोटिवेशन एवं टेंशनमुक्ति पर सेशन था, पूरा सभागार खचाखच था, अचानक बड़े ही रूड तरीके से अनाउंस किया गया कि आगे कि सात रो से सभी महिला चिकित्सकों को हटाकर पीछे भेज दिया जाए क्यूंकि बाबाजी का प्रोटोकोल है कि वे अपने से करीब दस मीटर तक किसी भी महिला कि उपस्थिति नहीं चाहते, इस अनाउंसमेंट से पूरा ऑडिटोरियम सकते में आ गया, चिकित्सक महिला हो जा पुरुष कैसा भेद ? जब चिकित्सक ही किसी के साथ भेद नहीं करते तो उनके साथ क्यूँ ? वो भी एलाईट डॉक्टर समुदाय में । कई तर्क दिए जाने लगे कि, बाबा फ्लाईट या ट्रेन में नहीं जाते क्या या अपनी माँ से पैदा भी तो हुए हैं, डाउनलोड थोड़े ही हुए हैं । आयोजकों की समझाईस पर यह बात मान ली गयी कि आगे कि दो रो में कोई नहीं बैठेगा, पीछे सब समान तरीके से बैठेंगे, इसी बाबाजी स्टेज पर एक सेकंड से भी कम समय के लिए आये और चलते बने, जो कि फिर अगले दिन दैनिक भास्कर के मुख्य पेज पर आकर रुके । डेलिगेट्स ने आयोजकों के इस बाबा बुलावन को गलत ठहराया ।

“कुछ बड़ा करना हो तो अटैक करना सीखिए – राजस्थान कि महिला चिकित्सकों से”

विवादों को साइड में कर दें तो आयोजन बेहतरीन रहा, डॉ. वीके जैन का मुंबई से आया मेरा दोस्त वाला, डॉ. अजय चौधरी का जोशीला भाषण और डॉ. वशिष्ठ का बाबा पश्चात कंट्रोल डेमेज सेशन चर्चा में रहे ।

आशा है भविष्य में ऐसे आयोजन सादगी से बिना किसी विवाद के होंगें और चिकित्सा एकता एक अलग ऊंचाई पर जाएगी ।

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पीएमटी पास हैं यार.. घंटा ।

हम सब चिकित्सक वर्ग से हैं, आपस में सीनियर जूनियर साथी आदि सब हैं, एक दुसरे के काम भी आते हैं और आना भी चाहिए । एमसीआई का कोड ऑफ़ कंडक्ट कहता है कि एक डॉक्टर दूसरे डॉक्टर की फैमिली के इलाज के लिए पैसा नहीं ले सकता/लेना चाहिए । अधिकांश डॉक्टर साथियों के साथ अच्छी निभाते हैं चाहे वो अनजान ही क्यूँ ना हो, लेकिन कई बार ऐसी घटनाएं भी सामने आती हैं जब यारी दोस्ती कंडक्ट की ध्वजियाँ उड़ती हैं, इनकी चर्चा भी होती है । चर्चा चलनी भी चाहिए । जब बात युवा चिकित्सकों की युवाओं के साथ ही हो ।

एक सरकारी डॉक्टर है बेचारा, सरकारी डॉक्टर को चिकित्सक समाज में अदना ही माना गया है, गाँव का डॉक्टर सरकारी डॉक्टर । बेचारा सरकारी कहीं सैंकड़ों किलोमीटर दूर सेवा दे रहा है, पीछे से उसकी पत्नी बीमार पड़ती है जो गाँव में हैं, सरकारी उसे बताता है कि फलाने बॉस हैं शहर में उन्हें जाकर दिखा आओ, मैं उनको आठ दस साल से हाय हेलो करता हूँ, मैडम जाती हैं, दिखाती हैं, चलते समय पूछती हैं कि डॉक्टर शाहब फीस क्या दूं ? जवाब आता है कि “अपने हिसाब से देदो”, बेचारी बीए पास अपना हिसाब क्या समझे, इधर उधर देखती है तो एक दीवार पर A4 साइज के पेपर पर प्रिंट निकाल के चिपकाया हुआ है ‘फीस 200 रुपये मात्र’, सोचती है ये डॉक्टर शाहब तो अपने सरकारी जी के ख़ास हैं सो सौ रुपये का नोट बढ़ा देती है, शाहब उसे अपने गल्ले के हवाले कर बोलते हैं, अगला पेशेंट भेजो भाई । बेचारा सरकारी । एक दिन सरकारी के मामाजी बीमार पड़ते हैं, चूँकि मामाजी आम किसान हैं सो वो उनका ख़ास ख्याल रखता है बाकी सरकारी के पिताजी आदि तो चुपचाप माहौल के हिसाब से फीस की पर्ची कटवा इलाज करवाते आ रहे हैं, मामाजी पूछते हैं कि किसे दिखाऊं, सरकारी सोचता है किसी बैचमेट को ही दिखला देते हैं, चूँकि सात साल सीनियर तो अपने हिसाब से देदेने के लिए कहेगा, बैचमेट तो शायद मामाजी को मामाजी माने, कोई नहीं बोल दिया कि जाके कह देना सरकारी का किसान मामा हूँ, मामाजी से 200 वसूले गये, बात की तो जवाब मिला कि यार फोन करके बता दिया करो कि मामाजी आयेंगे, ठीक सा, करेंगे । फिर मामाजी को कोई तकलीफ हुई तो याद आया कि एक डॉक्टर शाहब हैं उनको दिखाना है, उन डॉक्टर शाहब से सरकारी कि काफी बातचीत होती थी, शाहब कि चिकित्सक पत्नी पीजी में बोनस चाहती थी और सरकारी बेचारा दिलवाने में जुटा था, यह तो घर का मामला है, फिर भी फोन कर देते हैं क्यूंकि अस्पताल के उत्तर कि गली में बैठने वाले डॉक्टरों को फोन पर बताना पड़ता है कि मामाजी आयेंगे, सो फोन कर दिया कि मामाजी आयेंगे, मामाजी गए, उठने लगे तो शाहब ने ही कह दिया कि फीस ? व्हेर इज फीस मामा ? मामा ने कहा कि सरकारी भांजे ने फोन किया था, शाहब ने यह कहते हुए कि ‘बहुत फोन आते हैं’, दुसरे मरीज को देखने लगे, मामाजी ने दो सौ बढाए और शाहब द्वारा लिखी बड़ी जांचें और एक्सरे आदि करवाने निकल पड़े जबकि उनके पास सात दिन पहले कि सभी जांच और एक्सरे था, चलो कोई ना, शाहब का अधिकार क्षेत्र । बात हुई निमडी ।

हाल ही में फिर मामाजी को कोई तकलीफ हुई तो सरकारी ने सोचा क्या करें, एक वरिष्ठ चिकित्सक को फोन किया “शाहब मैं सरकारी बोल रहा हूँ, मेरे मामाजी आयेंगे दिखाने, प्लीज फीस मत लेना”, शाहब ने डांट पिला दी कि तूने फीस का कैसे कहा ? हम इतने नालायक हैं क्या कि तेरे मामा से फीस लेंगे, आइंदा ऐसी बात मत कहना । शाहब को कैसे समझाता कि क्यूँ यह सब कहना पड़ा ।

सरकारी के पास जवाब नहीं है, आपके पास हो तो देदें ।

अरे हाँ, हम पीएमटी पास हैं, आईएऐसों पर भारी हैं हम । पीएमटी पास हैं यार ।

# नाम नहीं लिखे गये हैं ।
# फेसबुक पर नहीं डाला जा रहा है |
# जगह सीकर, राजस्थान है ।
# चिकित्सक यूनिटी जिंदाबाद ।

Medical Council of India Gazette notification for Rural area

नीट पीजी में प्रवेश हेतु सेवारत चिकित्सकों को बोनस अंकों का प्रावधान एमसीआई द्वारा किया गया है, संशय यह था कि किन इलाकों में कार्यरत चिकित्सकों को यह लाभ दिया जाए ? चूँकि संविधान के अनुसार हेल्थ एक स्टेट सब्जेक्ट है यानि सभी पालिसी स्टेट को बनानी होती हैं | हर स्टेट के अपने अलग क्राइटेरिया हैं | ज्यादातर जगहों को ग्रामीण, दुर्गम, दूरस्थ, पहाड़ी, ट्राइबल, रेगिस्तानी आदि इलाकों में विभाजित किया गया है | 2018 से पूर्व में एमसीआई ने केवल दुर्गम अथवा दूरस्थ इलाकों को ही बोनस अंक के योग्य माना था लेकिन 05.04.2018 के गैजेट नोटिफिकेशन में इसे ग्रामीण अथवा दुर्गम अथवा दूरस्थ कर दिया गया है | यानि जो भी ग्रामीण भत्ते के हक़दार हैं वे बोनस अंको के भी हक़दार हैं | ग्रामीण क्षेत्रों को परिभाषा राज्य के अधीन आती है जिसके अन्तर्गत आने वाले संस्थाओं को हर वर्ष नोटिफाई किया जाना होता है क्यूंकि कई जगह नए संस्थान खुल जाते हैं तथा कुछ संस्थान ग्रामीण की परिभाषा से बाहर भी हो सकते हैं |

What is Rural Area & Allowance in Rajasthan ?

MCI Rural Gazette notification attached below –

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जहर खरीदने के लिए पैसे नहीं, कैसे दूं वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में उपस्थिति ?

जहर खरीदने के लिए पैसे नहीं, कैसे दूं वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में उपस्थिति…. ये शब्द किसी आम इंसान के नहीं बल्कि एक चिकित्सा अधिकारी के हैं। जो जिला मुख्यालय पर आयोजित होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में उपस्थिति को लेकर आर्थिक समस्या का हवाला देते है।….जी हां जालौर जिले के करडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत चिकित्सक ने एक पत्र के माध्यम से सरकार को यह बात बताइ कि उन्हें पिछले कई महीनों से नहीं मिल रही तनख्वाह ।  जालौर जिले में रानीवाड़ा और भीनमाल ब्लॉक के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महकमे में कार्यरत कर्मचारियों एवं चिकित्सकों को वेतन समय पर नहीं मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि करड़ा में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी धनंजय मीणा ने सरकार को पत्र लिखकर अवांछनीय कदम उठाने की चेतावनी दे डाली… मामला जालौर जिले के करडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है जहां के चिकित्सक ने पिछले कई महीने से वेतन नहीं मिलने का हवाला देते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जालौर को पत्र लिखते हुए बताया कि वह जिला मुख्यालय पर होने वाले कार्यक्रमों में भाग नहीं ले सकते इसका कारण आर्थिक परेशानी बताया एवं अपने खाते का बैलेंस एक रूपया 77 पैसे बता रहे हैं और यह भी कह रहे हैं ।साथ में इतने पैसे से जहर भी नहीं खरीदा जा सकता चिकित्सा अधिकारी ने प्रतिलिपि राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम भी भेजा है। मामले को लेकर रानीवाड़ा के ब्लॉक सीएमएचओ ने बजट का हवाला देते हुए पत्र का जवाब भी दिया है देखा जाए तो वेतन नहीं मिलने के हालात करडा सीएचसी सहित रानीवाड़ा के व भीनमाल ब्लॉक के अधिकतर चिकित्सकों का वेतन पिछले कई महीने से देय नहीं हो रहा है ऐसे में इन कर्मचारियों एवं अधिकारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भीनमाल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धुम्बडिया के कर्मचारियों व अधिकारियों के भी ये ही हालात हैं जहां पिछले 3 महीने से उनको वेतन नहीं मिल रहा कर्मचारियों का कहना है कि जब भी भीनमाल ब्लॉक कार्यालय में वेतन संबंधी मांग की जाती है तो बजट का हवाला देकर टरका दिया जाता है… ऐसे ऐसे में अब देखने वाली बात होगी कि इन विकट आर्थिक परिस्थितियों से गुज़र रहे डॉक्टरों की माँग को लेकर सरकार कितनी गंभीर होगी और कितने दिनों में इनको सैलरी मिल पाएंगी ये आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी ….! डॉक्टर धनंजय मीणा ने बताया कि उसको सैलरी नहीं मिलने की वजह से कई प्रकार की घरेलु परेशानीयों का सामन करना पड़ रहा है। डॉक्टर ने बताया कि पैसों के अभाव में राशन के सामान के लिए भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है… डॉक्टर ने बताया कि मेरे पर्सनल लोन की किस्त भी ओवरडूयू हो चुकी है.. ऐसे में अब भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.. उन्होने बताया कि मैं घर से 500 किलोमीटर दूरी पर यहाँ पर बैठा हूँ ऐसे में मुझे सैलरी नहीं मिलेगी तो मैं खाना कैसे खाऊँगा…. डॉक्टर ने बताया कि उसके साथ साथ उसके अस्पताल में कार्यरत क़रीब स्टाफ़ भी पिछले दो महीने से सैलरी नहीं बन रही है जिसके चलते भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस तरह की गंभीर पीड़ा अगर सोशल मीडिया पर वायरल होती है तो ज़ाहिर सी बात है कि विभाग के आलाधिकारियों पर सवाल खड़े होना लाज़मी है… ।

# डॉ. धनंजय मीणा, कॉलेज के ज़माने से ही बेबाक और दबंग स्वभाव के लिए जाने जाते हैं, ये जयपुर के सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस हैं |

हम सब अधिकारियों और कर्मचारियों के हक की लड़ाई है ये कोई व्यक्तिगत दुश्मनी या बैर नही है ।हमारी लड़ाई राज से है अधिकारी और राज के प्रितिनिधि से है अतः इसे कोई व्यक्तिगत न ले।
जब पुलिस में वेतन महीने की अंतिम तारीख को मिल जाता है तो हमको क्यों नही क्या राज्य को हमारी जरूरत का पता नही है
हम भी आपातकालीन सेवा में है तो हमको सुविधा भी तो हो ,ओर कुछ नही तो वेतन तो समय पर मिले।
अगर सरकार के पास पैसा नही है तो फिर पुलिस और सेक्रेतिरेट में ओर मंत्रालयों में वेतन समय पर क्यों।
ऐसा नियम क्यों नही की जिलाधिकारी का वेतन जिले में प्रत्येक कर्मचारी का वेतन मिलने के बाद मिलेगा। ये ही मांग हैं कि वेतन समय पर मिले।
एकता सदा विजेयता। जय हिंद जय संगठन।।।।।।।।।सभी से सहयोग की आशा में।।।।

आपका
डॉ धनंजय मीणा 

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Impact of Tamilnadu High Court decision in Rajasthan about NEET PG bonus marks

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के गैजेट नोटिफिकेशन की अनुपालना में सेवारत चिकित्सकों को पीजी कोर्सेज में प्रवेश हेतु लगने वाली नीट परीक्षा में उनके प्राप्तांकों के प्रतिशत के रूप में बोनस अंक दिए जाते हैं | राजस्थान राज्य में कार्यरत सेवारत चिकित्सकों को 1 साल के 10% तथा अधिकतम 3 साल के 30% अंक बोनस के रूप में दिए जाते हैं | पिछले साल के मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के गैजेट नोटिफिकेशन के अनुसार सभी रूरल/ग्रामीण सेवारत चिकित्सकों को बोनस अंक का हक़ है, चूँकि राजस्थान ऐसा राज्य है जिसमें पहले से ही इलाकों को पहाड़ी, दुर्गम, दूरस्थ और ग्रामीण (Hilly/Difficult/Remote/Rural) में बांटने के बजाय केवल ग्रामीण क्षेत्र में ही बांटा गया है जिसका आधार केवल ग्रामीण भत्ते (Rural Allowance) को माना गया है यानी जिसे यह भत्ता देय है वह बोनस अंक का हकदार है |

देखा जाए तो यह एक बड़ी पालिसी है जो एमसीआई के गैजेट और  ग्रामीण भत्ते पर टिकी है, साथ ही पिछले सालों के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में भी इन दोनों को ही सही ठहराया गया है, ऐसी स्थिति में राजस्थान में 10-20-30 बना रहेगा, वो भी हर स्थिति में |

तमिलनाडु हाईकोर्ट की कमेटी ने किया बोनस अंक प्रक्रिया में बदलाव

What is Rural Allowance in Rajasthan ?

MCI “Rural” word Gazette Notification is here

नीट पीजी 2019 के रिजल्ट के बाद सेवारत चिकित्सकों में क्यों है सन्नाटा ?

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Prevention of Hospital violence and damage to property act 2008

राजस्थान के किसी भी अस्पताल में अगर किसी भी स्टाफ के साथ कोई गलत घटना होती है और अस्पताल में किसी भी सामान को क्षति होती है तो इसके बचाव और कार्यवाही हेतु राज्य सरकार द्वारा अधिनियम 2008 लाया गया है | ऐसी घटना होने पर तुरंत पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया जाना चाहिए, मुकदमे में दो बातों का ख़ास उल्लेख होना चाहिए – अधिनियम 2008 और राजकार्य में बाधा |
अगर महिला स्टाफ के साथ कुछ गलत हुआ है तो उसके लिए अलग से उत्पीड़न की धाराओं के अंतर्गत कारवाई होगी |

अधिनियम संलग्न है
सैम्पल एफआईआर संलग्न है

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हड़ताल अवधि की छुट्टियाँ होंगीं सेवारत कोटे के कार्यकाल में सम्मिलित

सेवारत चिकित्सकों की दिसंबर 2017 की हड़ताल पर चले जाने के कारण नए चिकित्सकों की सेवा अवधि गणना में बाधा उत्पन्न हो रही थी जिस हेतु अरिसदा की मांग पर गतवर्ष उक्त अवधि को EOL मानते हुए सेवा में माना गया था, परन्तु इस वर्ष यह समान बाधा उत्पन्न हो रही थी जिस हेतु सर्कार ने आदेश जारी करते हुए स्पस्ट कर दिया है कि आगे की सभी पीजी परीक्षाओं हेतु भी हड़ताल अवधि की गणना करी जाएगी |
यूनियन और सेवारत चिकित्सकों ने इसका स्वागत किया है |

अरिसदा ने दी नए चिकित्सा मंत्री को बधाई, किया स्वागत

चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा से मिलने सेवारत चिकित्सक संघ का प्रतिनिधिमंडल स्वास्थ्य भवन पहुंचा, जिसमें अरिस्दा प्रदेश अध्यक्ष डॉ.अजय चौधरी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ.लक्ष्मण ओला, डॉ.जगदीश मोदी, डॉ. बलवंत मंडा समेत कई सदस्यों ने मंत्री से मुलाकात की और उन्हें गुलदस्ता भेंट किया ।

8700 ग्रेड पे की कैपिंग वाले हड़ताली समझौते का पोस्टमार्टम

सरकार और चिकित्सकों के बीच हुए समझौते की हकीकत

वर्ष 2011 दिसम्बर में हुई एतिहासिक हड़ताल के बाद दवाब में आकर कांग्रेस सरकार ने कुछ समझौते किये जिन्हें लेकर चिकित्सक करीब सात वर्ष तक घूमते रहे लेकिन उनका पूर्ण किर्यांवन किया नहीं गया | इसी क्रम में फिर से चिकित्सक आक्रोशित हुए और वर्ष 2017 की अगस्त क्रांति और दिसम्बर की बड़ी हड़ताल के बाद तत्कालीन भाजपा सरकार ने फिर से समझौतों का पुलिंदा बाँध दिया, जिसके किर्यांवन के लिए चिकित्सक वापस से उसी हालात में हैं |

इसी बीच निदेशक जनस्वास्थ्य के एक आदेश (नीचे संलग्न है) से चिकित्सकों में शंका है कि 8700 ग्रेड पे की कैपिंग तो हट गयी थी तो यह लेटर कहाँ से आया ? यह तो समझौते की ध्वजियाँ उड़ रही हैं ? आप खुद समझौते और निदेशक के आदेश को दुबारा पढ़ें !

दिसम्बर 2017 समझौते के प्रथम बिंदु में ही डीएसीपी से संबंधित मुद्दे थे, जिसमें कहा गया था कि 18 वर्ष वाले तीसरे प्रमोशन (6-6-6) में कुल चिकित्सकों के 18% के बजाय सभी पात्र चिकित्सकों को डीएसीपी का लाभ दिलवाया* जायेगा |

* यहीं पेच है, समझौते में सरकार चालाकी बरत गयी, 18% की कैपिंग नहीं हटाई, बल्कि यह लिख दिया गया की शेष को भी वित्त विभाग से शिथिलन दिलवा देंगे |
* अपना कैडर करीब दस हजार चिकित्सकों का है यानि 18% के हिसाब से 1800 डॉक्टर ही 8700 ग्रेड में घुसे रह सकते हैं, अभी करीब 900 डॉक्टर इसमें घुसे हुए हैं, कुछ नए घुसेंगे और कुछ रिटायर होते रहेंगे, अगर देखा जाए तो अगले दस साल तो कोई दिक्कत नहीं आएगी लेकिन वर्ष 2005 के बाद भर्ती हुए चिकित्सक जब तीसरे प्रमोशन की उम्र तक पहुंचेंगे, उस वक़्त 8700 ग्रेड में 1800 लोग हो चुके होंगें और यह फुल हो चुका होगा, यानि बड़ी दिक्कत तभी आएगी (करीब वर्ष 2025 ) |

* मुद्दा 8700 की कैपिंग को हटवाने का था लेकिन समझौता कैपिंग ना हटवाकर एक्स्ट्रा लोगों को वित्त विभाग से परमिशन दिलवाकर उन्हें डीएसीपी दिलवाने का हुआ तो अब वित्त विभाग परमिशन दे, ना दे, किसको दे, क्या पता | बाकि राड़ 2025 में होगी जब 1801वां चिकित्सक 2025 में जाकर कहेगा की हमारा दिसम्बर 2017 में समझौता हुआ था, उसकी अनुपालना में मुझे वित्त विभाग से शिथिलता दिलवाकर 8700 ग्रेड में लो, तो राम जाने लेंगे की नहीं !