Medical college will reopen

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने केरल के इडुक्की जिले के सरकारी मेडिकल कॉलेज को दोबारा खोलने और 100 छात्रों को दाखिला देने की अनुमति दे दी है। दक्षिणी राज्य लंबे समय से इसकी मांग कर रहा था। राज्य सरकार कई वर्षों से इसकी मांग कर रही थी। सरकार ने कहा कि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं जल्द से जल्द पूरी की जाएंगी और इस साल तक ही कक्षाएं शुरू करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।इडुक्की मेडिकल कॉलेज ने पिछली कांग्रेस-यूडीएफ (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) सरकार के समय अपना संचालन शुरू किया था, लेकिन वर्ष 2016 में तत्कालीन भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) की मान्यता खो दी थी, क्योंकि इसमें आवश्यक संख्या में बिस्तर सहित कई पर्याप्त सुविधाएं नहीं थीं।स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि वाम लोकतांत्रित मोर्चा (एलडीएफ) सरकार ने बाद में वहां के सभी छात्रों को अन्य चिकित्सा संस्थानों में स्थानांतरित कर दिया था, ताकि उनकी पढ़ाई जारी रहे।सत्तारूढ़ एलडीएफ सरकार सामूहिक प्रयास और उचित योजना के माध्यम से कॉलेज की मान्यता फिर से हासिल करने में कामयाब रही। जॉर्ज ने बताया कि राज्य सरकार ने सभी आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की है, पर्याप्त कर्मचारी नियुक्त किए हैं और नए भवन का निर्माण पूरा करने के बाद आईपी (इन-पेशेंट) सेवाएं शुरू की हैं।मंत्री ने कहा, ”यह एक बड़ी उपलब्धि है कि 100 छात्रों को दाखिला देने की अनुमति मिल गई है। पहले केवल 50 (छात्रों के दाखिले) की अनुमति थी।”उन्होंने बताया कि सरकार की योजना आने वाले दिनों में मेडिकल कॉलेज में और उन्नत सुविधाएं उपलब्ध कराने की है।

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Fraud with student

28.06.2022
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिला दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले आरोपी को दिल्ली की अपराध शाखा ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने ने अर्थशास्त्र में पीएचडी की हुई है। जानकारी के मुताबिक, आरोपी नेट को स्पूफिंग कर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के लैंडलाइन नंबरों से पीड़ितों को फोन करता था।दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने ठगी करने वाले पीएचडी डिग्री होल्डर को गिरफ्तार किया है। आरोपी मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में दाखिला दिलाने के नाम पर ठगी करता था। गिरफ्तार आरोपी विकास पारस उर्फ आशीष जैसवाल (33) नेट को स्पूफिंग कर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के लैंडलाइन नंबरों से पीड़ितों को फोन करता था। इससे पीड़ित को लगता था कि आरोपी मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से बोल रहा है।वह मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के ई-मेल को स्पूफिंग कर पीड़ित को मेल करता था। इससे पीड़ित को विश्वास हो जाता था। कानपुर, यूपी निवासी विकास पारस ने अर्थशास्त्र में पीएचडी की हुई है। पुलिस ने इसके पास से तीन फर्जी आधार कार्ड, उन पर खुलवाए गए बैंक खाते की चैकबुक और पैनकार्ड बरामद किया गया है।अपराध शाखा डीसीपी राजेश देव के अनुसार इंद्र कुमार रॉय इंद्रिश की शिकायत पर 30 मई को मामला दर्ज किया गया था। पेशे से साइंस शिक्षक इंद्र कुमार ने अपनी शिकायत में कहा था कि उनका बेटा शिवम वर्ष 2019-20 में नीट परीक्षा में बैठा था, मगर कम अंक आने के कारण उसे एमबीबीएस में दाखिला नहीं मिल सका। वह वर्ष दिसंबर, 2020 में आशीष जैसवाल, रोहन सिंह और रोहित के संपर्क में आया। उन्होंने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में उसके बेटे को गर्वमेंट नोमिनी कोर्ट के तहत दाखिला करवाने का झांसा दिया। इसके बदले उसे डोनेशन के नाम पर बीस लाख रुपये की मांग की गई। आरोपियों के झांसे में आकर आशीष जैसवाल के आईसीआईसीआई बैंक खाते में बीस लाख रुपये ट्रांसफर की दिए। रकम लेने के बाद आरोपी गायब हो गए और मोबाइल बंद कर लिया। मामला दर्जकर एंटी एक्सटॉर्शन एंड किडनेपिंग सेल में तैनात इंस्पेक्टर दलीप कुमार की देखरेख में एसआई राजीव बमल की टीम ने जांच शुरू की।जांच में पुलिस टीम को पता लगा कि पीड़ित के पास मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज और एमसीआई के यहां से की गई लैंडलाइन कॉल वास्तव में स्पूफिंग थी। बैंक खाता भी फर्जी आधार कार्ड पर खोला गया है। आखिरकार इंस्पेक्टर दलीप कुमार की टीम ने कई दिन की जांच के बाद विकास पारस को शेख सराय इलाके से गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी के पास तीन आधार कार्ड
आरोपी का असली नाम विकास पारस है। कानपुर, यूपी निवासी आरोपी ने हेमवती नंदन बहूगुना यूनिवर्सिटी, उत्तराखंड से अर्थशास्त्र में पीएचडी की हुई है। उसके पिता कानपुर ऑर्डिनेंस फैक्टरी में सरकारी नौकर थे। पिता की कैंसर व कोविड के चलते वर्ष 2020 में मौत हो गई थी। वह आशीष जैसवाल के नाम से ठगी करता था। आरोपी ने तीन फर्जी आधार कार्ड बनवा रखे थे। इन फर्जी आधारकार्ड की मदद से नकली बैंक खाता खोल रखा था। उसने वर्ष 2020 में बंधन बैंक का खाता नशा करने वाले आशीष जैसवाल से खरीदा था। वह व उसके सहयोगी पीड़ित से चाणक्यपुरी स्थित कॉफी डे में मिले थे। उसके एक अ

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NMC ,advises indian students

24.06.2022
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने भारतीय छात्रों को बड़ी सलाह दी है। एनएमसी ने कहा है कि छात्रों को सलाह दी जाती है कि पाकिस्तान के मेडिकल कॉलेजों में दाखिला न लें। एनएमसी ने यह कदम विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के उस ऐलान के बाद उठाया है जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तानी डिग्रियां भारत में मान्य नहीं होगी।

एनएमसी की ओर से सार्वजनिक नोटिस जारी

बता दें कि कुछ दिन पहले संयुक्त परामर्श के माध्यम से भारतीय छात्रों से पाकिस्तान में किसी भी कॉलेज या शैक्षणिक संस्थान में खुद को एडमिशन नहीं करने का आग्रह किया था।इस पहले के बाद एनएमसी की ओर से सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया है।यूजीसी और एआईसीटीई के परामर्श में कहा गया था कि यदि छात्र ऐसा करने में विफल रहे तो वे इस देश में नौकरी खोजने या उच्च शिक्षा प्राप्त करने के पात्र नहीं होंगे।29 अप्रैल को जारी नोटिस में कहा गया है कि ”सभी संबंधित लोगों को सलाह दी जाती है कि वे चिकित्सा शिक्षा के लिए पाकिस्तान की यात्रा न करें।

पाकिस्तान में पढ़ने वालों की डिग्री भारत में मान्य नहीं

नोटिस में कहा गया है, ‘‘भारत का कोई भी नागरिक/प्रवासी नागरिक जो पाकिस्तान के किसी भी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस/बीडीएस या समकक्ष मेडिकल पाठ्यक्रम में प्रवेश लेना चाहता है, वह एफएमजीई में उपस्थित होने या भारत में रोजगार पाने के पात्र नहीं होंगे, सिवाय उन लोगों के जिन्होंने दिसंबर 2018 से पहले या बाद में गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी प्राप्त करने के बाद पाकिस्तान के डिग्री कॉलेजों / संस्थानों में दाखिला लिया था।विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (एफएमजीई) और ‘नेशनल एग्जिट टेस्ट’ (एनईएक्सटी) छात्रों के लिए भारत में प्रैक्टिस करने के लिए एक लाइसेंसिंग परीक्षा है।

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NMC Issues Notice For MBBS Admission In China; “Online Courses Not To Be Recognised”

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (National Medical Commission) ने चीन के मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे स्टूडेंट्स के लिए अलर्ट जारी किया हैI NMC ने जारी निर्देश में कहा कि, ‘चीन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हजारों छात्र पहले ही फंसे हुए हैं, जबकि कुछ चीनी यूनिवर्सिटीज की तरफ से इस साल और अगले साल के लिए एडमिशन प्रोसेस शुरू किया जा रहा हैI आयोग ने भारतीय छात्रों को मेडिकल यूनिवर्सिटीज में एडमिशन को लेकर सावधान किया हैI साथ ही बताया गया कि जो स्टूडेंट्स वहां के मेडिकल कॉलेज से ऑनलाइन पढ़ रहे हैं, मेडिकल कमिशन अब से ऑनलाइन मेडिकल पढ़ाई को मान्यता नहीं देगाI

इस बात की जानकारी आयोग के अनुसार विदेश मंत्रालय के जरिए मिली हैI दरअसल चीनी यूनिवर्सिटीज मेडिकल में एडमिशन की प्रक्रिया को शुरू कर रहे हैंI ऐसे में भारतीय स्टूडेंट भी वहां एडमिशन लेने के लिए आवेदन की संभावनाएं ढूंढ रहे हैंI

भारत के संदर्भ में कोई चर्चा नहीं

NMC का कहना है कि भारतीय छात्रों को आवेदन करने से पहले इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि चीन ने नवंबर, 2020 से सख्त यात्रा प्रतिबंध और नए वीजा बंद कर रखे हैं, जिसकी वजह से चीन में पहले से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्र वापस चीन नहीं लौट पा रहे हैंI लेकिन अब चीन बाकी देशों के लिए यात्रा प्रतिबंध आसान करने की सोच रहा है, जिसमें भारत के संदर्भ में फिलहाल उसने कोई चर्चा नहीं की हैI

ऑनलाइन मेडिकल पढ़ाई को मान्यता नहीं

भारत सरकार की तरफ से कई बार भारतीय स्टूडेंट्स को वापस भेजने के बारे में चीन से निवेदन किया गया था, लेकिन अब तक उसने इसपर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दीI बता दें जो स्टूडेंट्स वहां के मेडिकल कॉलेज में कई सालों से पढ़ाई कर रहे थे, वो स्टूडेंट ऑनलाइन क्लासेस ले रहे हैं, लेकिन अब NMC ऑनलाइन मेडिकल की पढ़ाई को मान्यता नहीं देगाI ऐसे में भविष्य में इन छात्रों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

NMC Memorandum for fees of deemed and private colleges

After extensive consultations, it has been decided that the Fee of the 50% seats in the Private Medical College & Deemed Universities should be at par with the Fee in the Government Medical Colleges of that particular State & UT.

Rajasthan Fee Regulating Committee

Rajasthan Seats of Government and state quota

Karnataka Example

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Permission not given to Pacific medical college udaipur for MBBS admission

Permission not given to Pacific medical college udaipur by MOHFW for MBBS admission.
4th batch will not get admission.

Whereas the Medical Council of India vide letter dated 31.10.2017 recommended to the Ministry of Health & Family Welfare not to renew the permission for admission of 150 MBBS seats in the year 2018-19 (4th batch) at Pacific Institute of Medical Sciences, Udaipur, Rajasthan and also applied Clause 8(3)(1)(b) of Establishment of Medical College Regulations, 1999 .

Rajasthan State hopeful of new session in 5 medical colleges from July 1

after the recommendation made by MCI of disapproving the proposed medical colleges to the Centre, the medical education department stepped up efforts and started preparation to make the proposed medical colleges operational as per the MCI norms.

The MCI had presented the report, which pointed out flaws in these colleges, at the executive committee meeting held in January 13. The new medical colleges, proposed by the state government, would have had a capacity to admit 100 MBBS students each.

In Dungarpur, the inspection team found that there was a 100% `deficiency in faculty as well as resident doctors. The colleges had also not appointed deans and medical superintendents. It was also found that they lacked facilities such as audiometry and speech therapy, central oxygen and central suction systems, and disaster trolleys and crash carts.

After the MCI’s report was out pointing out flaws in the proposed medical colleges, the medical education department swung into action and conducted interviews of faculty for the proposed medical colleges and developing other necessary facilities required in medical colleges as per the MCI norms.

The medical education department conducted interviews in April for recruiting faculties in non-clinical and clinical breaches. The department created posts of professors, associate professor, assistant professor and senior demonstrator.

Now, after completing all the recruitment processes, the medical education department is hopeful that they will get the nod of the Centre for starting five new medical colleges in the state from academic session 2017-18.

APPLICATION FORM FOR ELIGIBILITY CERTIFICATE for getting admission in foreign medical institute of Indian medical council Act

APPLICATION FORM FOR ELIGIBILITY CERTIFICATE for getting admission in foreign medical institute of Indian medical council Act

Medical Council of India (Criteria for Students admitted in Excess of admission capacity of medical colleges) Regulations, 1997

No.__CI-34(41(/97-Med.(N) – In exercise of the powers conferred by clause (fc) of section 33 of the Indian Medical Council Act, 1956 (102 of 1956), the Medical council of India, with the previous sanction of the Central Government, hereby makes the following regulations, relating to identification of students admitted in excess of the approved admission capacity of medical colleges namely