NMC remove bar of maximum seats in medical colleges

NATIONAL MEDICAL COMMISSION AMENDMENT NOTIFICATION New Delhi, the 23rd April, 2026 F. No. CDN-19012/2/2025-Coordination-NMC.––In exercise of the powers conferred by subsection (d) of subsection (1) of Section 24 read with Sections 26, 28 and 29, of the National Medical Commission Act, 2019 (Act No. 30 of 2019), the National Medical Commission, the Under Graduate Medical Education Board hereby makes the following amendments in : the "Guidelines under Regulation 10 of the Establishment of New Medical Institutions, Starting of New Medical Courses, Increase of Seats for Existing Courses & Assessment and Rating Regulation 2023 in short (UG-MSR 2023)" and Regulation 19 of the Graduate Medical Education Regulations 2023 notified in Extraordinary Gazette of India Part-III Section 4 vide ADVT-III/Exty/360/2023-24 dated 16.08.2023:- 1. In Chapter –I under the heading objectives: The following objective in the UG-MSR 2023 ‘Colleges seeking increased number of seats cannot exceed a total of 150 MBBS students from the Year 2024-25’ shall be deleted. 2 . In Chapter –I under the heading objectives: The proviso under the Objective in the UG-MSR 2023 “Provided that medical college shall follow the ratio of 100 MBBS seats per 10 lakh population in that state/U.T’’ shall be deleted. 3. In the Schedule I under the A.1.GENERAL the existing phrase ‘The distance between the plots of college and hospital shall have a travel time of maximum of 30 minutes’ shall be read as: ‘The maximum distance between the plots of college and hospital shall be 10 Km and in the case of North Eastern Region States and Himalayan States, maximum distance between the plots of college and hospital shall be 15 Km’. Dr. RAGHAV LANGER, Secy. [ADVT.-III/4/Exty./56/2026-27]

NMC Memorandum for fees of deemed and private colleges

After extensive consultations, it has been decided that the Fee of the 50% seats in the Private Medical College & Deemed Universities should be at par with the Fee in the Government Medical Colleges of that particular State & UT.

Rajasthan Fee Regulating Committee

Rajasthan Seats of Government and state quota

Karnataka Example

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Post MBBS Diploma

know everything

National Board of Examination in Medical Sciences (NBEMS) launched Post MBBS two-year Diploma courses in the following eight Broad specialties:
  • Anesthesiology.
  • Obstetrics & Gynaecology.
  • Paediatrics.
  • Family Medicine (D. Fem. Med).
  • Ophthalmology.
  • Otorhinolaryngology (ENT)
  • Radio Diagnosis.
  • Tuberculosis & Chest Disease.

Government of India (MOHFW) Gazette
NBE Notification
NBE Information Bulletin
NMC Schedule 1
NMC Schedule 2
NMC Schedule 3
CPS Recognition
THE INDIAN MEDICAL COUNCIL ACT, 1956

Seat Matrix of MD/MS/Diploma
Fee and Accounts of Institutes

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Medical and Non medical teachers conflict – Explained MCI

मेडिकल कॉलेजों में नोन क्लिनिकल विषयों में कितने प्रतिशत टीचर्स हो सकते हैं नॉन मेडिकल फील्ड से ?

Anatomy, Physiology, Pharmacology & Microbiology : Non-medical teachers may be appointed to the extent of 30% of the total numbers of the posts in the department.

In the Biochemistry department : Non-medical teachers may be appointed to the extent of 50% of the total numbers of the posts in the department.

* Such candidates after appointment as Assistant Professor may be promoted to higher teaching post, subject to the condition that they possess the Ph.D. degree in the subject.

MCI order attached below –

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राजस्थान : गैर सेवारत पीजी स्टूडेंट्स लगा रहे सरकार और आमजन को चूना

पी.जी कोर्स मे अनिवार्य सरकारी सेवा के बांड की हो रही अवहेलना
राजस्थान सरकार गैर सरकारी चिकित्सकों को मुफ्त में पीजी करवाती है, ऊपर से तनख्वाह(stipend) और देती हैं, बदले में केवल इतना चाहती हैं कि ये चिकित्सक कोर्स पूरा करने के बाद पांच साल तक प्रदेश में ही आवश्यक रूप से सेवा दें, इसकी गारंटी के रूप में वो एडमिशन देते समय प्रत्येक चिकित्सक से 25 लाख का बांड भरवाती है, या तो पांच साल सेवा दो या फिर 25 लाख जमा करवाओ, तभी ओरिजिनल डाक्यूमेंट्स वापस मिलेंगे । लेकिन हो क्या रहा है कि ना तो ये चिकित्सक सेवा दे रहे हैं और ना ही 25 लाख जमा करवाए हैं, बस आराम से गायब हो गए हैं । उदाहरण के तौर पर देखें तो चार साल पहले राज्य सरकार ने मेडिकल की पीजी सीटों में एडमिशन के वक्त सरकारी मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद अनिवार्य सरकारी सेवा के पच्चीस लाख के अनुबंध पत्र (बांड) भरवाए  (सम्बंधित कागजात संलग्न हैं)।
पिछले साल पूरे राज्य से सरकारी मेडिकल कॉलेज से सैंकड़ों डॉक्टर पीजी करके चले गए लेकिन सरकार एक पीजी डिग्री धारी डॉक्टर से बांड भरवाने के बावजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों को तीन साल की अनिवार्य सरकारी सेवा में नियुक्ति नहीं दे पाई। सर्विस बॉन्ड के साथ पीजी डॉक्टर्स का एक बैच पास आऊट हो चूका है, तथा प्रिंसिपल एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बाॅन्ड तथा शपथ पत्र की पालना करवाये बगैर औरीजिनल डिग्री प्रमाण पत्र दे दिये, इस मिलीभगत की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ।
बॉन्ड की पालना कराने में चिकित्सा शिक्षा विभाग कोई खास रूचि नहीं दिखा रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेज मे सस्ती दरों पर चिकित्सा शिक्षा लेने वाले डॉक्टर्स ना तो आमजन की सरकारी अस्पतालों में सेवा कर रहे हैं और ना ही बॉन्ड की राशि जमा करवा रहे हैं। जिससे सरकार को करोड़ों के राजस्व की हानि हो रही है। सरकार को उक्त बांड की राशि प्रिंसिपल अथवा चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से वसूलनी चाहिए या आमजन को सेवाएं दिलानी चाहिए।
चूंकि चिकित्सा शिक्षा विभाग के पास पीजी पास आऊट की लिस्ट रहती है। अगर चिकित्सा शिक्षा विभाग समय रहते, स्वास्थ्य भवन को सूची उपलब्ध करवा देता है। तो स्वास्थ्य भवन पद्स्थापन कर सकता है। परंतु गत वर्ष स्वास्थ्य भवन को फ्रैशर्स के पद्स्थापन बाबत कोई सूची नहीं पहुंचाई गयी थी। जबकि महाराष्ट्र, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में बाॅन्ड की सख्त पालना हो रही है। लेकिन दूसरे प्रदेशों से चिकित्सक राजस्थान में पीजी करके राजस्थान की आम जनता को सेवाएं दिए बगैर लौट जाते हैं, और ना ही सरकारी खाते में 25 लाख रुपये जमा करवाते हैं, यानी सरकार को लग रही है डबल चपत।
इनमें से कुछ चिकित्सक सेवा देना भी चाहते हैं तो सरकार उन्हें ले नहीं रही, राजस्थान के सरकारी कॉलेजों से पीजी करने वाले चिकित्सकों ने मांग की है कि उक्त अनुबंध की पालना होनी चाहिए उससे जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी और आमजन को विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं सरकारी अस्पतालों के माध्यम से मिलेगी। जून के प्रथम सप्ताह में करीब 250 ऐसे चिकित्सक अपना कोर्स पूर्ण कर रहे हैं, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन्हें सेवा का मौका देती है या फिर ये 25 लाख का चूना लगाकर मजबूरन होंगें फरार।

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Medical Council of India Gazette notification for Rural area

नीट पीजी में प्रवेश हेतु सेवारत चिकित्सकों को बोनस अंकों का प्रावधान एमसीआई द्वारा किया गया है, संशय यह था कि किन इलाकों में कार्यरत चिकित्सकों को यह लाभ दिया जाए ? चूँकि संविधान के अनुसार हेल्थ एक स्टेट सब्जेक्ट है यानि सभी पालिसी स्टेट को बनानी होती हैं | हर स्टेट के अपने अलग क्राइटेरिया हैं | ज्यादातर जगहों को ग्रामीण, दुर्गम, दूरस्थ, पहाड़ी, ट्राइबल, रेगिस्तानी आदि इलाकों में विभाजित किया गया है | 2018 से पूर्व में एमसीआई ने केवल दुर्गम अथवा दूरस्थ इलाकों को ही बोनस अंक के योग्य माना था लेकिन 05.04.2018 के गैजेट नोटिफिकेशन में इसे ग्रामीण अथवा दुर्गम अथवा दूरस्थ कर दिया गया है | यानि जो भी ग्रामीण भत्ते के हक़दार हैं वे बोनस अंको के भी हक़दार हैं | ग्रामीण क्षेत्रों को परिभाषा राज्य के अधीन आती है जिसके अन्तर्गत आने वाले संस्थाओं को हर वर्ष नोटिफाई किया जाना होता है क्यूंकि कई जगह नए संस्थान खुल जाते हैं तथा कुछ संस्थान ग्रामीण की परिभाषा से बाहर भी हो सकते हैं |

What is Rural Area & Allowance in Rajasthan ?

MCI Rural Gazette notification attached below –

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नीट पीजी काउंसलिंग और वकीलों की चांदी

मेडिकल पीजी की एक सीट करोड़ रुपये की मानी जाती है, सो साफ़ है कि हर सीट के लिए घमासान होता है, ब्रांच का लालच हो या पीजी का तमगा, ख़ास तो होता ही है, अगर इसके लिए पढाई के साथ कुछ क़ानूनी लड़ाई में पैसे खर्च हो जाएँ तो भी कम ही हैं | लगभग हर साल ही काउंसलिंग कोर्ट में घसीटी ही जाती है, कोर्ट यानी वकील, वकील यानि मोटी फीस, वो भी नकद में | हर वकील सोचता है कि डॉक्टरों के पास पैसों की क्या कमी ? सो तैयार रहते हैं, हालांकि सरकारी ग्रामीण भत्ताधारी चिकित्सकों के पास कहाँ पैसा है लेकिन वकील उनकी तुलना जयपुर के एसएमएस वाले मोटे डॉक्टरों से करते हैं, सो बेचारे सरकारी डॉक्टर चंदा चपाटी करके ये फीस चुकाते हैं | पिछले तीन साल में केस जयपुर से दिल्ली तक गए और फीस लाखों से करोड़ों तक गयी | इसी बीच जयपुर में कुछ युवा वकीलों ने मेडिकल लाइन में ही कैरियर बनाने कि ठानी और वे दिल्ली की सभी सुनवाइयों में खुद के खर्चे पर जाने लगे, मकसद यह दिखाना कि हम मेडिकल के केसों के जानकार हैं, पधारो म्हारे ऑफिस, कई कॉलेज वाले छात्र उनके यहाँ पधारने लगे | एक युवा वकीलन ने तो मेडिकल कॉलेज हॉस्टल के आस पास फ्रेशर ढूंढने कि कोशिश करी ताकि एक बार कैसे भी मामले को खुद के पैसे खर्च करके भी कोर्ट में पटक दिया जाए ताकि फिर एक बार माहौल बन जाए तो वो दिल्ली तक जाए, कैरियर भी बने और कैशियर भी | यानि जबरदस्ती शुरुआत की कोशिश की जा रही है जबकि राजस्थान में कोई किसी भी तरह का केस बनता ही नहीं, गिने चुने सेवारतों के काम चलाऊ नंबर आये हैं, फील्ड से ज्यादातर लोग कॉलेजों में जा चुके हैं, अब बचे ही बहुत कम हैं, जो हैं वे भी एक दो साल में ही आये हैं | अतः सावधान रहें, चांदी बचा कर रखें |

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Impact of Tamilnadu High Court decision in Rajasthan about NEET PG bonus marks

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के गैजेट नोटिफिकेशन की अनुपालना में सेवारत चिकित्सकों को पीजी कोर्सेज में प्रवेश हेतु लगने वाली नीट परीक्षा में उनके प्राप्तांकों के प्रतिशत के रूप में बोनस अंक दिए जाते हैं | राजस्थान राज्य में कार्यरत सेवारत चिकित्सकों को 1 साल के 10% तथा अधिकतम 3 साल के 30% अंक बोनस के रूप में दिए जाते हैं | पिछले साल के मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के गैजेट नोटिफिकेशन के अनुसार सभी रूरल/ग्रामीण सेवारत चिकित्सकों को बोनस अंक का हक़ है, चूँकि राजस्थान ऐसा राज्य है जिसमें पहले से ही इलाकों को पहाड़ी, दुर्गम, दूरस्थ और ग्रामीण (Hilly/Difficult/Remote/Rural) में बांटने के बजाय केवल ग्रामीण क्षेत्र में ही बांटा गया है जिसका आधार केवल ग्रामीण भत्ते (Rural Allowance) को माना गया है यानी जिसे यह भत्ता देय है वह बोनस अंक का हकदार है |

देखा जाए तो यह एक बड़ी पालिसी है जो एमसीआई के गैजेट और  ग्रामीण भत्ते पर टिकी है, साथ ही पिछले सालों के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में भी इन दोनों को ही सही ठहराया गया है, ऐसी स्थिति में राजस्थान में 10-20-30 बना रहेगा, वो भी हर स्थिति में |

तमिलनाडु हाईकोर्ट की कमेटी ने किया बोनस अंक प्रक्रिया में बदलाव

What is Rural Allowance in Rajasthan ?

MCI “Rural” word Gazette Notification is here

नीट पीजी 2019 के रिजल्ट के बाद सेवारत चिकित्सकों में क्यों है सन्नाटा ?

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New NEET PG bonus marks criteria for Tamilnadu In-Service Doctors

मद्रास हाई कोर्ट ने इनसर्विस कैंडिडेट को पीजी में दिए जाने वाले बोनस अंकों की प्रक्रिया में बदलाव कर दिया है | हाईकोर्ट ने एक सात सदस्य कमेटी का गठन किया था इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को प्रस्तुत कर दी है | कमेटी ने तमिलनाडु राज्य के सभी इनसर्विस कैंडीडेट्स को चार कैटिगरीज में बांटा है, हर केटेगरी के कैंडिडेट को अलग-अलग बोनस अंक दिए जाएंगे, ये चार केटेगरी निम्न है – पहाड़ी, दुर्गम, दूरस्थ और ग्रामीण | (Hilly/Difficult/Remote/Rural)
पहाड़ी इलाकों में कार्यरत चिकित्सकों को उनके नीट स्कोर का 1 साल का 10% बोनस अंक मिलेगा (Max 30%) तथा इस तरह के पहाड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या 119 है, दुर्गम इलाकों में कार्यरत चिकित्सकों को 1 साल के 9% बोनस अंक मिलेंगे (Max 27%) तथा इस तरह की 660 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, दूरस्थ इलाकों में कार्य चिकित्सकों को 1 साल के 8% बोनस अंक दिए जाएंगे (Max 24%), अंतिम केटेगरी है ग्रामीण चिकित्सक जिनको की 1 साल के 5% बोनस अंक तथा 3 साल के अधिकतम 15% बोनस अंक दिए जाएंगे |
साथ ही कुल डिप्लोमा कोर्स की सीटों की 50 फ़ीसदी सीटें केवल सेवारत चिकित्सकों के लिए आरक्षित होंगी |

# Health is a state subject in the Constitution.

Source : Times of India

तमिलनाडु नीट पीजी बोनस अंक डिसीजन और राजस्थान –

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30 Medical Teachers terminated

उत्तरप्रदेश के विभिन्‍न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लम्‍बे समय से अनुपस्थित चल रहे 30 चिकित्‍सा शिक्षकों की सेवायें समाप्‍त करने की कारवाई शुरू हो गयी है। इन चिकित्‍सा शिक्षकों के खिलाफ कारवाई करने के लिए चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टण्डन ने निर्देश दिये हैं।

प्रमुख सचिव चिकित्‍सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इन सभी शिक्षकों को नोटिस जारी कर सेवायें समाप्‍त करने की कार्यवाही शुरू कर दी गयी है। उन्‍होंने बताया कि ये सभी चिकित्सा शिक्षक बिना अनुमति लिए अनाधिकृत रूप से लम्बे समय से अनुपस्थित चल रहे हैं जिसके कारण राजकीय मेडिकल कालेजों एवं चिकित्सालयों में समस्या आ रही थी। श्री दुबे ने बताया कि जिन चिकित्सा शिक्षकों के विरुद्ध कार्यवाही की गयी है उनमें जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर के 8, एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा के 6, एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, मेरठ के 3, राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज के 4, मेडिकल कॉलेज जालौन, गोरखपुर व आजमगढ़ के 1-1 चिकित्सा शिक्षक शामिल हैं। इसके अतिरिक्त हृदय रोग संस्थान, कानपुर के 3 चिकित्सा शिक्षक और जेके कैन्सर इन्स्टीट्यूट, कानपुर के 3 हैं ।