Rajasthan in service doctors seniority list of RUHS & RPSC selected doctors.
MO SMO Deputy Director PCMO JS SS PS list as on 1 April 2019.
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Jaipur (Rajasthan) October 2019
सेवारत चिकित्सकों को प्रतिवर्ष वार्षिक प्रतिवेदन (ACR APR) और अचल संपत्ति विवरण (IPR) विभाग में भरकर देना होता है, वर्ष 2016 के बाद से ये ऑनलाइन भरे जाते हैं, पहले की स्थिति में ऑफलाइन सिस्टम था ।
पदोन्नति के लिए चिकित्सकों को प्रत्येक वर्ष का वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन (APR/ACR) एवं अचल संपत्ति विवरण (IPR) जमा करवाना होता है, लेकिन इस ACR और IPR का निदेशालय में कोई धणी-धोरी नहीं है, चिकित्सक अपना अपना रेकॉर्ड समय से भेज भी दें तो यह रास्ते मे पता नहीं कहाँ कहाँ अटक जाता है, और इस अनुभाग में पहुंच भी जाये तो दांयी से बांयी टेबल पर नहीं आता, वहां भी कमियां निकाल कर पटक दिया जाता है, भोग की आस में । चिकित्सक तो ये सोचकर आराम से बैठे होते हैं कि उनका रेकॉर्ड तो पहुंच गया है, और 1 अप्रैल को उनकी पदोन्नति हो जाएगी, उन्हें क्या पता कि किस बिल और भोलाराम के जीव में अटक रखा है उनका रिकॉर्ड ।
2019 मई माह में डीओपी द्वारा पदोन्नति किये जाने वाले चिकित्सकों का रिकॉर्ड मांगे जाने पर निदेशालय के बाबूराज द्वारा आधा अधूरा रिकॉर्ड पकड़ा दिया जाता है, कायदे से रिकॉर्ड देने से पहले आंकड़े सार्वजनिक किए जाते हैं कि किसका कौनसा रेकॉर्ड बकाया है ताकि वो अपना अटका रिकॉर्ड निकलवा सके और कुछ बकाया हो तो जमा करवा सके । लेकिन बिना सूचित किये ही अधकचरे को आगे भिजवाया गया और 15 जून 2019 को जारी हुई लिस्ट में 1700 में से करीब 600 की ही पदोन्नति की गई, इसमें भी सीनियरिटी का ध्यान नहीं रखा गया है, चार ACR वाले का नाम है लेकिन सैंकड़ों ऐसों का नाम नहीं है जिनकी पूरी 6 जमा थी, यानी भयंकर गफलत हुई है जिससे राज्य के हजार चिकित्सक तनाव में हैं ।
एक सरकारी चिकित्सक सैंकड़ों किलोमीटर यात्रा करके निदेशालय में मात्र इसलिए जाता है कि उसे यह पता लगे की उसकी कौनसी ACR or IPR बकाया है, वह चिकित्सक वहां जाकर बाबूराज से मिन्नतें करता हुआ दिखता है, घूस वाली चाय भी पिलाता है । ऐसी स्थिति में सरकारी डॉक्टर द्वारा श्रीमान एसीएस महोदय को इस भयावह स्थिति से अवगत करवाया, साथ ही अरिसदा द्वारा भी सहयोग दिया गया तो एसीएस महोदय ने कई ऑनलाइन सहूलियतें देने की हामी भरी जिनमें से एक था ACR IPR का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करना, यह ब्यौरा सार्वजनिक किया गया है, नीचे संलग्न है ।
बाकी जिनकी ACR IPR बकाया है वे जल्द से जल्द इसकी पूर्ती करावें क्यूंकि एसीएस महोदय के आदेशों से जल्द ही DACP होने जा रही है ।
IMMOVABLE PROPERTY REPORT (IPR) ONLINE STATUS ON DOP WEBSITE –
ANNUAL PERFORMANCE APPRAISAL REPORTS FILLING AUTHORITIES (NEW) –
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14.09.2019 JAIPUR
राज्य से सेवारत चिकित्सकों को छठे पे कमिशन से सातवें पे कमिशन में जाने पर 01 जनवरी 2017 से 30 सितम्बर 2017 तक का सेलरी डिफ़रेंस, एरियर के रूप में तीन किश्तों में मिलना था | बाबुओं द्वारा इसकी गणना अपने हिसाब से उलट पलट की गई जिससे काफी चिकित्सकों को आधे एरियर का ही भुगतान हुआ, पीड़ित चिकित्सक दबी जुबान इसकी चर्चा भी कर रहे थे लेकिन बाबूराज के आगे हार मान चुके थे | चिकित्सक शिक्षक इन मामलों में ज्यादा होशियार पड़ते हैं सो उन्होंने चुपचाप इसका आर्डर निकलवा लिया, यह आर्डर सरकारी डॉक्टरों के हाथ लग गया तो वे भी अपने बाबुओं के पास ऑर्डर लेकर पहुंचे तो बाबुओं ने इस आर्डर को केवल ‘चिकित्सक शिक्षकों’ के लिए बताते हुए ख़ारिज कर दिया | पीड़ित चिकित्सक मुद्दे को व्हाट्सएप पर लहराते रहे अंततः मुद्दा अरिसदा के पास लेकर गये जहाँ डॉ. अजय चौधरी ने त्वरित गति से एसीएस मेडिकल & हेल्थ रोहित कुमार सिंह जी से समय लिया और जाकर पीड़ा बयान की तो सर ने वहीँ से ‘निदेशालय कोष एवं लेखा’ वालों को कॉल करके उक्त आदेश को समस्त चिकित्सकों के लिए निकालने को कहा और एक दिन में ही आदेश निकल गया | (पूर्व एवं नवीन आदेश की प्रति संलग्न है)
चिकित्सकों में ख़ुशी की लहर है, उदाहरण के तौर पर वर्ष 2011 जोइनिंग वालों का एरियर करीब 150000/- रुपये बन रहा था जो कट-पिट कर एक लाख से ऊपर मिलना था लेकिन दिया गया मात्र पचास हजार या साठ हजार | चिकित्सकों ने अरिसदा अध्यक्ष का आभार जताया है | डॉ. चौधरी ने पूरा श्रेय एसीएस मेडिकल हेल्थ को दिया है जिनके सहयोग से यह काम इतनी जल्दी हो पाया | सर्वविदित है की एसीएस श्री रोहित कुमार सिंह, चिकित्सकों की पीड़ा को सुनते हैं और त्वरित निर्णय लेते हैं |
हालाँकि इस आदेश के बाद बाबु समुदाय तनाव में हैं क्यूंकि उन्हें वापस से जोड़ तोड़ करनी पड़ेगी, हिसाब मिलाना पड़ेगा |
Tip : यह एरियर वहीँ से मिलेगा, जहाँ से पहले मिला था, ट्रांसफर नहीं हुआ है तो कोई लफड़ा नहीं, ट्रांसफर हुआ है तो कुछ वक़्त के लिए पे-मैनेजर आईडी वापस वहां ट्रांसफर की जाएगी | अगर नया बाबु राजी है तो बिना आईडी भेजे पूरानी जगह से शीट मंगवाकर यहीं करवा लो |
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राज-मेडिकोन 2019, आइएमए और अरिसदा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चिकित्सक महासंगम का आयोजन 29-30 जून को जयपुर के बिड़ला ऑडीटोरियम में हुआ । आयोजन एतिहासिक था, जिसमें करीब 2500 चिकित्सकों ने हिस्सा लिया, इन चिकित्सकों में प्राइवेट और सरकारी दोनों तरह के थे, चूँकि यह अरिसदा का पहला अधिकारिक संगम भी था । दो दिन के आयोजन में बहुत सी सेलेब्रिटीज और चिकित्सा जगत के नामी जनों के सेशन्स थे जिनका चिकित्सकों ने भरपूर आनंद लिया, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया ऑनलाइन एवं ऑफलाइन थी, नाश्ते, खाने का आयोजन बहुत ही शानदार बताया गया (बटरचिकन नहीं था), हालांकि ड्रिंक्स के दो कूपन मिलने पर चिकित्सक चर्चा करते देखे गये कि इनका क्या उद्देश्य है, साथ ही रेजिडेंट डॉक्टरों को ड्रिंक्स कूपन नहीं मिलने कि चर्चा एवं शिकायत गलियारों में रही । चिकित्सकों ने आयोजन को सराहा और भविष्य में ऐसे आयोजन चिकित्सक एकता की दिशा में करते रहने की आवश्यकता जताई । सरकारी डॉक्टरों के लिए आयोजन में भाग लेने को ड्यूटी माने जाने के आदेश विभाग की तरफ से जारी किये गए, जिससे चिकित्सकों में उत्साह दिखा । एक प्राइवेट लेब कि तरफ से चिकित्सकों कि लिपिड और डायबिटीज प्रोफाइल मुफ्त में जाँची जा रही थी जिसकी रिपोर्ट देखकर भी कई चिकित्सक माथा और पेट पकड़े हुए, सुबह उठकर दौड़ने का प्लान बना रहे हैं ।
साथ ही गारंटी ली गयी थी कि अगर मजा नहीं आये तो पूरा पैसा वापस दिया जायेगा, कुछ चिकित्सकों का कहना है, उन्हें उतना मजा नहीं आया, वे कूपन लेकर डोल रहे हैं, सो अब वे इस गारंटी को भुनाने के प्रयास जल्द ही आयोजनकर्ताओं से मिलकर करेंगे ।
निम्न केटेगरीज में करीब सौ से ज्यादा अवार्ड थे, जिनमें से कई चयन विवादित रहे, नजदीकीवाद दिखा ।
निश्चित रूप से इतना बड़ा आयोजन होता है तो कुछ न कुछ छोटा मोटा विवाद से नाता हो ही जाता है लेकिन दैनिक भास्कर के फ्रंट पेज पर न्यूज छप जाने के बाद अंदर कि बातें सार्वजनिक हुई, पहले दिन मंत्रीजी के आंकड़ों के बारे में खबर छपी तो दुसरे दिन मारपीट और बाबा की खबर । बिना फाइनेंस कमेटी और ट्रेजरार कमेटी के आयोजन पर भी कई सवाल अंत में हुई जीबीएम में खड़े हुए, आइएमए सचिव डॉ. जैन शरीर का ताप बढ़ जाने के कारण, समापन जीबीएम में अनुपस्थित रहे । कुछ आइएमए के वरिष्ठ भी साइडलाइन किये जाने से चुपचाप दिखे |
विवाद 1. बेटी-सालीवाद
निश्चित रूप से आयोजनकर्ता का हस्तक्षेप आयोजन प्रक्रिया, अवार्ड्स, सेशन्स, सेलेब्रिटी चयन में रहता है लेकिन उन्हें इस तरह कि स्थिति से जितना हो सके बचना चाहिए, लेकिन जैन शाहब बच नहीं पाए, सपरिवार महामहिम पूर्व राष्ट्रपति के साथ फोटो खिंचवाने, खुद की बेटी जो कि मुंबई में चिकित्सक है उस से महामहिम को स्वागत बुके भेंट करवाने को लेकर सयानों में चर्चा रही लेकिन सबसे अजीब और विकट स्थिति तब उत्पन्न हुई जब शाहब कि साली शाहीबा जो कि एक आरएएस अधिकारी हैं, भ्रष्टाचार में एसीबी में रंगे हाथ पकड़ी गयी थी, अभी सस्पेंड चल रही हैं, उनसे राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री रोहित कुमार सिंह को स्वागत बुके भेंट करवा दिया गया, घटना से चिकित्सक सतब्ध रह गये लेकिन डायस पर पूर्व राष्ट्रपति के होने के कारण चुप्पी साध गए, सयानों का कहना है कि सस्पेंड साली को इस आयोजन से दूर रखा जाना चाहिए था, उसकी फेसवेल्यु बढाने के लिए इस आयोजन का इस्तेमाल न किया जाए, आयोजन के दो दिन पहले राज्य के एक बड़े मीडिया हाउस ने इसका खुलासा भी कर दिया था कि एक भ्रष्ट अधिकारी राजमेडिकोन में अहम रोल अदा कर रही है, तत्पश्चात आयोजकों ने कहा था कि वे इस अधिकारी से किनारा करेंगे लेकिन ऐन मौके पर बेटीसालिवाद फैलाया गया जिस मुद्दे पर शाम 7 बजे के करीब ऑडीटोरियम की सीढ़ियों पर आयोजकों एवं कुछ चिकित्सकों में तनातनी हुई, तत्पश्चात ड्रिंक काउंटर बंद कर दिए गए तो कई चिकित्सकों ने विरोध दर्ज किया, आयोजक बिगड़ते माहौल को देख गाड़ी में भागने लगे तो कुछ लोगों ने गाड़ी को जाने नहीं दिया, लेकिन अरिसदा अध्यक्ष और आईएमए के सयानों के हस्तक्षेप से श्री जैन रवाना हुए और काउंटर, खाना आदि चले, आधी रात तक ।
विवाद 2. बाबावाद
अक्षरधाम अहमदाबाद में बाबा ज्ञानवत्सल जी का मोटिवेशन एवं टेंशनमुक्ति पर सेशन था, पूरा सभागार खचाखच था, अचानक बड़े ही रूड तरीके से अनाउंस किया गया कि आगे कि सात रो से सभी महिला चिकित्सकों को हटाकर पीछे भेज दिया जाए क्यूंकि बाबाजी का प्रोटोकोल है कि वे अपने से करीब दस मीटर तक किसी भी महिला कि उपस्थिति नहीं चाहते, इस अनाउंसमेंट से पूरा ऑडिटोरियम सकते में आ गया, चिकित्सक महिला हो जा पुरुष कैसा भेद ? जब चिकित्सक ही किसी के साथ भेद नहीं करते तो उनके साथ क्यूँ ? वो भी एलाईट डॉक्टर समुदाय में । कई तर्क दिए जाने लगे कि, बाबा फ्लाईट या ट्रेन में नहीं जाते क्या या अपनी माँ से पैदा भी तो हुए हैं, डाउनलोड थोड़े ही हुए हैं । आयोजकों की समझाईस पर यह बात मान ली गयी कि आगे कि दो रो में कोई नहीं बैठेगा, पीछे सब समान तरीके से बैठेंगे, इसी बाबाजी स्टेज पर एक सेकंड से भी कम समय के लिए आये और चलते बने, जो कि फिर अगले दिन दैनिक भास्कर के मुख्य पेज पर आकर रुके । डेलिगेट्स ने आयोजकों के इस बाबा बुलावन को गलत ठहराया ।
“कुछ बड़ा करना हो तो अटैक करना सीखिए – राजस्थान कि महिला चिकित्सकों से”
विवादों को साइड में कर दें तो आयोजन बेहतरीन रहा, डॉ. वीके जैन का मुंबई से आया मेरा दोस्त वाला, डॉ. अजय चौधरी का जोशीला भाषण और डॉ. वशिष्ठ का बाबा पश्चात कंट्रोल डेमेज सेशन चर्चा में रहे ।
आशा है भविष्य में ऐसे आयोजन सादगी से बिना किसी विवाद के होंगें और चिकित्सा एकता एक अलग ऊंचाई पर जाएगी ।
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जयपुर के बिड़ला ऑडीटोरियम में 29-30 जून को होने वाली कांफ्रेंस में भाग लेने वाले चिकित्सकों की छुट्टी के लिए आदेश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने जारी कर दिए हैं | इसमें अरिसदा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है | कांफ्रेंस का आयोजन भी सामूहिक रूप से आईएमए राजस्थान एवं अरिसदा द्वारा किया जा रहा है 🙂
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राज्य सरकार चिकित्सकों को Dynamic Assured Career Progression (DACP) के तहत समयबद्ध पदोन्नति देती हैं, छठे पे कमीशन में यह पदोन्नति 5400, 6600,7600 etc. pay grade के रूप में दी जाती थी लेकिन सातवें पे कमीशन में यह pay band levels के रूप में दी जाती है |
एक Government Doctor की DACP के बाद उसकी बेसिक पे कितनी हो जायेगी ? यह एक सामान्य सवाल है !
आप भी जानिये कि प्रमोशन बाद कितनी होगी बेसिक और कुछ वृद्धि क्या होगी ? हालाँकि छठे पे कमिशन के मुकाबले सातवें में प्रमोशन में ठेंगा ही मिलता है, जानकर चौंक जायेंगे आप |
DACP Promotion illustration ;
Suppose Basic Pay on 1 April 2018 is – 69000 /-
One bonus promotional increment – 69000 to 71100 /-
Pay Band level shifting from L-14 (5400) to L-16 (6600)
Basic pay shifting : Just NEXT to promotional Basic pay – Next to 71100 is 71400 /-
Basic after DACP – 71400 /-
Gains –
Raised basic = 71400-69000 = 2400/-
Dearness Allowance (Approx. @10%) = 240/-
NPA (If availing @ 20%) = 480/-
HRA (If availing @ 8%) = 192 /-
Gross gain = 2400+240+480+192 = 3312 /-
Net gain (Deduct income tax @ 30%, NPS @ 10%) = 3312-40% = 1987 /- per month
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सरकारी डॉक्टरों पर बाबूराज पड़ रहा भारी ।
सबसे ज्यादा अगर सिस्टम फेलियर है तो वो है, राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में । चिकित्सकों को नियमानुसार समयबद्ध पदोन्नति मिलती है लेकिन उस नियत समय पर वो पदोन्नति दी ही नहीं जाती है । सरकार और विभाग चाहता है कि चिकित्सक अपना काम 24×7 निष्ठा से करें, साथ ही सभी विभागीय लक्ष्यों को भी पूर्ण करें, लेकिन बात जब खुद विभाग की जिम्मेदारी की आती है तो वो फिसड्डी साबित होता है, किसी का प्रोबेशन समय पूरा नहीं होता, किसी का फिक्सेशन नहीं होता, किसी को एनओसी नहीं मिलती तो किसी को कुछ और समयबद्ध नहीं मिलता । हर चीज को डिले करके चिकित्सक को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है ताकि वो अंततः मजबूर होकर, बाबूराज के आगे घुटने टेक दे और फिर चढ़ावा चढ़ावे । चिकित्सक का यह हाल कर दिया जाता है कि वो खुद आहत होकर मजबूरन बाबुओं के आगे नतमस्तक हो जाता है । इन बाबुओं को बड़े अधिकारियों की शह और प्राप्त है, कुछ सयाने तो यह कहते हैं कि अधिकारी भी इस बाबूराज के आगे आहत हैं, कमजोर हैं ।
सरकार ने चिकित्सकों को हर वर्ष की एक अप्रैल को समयबद्ध पदोन्नति देने का नियम बनाया था, जिसकी पालना में करीब 1500 चिकित्सकों की पदोन्नति 1 अप्रैल 2018 को होनी थी लेकिन बाबूराज के कारण नहीं हुई, 1 अप्रैल 2019 को कुछ लोग और जुड़ गए लेकिन पदोन्नति नहीं दी गयी, यानी करीब 1700 चिकित्सकों की पदोन्नति बकाया हो गयी ।
पूर्व में DPC की पदोन्नति के लिए चिकित्सकों को प्रत्येक वर्ष का वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन (APR/ACR) एवं अचल संपत्ति विवरण (IPR) जमा करवाना होता था, लेकिन वर्तमान DACP बिना ACR/IPR के ही समयबद्ध तरीके से की जाती है, साथ ही, इस ACR और IPR का निदेशालय में कोई धणी-धोरी नहीं है, चिकित्सक अपना अपना रेकॉर्ड समय से भेज भी दें तो यह रास्ते मे पता नहीं कहाँ कहाँ अटक जाता है, और इस अनुभाग में पहुंच भी जाये तो दांयी से बांयी टेबल पर नहीं आता, वहां भी कमियां निकाल कर पटक दिया जाता है, भोग की आस में । चिकित्सक तो ये सोचकर आराम से बैठे होते हैं कि उनका रेकॉर्ड तो पहुंच गया है, और 1 अप्रैल को उनकी पदोन्नति हो जाएगी, उन्हें क्या पता कि किस बिल और भोलाराम के जीव में अटक रखा है उनका रिकॉर्ड ।
मई माह में डीओपी द्वारा पदोन्नति किये जाने वाले चिकित्सकों का रिकॉर्ड मांगे जाने पर निदेशालय के बाबूराज द्वारा आधा अधूरा रिकॉर्ड पकड़ा दिया जाता है, कायदे से रिकॉर्ड देने से पहले आंकड़े सार्वजनिक किए जाते हैं कि किसका कौनसा रेकॉर्ड बकाया है ताकि वो अपना अटका रिकॉर्ड निकलवा सके और कुछ बकाया हो तो जमा करवा सके । लेकिन बिना सूचित किये ही अधकचरे को आगे भिजवाया गया और 15 जून को जारी हुई लिस्ट में 1700 में से करीब 600 की ही पदोन्नति की गई, इसमें भी सीनियरिटी का ध्यान नहीं रखा गया है, साथ ही क्लीनिकल ब्रांच वालों को भी एसएमओ बना दिया गया है और फार्माकोलॉजी एवं कम्युनिटी मेडिसिन के एक डॉक्टर को एसएमओ तो उसी ब्रांच के दूसरे को जेएस बना दिया गया है, चार ACR वाले का नाम है लेकिन सैंकड़ों ऐसों का नाम नहीं है जिनकी पूरी 6 जमा थी, यानी भयंकर गफलत हुई है जिससे राज्य के हजार चिकित्सक तनाव में हैं ।
देखना दिलचस्प होगा कि अब बाकी छोड़े गए चिकित्सकों की लिस्ट 1 अप्रैल 2020 के बाद आएगी या पहले ?
पहले तभी आ सकती है जब इस बाबूराज का विरोध हो वो भी सक्षम स्तर पर । हालांकि सेवारत चिकित्सक संघ का मुख्य मुद्दा DACP रहा है लेकिन 2011 की DACP के बारे में उनकी पिछले 2 सालों से जो चुप्पी है वो भी कई सवाल खड़े करती है । करीब एक महीने से गलियारों में चर्चा थी कि केवल 600 की ही DACP हो रही है लेकिन किसी चिकित्सक के भी जूं नहीं रेंगी, जो कि चिंतनीय है । अब डेफर हो चुके चिकित्सकों के लिए इस बाबूराज से पार पाना आसान नहीं होगा । बाबुओं ने फर्जी विसंगतियों से भरी लिस्ट ही सचिवालय भेज दी और वहां से लिस्ट जारी भी हो गई, इससे सचिवालय के अधिकारियों की भी हो रही है किरकिरी, अब देखना यह है कि निदेशालय के अधिकारी तो इनका कुछ बिगाड़ नहीं पाए तो सचिवालय के अधिकारी भी कमतर साबित होते हैं या बाबूराज को रोक पाते हैं ?
पिछले कुछ दिनों से चल रही गफलत का हुआ पटाक्षेप और Non Practicing Allowance को बेसिक पे माना गया है, यानि एनपीए को सभी अलाउंसेज की गणना में जोड़ा जायेगा, PL सरेंडर और रिटायर्मेंट की 300 PL के पैसों के नकद भुगतान में इसे मूल वेतन मानते हुए गणना की जाएगी |
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एक मामले में फाइनेंस विभाग ने चिकित्सकों की जिन्दगी झालावाड़ करने की कोशिश की थी लेकिन मौके पर ही मेडिकल टीचर्स ने जबरदस्त विरोध दर्ज कराया जिससे आर्डर रिवर्ट किया गया |
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राजस्थान में एक जमाना था जब हजार चिकित्सकों कि भर्ती परीक्षा होती तो पांच सौ चिकित्सक परीक्षा देने आते थे, फिर पदस्थापन के बाद करीब चार सौ लोग उस जगह पर जाने का मन बनाते थे, जगह पर जाने के बाद वहां के हालातों से जूझने के बाद करीब सौ लोग भाग खड़े होते थे और तीन सौ चिकित्सक ही सेवा देते थे, उस समय पैसा भी कम मिलता था, समय के साथ सेलरी बढ़ी जो कि आज के दिन नियुक्ति के प्रथम माह में 56100/- है, प्रोबेशन भी एक साल का है उसके बाद स्थाई हो जाने पर सेलरी काफी बढ़ जाती है, साथ ही सेवारत चिकित्सकों को सेवाकाल के अनुसार उच्च शिक्षा (पीजी) में नीट परीक्षा के प्राप्तांकों पर 10-20-30% बोनस अंकों की व्यवस्था भी है, यानी नौकरी अच्छी है |
पिछले कुछ सालों में इसी कारण भर्तियों में भीड़ बढ़ गयी और चयन मुश्किल होने लगा, पदस्थापन में भी दिक्कतें आने लगी, आज के दिन राजस्थान में हालात ये हैं कि चिकित्सा अधिकारीयों के स्वीकृत पद 6200 हैं और प्रदेश में कार्यरत चिकित्सा अधिकारीयों की संख्या 7500 है, ये अतिरिक्त चिकित्सक UTB (Urgent Temporary Basis) वाले हैं, देखें तो हालात ये हैं कि आगामी कई वर्षों तक राजस्थान सरकार को चिकित्सा अधिकारीयों की कोई भी भर्ती नहीं निकालनी है |
बहुत से नए चिकित्सक MBBS करने के उपरांत इंतजार कर रहे हैं कि कब सरकारी सेवा की राह खुले और वे सेवा में आवें लेकिन राह कठिन है |
विकल्प –
देखना दिलचस्प रहेगा कि कम चिकित्सकों का रोना रोने वाली सरकार हजारों बेरोजगार चिकित्सकों को कैसे रोजगार देती है और प्रदेश कि ग्रामीण जनता को चिकित्सा व्यवस्थाएं मुहैया करवाती है |
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राजस्थान के सरकारी डॉक्टरों को वित्त विभाग ने जोर का झटका हौले से दिया है |
सरकारी कर्मचारी एक वर्ष में मिलने वाले कुल उपार्जित अवकाशों में से आधे आवकाश समर्पित (surrender) करके उनका पैसा नकद ले सकते हैं –
सरेंडर के बदले में मिलने वाला पैसा = (15 Days Basic Pay + 15 Days NPA) * DA
साथ ही रिटायर्मेंट के समय 300 PL तक का पैसा नकद ले सकते हैं |
अभी तक यह पैसा मिलता रहा है लेकिन सातवाँ वेतनमान लागू करते ही, वित्त विभाग ने एक गेम कर दिया और NPA को बेसिक पे मानना बंद कर दिया और कहा गया कि DA और CCA के लिए ही NPA को बेसिक माना जाएगा बाकी किसी के लिए भी नहीं यानी समर्पित अवकाश के लिए NPA को बेसिक में नहीं माना जायेगा |
कितना फटका लगा ?
NPA 20% मूल बेसिक का मिलता है और इस पर DA अलग से मिलता है, यानि कोई अगर आज रिटायर हो रहा है तो उसे अपनी 300 PL पर DA का फटका मिलाकर करीब 30% फटका लगेगा जो कि वक़्त के साथ और बढेगा |
रिटायर्मेंट के समय बेसिक = अगर एक लाख पचास हजार मासिक हो तो 30 दिन फटका 30% = करीब पचास हजार
300 दिन की PL का फटका = X10 = पांच लाख रुपये का फटका :/
पांच लाख का तो रिटायर्मेंट पर और हर साल पंद्रह सरेंडर का फटका यानि कुल दस लाख से पार 🙁
Update – खुश खबर : NPA है ‘बेसिक पे’ और इसे जोड़ा जायेगा PL सरेंडर और रिटायर्मेंट बेनिफिट में :
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