The eye assistant from the patient who came for cataract treatment in Bilaspur district hospital, citing the bad government lens, got 5 thousand rupees

14.07.2022
जिला अस्पताल में मोतियाबिंद का इलाज कराने पहुंचे मरीज से नेत्र सहायक ने सरकारी लैंस खराब होने का हवाला देकर 5 हजार रुपए ऐंठ लिए। इसकी जानकारी होने पर मितानिन व परिजन जब सिविल सर्जन से शिकायत करने गए तो अस्पताल के डॉक्टर ने मीटिंग का हवाला देकर भगा दिया।दो मुहानी बूटापारा निवासी राजकुमार मरावी पिता राम सिंह 28 वर्ष ने बताया कि वे मोतियाबिंद का इलाज कराने 11 जुलाई को जिला अस्पताल पहुंचे थे। उन्हें भर्ती कर लिया गया और 12 जुलाई को आपरेशन करने की बात कही गई। अस्पताल की नेत्र सहायक दीपिका रजक ने राजकुमार को सरकारी लैंस ठीक से काम नहीं करने की बात कही। साथ ही कहा कि उसकी उम्र कम है इसके सरकारी लैंस और काम नहीं करेगा। इसकी गारंटी भी नहीं है। अच्छा लेंस लगाने के लिए 5 हजार रुपए की मांग की। इस पर राजकुमार ने परिजनों से 5 हजार रुपए मंगवाकर दीपिका को दे दिए। बाद में उसे पता चला कि ऑपरेशन कर उन्हें सरकारी लैंस ही लगाई गई है, तो उन्होंने इसकी जानकारी परिजनों और मितानिनों को दी। वे इसकी शिकायत लेकर सिविल सर्जन डॉ.अनिल गुप्ता के पाए पहुंचे, लेकिन हॉस्पिटल कंसलटेंट शेफाली कुमावत ने उनके मीटिंग में होने और मामला नेत्र विभाग का होने का हवाला देकर भगा दिया।
रिलीव आदेश के बाद भी नहीं हटा रहे अधिकारी
नेत्र सहायिका दीपिका रजक की मूल पदस्थापना कोटा ब्लाक के ग्राम पोंड़ी में है। वो कई साल से जिला अस्पताल में अटैच हैं। सीएमएचओ कार्यालय से उन्हें रिलीव करने के लिए 3 बार आदेश जारी हो चुका है, लेकिन उन्हें अधिकारी रिलीव ही नहीं कर रहे हैं।यदि कोई स्टॉफ किसी मरीज से पैसा लेकर इलाज करता है तो ये गलत है। इस संबंध में जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. अनिल गुप्ता, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल।

⇓ Share post on Whatsapp & Facebook  ⇓

Facebook Comments